ePaper

Sasaram Chaupal: ‘गरीब का बेटा, लेकिन करोड़ों की सवारी’ फुस्स वादों पर जनता का सवाल पड़ा भारी 

Updated at : 18 Sep 2025 9:05 PM (IST)
विज्ञापन
Sasaram Legislative Assembly Chaupal

सासाराम विधानसभा के चौपाल में जनता के सवालों का जवाब देते जनप्रतिनिधि

Sasaram Vidhan Sabha Chaupal: सासाराम के पुराने बस पड़ाव पर लगे ‘प्रभात खबर चौपाल’ में जनता ने नेताओं से तीखे सवाल किए. ट्रैफिक जाम, अशोक शिलालेख, पत्थर उद्योग, मेडिकल कॉलेज और पर्यटन विकास जैसे मुद्दे छाए रहे. नेताओं ने सफाई दी, वादे किए और आरोप-प्रत्यारोप हुए. माहौल ने साफ कर दिया कि इस बार जनता खामोश नहीं, बल्कि सख्त परीक्षक बनेगी.

विज्ञापन

Sasaram Legislative Assembly Election Express Chaupal: गुरुवार को सासाराम के पुराने बस पड़ाव पर ‘प्रभात खबर चौपाल’ लगा तो मंच पर नेताओं से ज्यादा गरमी दर्शकों के सवालों में दिखी. यहां जनता ने खुलकर नेताओं को कटघरे में खड़ा किया. कभी अशोक के शिलालेख की सुरक्षा पर, कभी ट्रैफिक जाम पर, तो कभी नेताओं की कथनी और करनी के अंतर पर. माहौल ऐसा बना कि जनता के तीखे सवालों और नेताओं के तर्क-वितर्क ने चौपाल को चुनावी बहस का रंग दे दिया.

इन मुद्दों पर जमकर हुई बहस 

‘प्रभात खबर इलेक्शन एक्सप्रेस’ की इस चौपाल से सासाराम विधानसभा के पांच अहम मुद्दे उभरकर सामने आए. सबसे पहले रोहतास जिले में पत्थर उद्योग को फिर से शुरू करने की मांग जोर-शोर से उठी. साथ ही अशोक स्तंभ के शिलालेख की सुरक्षा और उसके सौंदर्यीकरण पर भी लोगों ने चिंता जताई.

ट्रैफिक व्यवस्था और पर्यटन पर उठा सवाल

शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को दुरुस्त करने की आवश्यकता पर चर्चा हुई, क्योंकि जाम की समस्या लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन चुकी है. इसके अलावा क्षेत्र के पर्यटन स्थलों के विकास और उनके प्रचार-प्रसार की मांग की गई, ताकि यहां सैलानियों की संख्या बढ़ सके. अंत में सासाराम में एक सरकारी मेडिकल कॉलेज की स्थापना की बात भी प्रमुख रूप से सामने आई, जिससे स्थानीय लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें.

जनप्रतिनिधियों ने दिया जनता के सवालों का जवाब 

मंच पर BJP के अखिलेश कुमार, JDU जिलाध्यक्ष अजय सिंह कुशवाहा, कांग्रेस नेता राजेश्वर कुशवाहा, RJD के तौकिर मंसूरी, जनसुराज के विनोद तिवारी और भावी प्रत्याशी तोराब नेयाजी मौजूद थे. हर किसी से जनता ने सीधे सवाल पूछे, कभी गुस्से में, कभी तंज कसते हुए.

आखिर लोगों ने जनप्रतिनिधियों से क्या पूछा ? 

गरीब का बेटा, लेकिन करोड़ों की सवारी?

बहस की शुरुआत एक आम आदमी के सवाल से हुई. उसने कहा,“वोट मांगने के लिए नेता खुद को गरीब का बेटा बताते हैं, लेकिन जीतते ही 20 लाख की गाड़ी पर घूमते हैं. गरीब की परिभाषा आखिर क्या है?”

जवाब में भाजपा नेता अखिलेश कुमार ने सीधा वार लालू प्रसाद पर किया. बोले, “इसका जवाब लालू यादव को देना चाहिए. वे गरीबों का नेता बताते हैं, लेकिन चलते हेलीकॉप्टर से हैं.” जनता ने ठहाका लगाया, लेकिन सवाल वहीं रह गया—नेता और गरीब के बीच की दूरी आखिर कब खत्म होगी?

सच्चर कमेटी और अधूरी कहानी

इसके बाद कांग्रेस पर सवाल दागा गया,“सच्चर कमेटी की रिपोर्ट क्यों लागू नहीं हुई?” इस पर कांग्रेस नेता राजेश्वर कुशवाहा ने सफाई दी, “हमारी सरकार दोबारा केंद्र में नहीं आयी, इसलिए रिपोर्ट अधूरी रह गई.” जवाब सुनकर जनता के चेहरे पर असंतोष साफ झलक रहा था.

ट्रैफिक और ‘राक्षसराज’ की बहस

सासाराम की जाम की समस्या पर सवाल आते ही माहौल और गरम हो गया. राजद के प्रतिनिधि ने इसे प्रशासन और पुलिस की नाकामी बताया और आरोप लगाया, “आज पूरे राज्य में राक्षसराज है. अधिकारी सुरसा की तरह मुंहबाय जनता का पैसा लूटने के लिए खड़े हैं.” उन्होंने स्नेहा हत्याकांड और इंद्रपुरी की लापता बच्ची का मामला उठाकर सरकार को कटघरे में खड़ा किया.

जदयू जिलाध्यक्ष अजय कुशवाहा ने इन डाटा को गलत बताया और कहा, “पुलिस अपना काम कर रही है. लेकिन कई लोगों की मानसिकता आज भी 20 साल पुरानी है.”

शिक्षा पर चुप्पी, सवाल पर नाराजगी

शहर के तीन बड़े कॉलेजों में प्रोफेसरों की मोटी तनख्वाह और खाली क्लास का मुद्दा भी उठा. सवाल करने वाले ने नीतीश कुमार की तुलना इंदिरा गांधी से करते हुए तीखा कटाक्ष किया. इस पर जदयू नेता भड़क उठे और कहा,“अगर सवाल पूछने का तरीका ऐसा होगा, तो हम जवाब कैसे देंगे? संयमित होकर सवाल कीजिए.” इस जवाब ने जनता की नाराजगी और बढ़ा दी.

पत्थर उद्योग पर वादा

जब करवंदिया पत्थर उद्योग का मुद्दा उठा, तो जनसुराज के प्रवक्ता विनोद तिवारी ने इसे चुनावी संकल्प बना डाला. उन्होंने कहा, “हम पांच संकल्पों के साथ चुनाव में उतरे हैं, लेकिन सासाराम के लिए मैं छठा संकल्प लेता हूं. सरकार बनी तो पत्थर उद्योग को फिर से शुरू करेंगे.” यह बयान जनता के बीच तालियों से स्वागत पाता दिखा.

Also read: विकास vs समस्याओं की गूंज, विधायक के काम पर संतोष लेकिन चाहिए नया नेतृत्व 

इस बार के चुनाव में खामोश दर्शक नहीं, बल्कि सख्त परीक्षक बनेगी Sasaram की जनता 

सासाराम चौपाल ने यह साफ कर दिया कि जनता अब केवल वादों से संतुष्ट नहीं है. लोग सवाल पूछ रहे हैं, जवाब मांग रहे हैं और नेताओं की कथनी-करनी का हिसाब ले रहे हैं. इस चौपाल में जितने सवाल उठे, उतने ही जख्म भी सामने आए. अधूरा विकास, टूटी उम्मीदें और कुछ हद तक बदले हुए हालात. चुनाव से पहले यह माहौल बताता है कि इस बार जनता खामोश दर्शक नहीं, बल्कि सख्त परीक्षक बनने वाली है.

विज्ञापन
Nishant Kumar

लेखक के बारे में

By Nishant Kumar

Nishant Kumar: निशांत कुमार पिछले तीन सालों से डिजिटल पत्रकारिता कर रहे हैं. दैनिक भास्कर के बाद राजस्थान पत्रिका के डिजिटल टीम का हिस्सा रहें. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल के नेशनल-इंटेरनेशनल और स्पोर्ट्स टीम में काम कर रहे हैं. किस्सागोई हैं और देश-विदेश की कहानियों पर नजर रखते हैं. साहित्य पढ़ने-लिखने में रुचि है.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन