Govindganj Vidhansabha: गोविंदगंज के लोगों ने हर बार बदली अपनी पसंद, BJP के सामने सीट बचाने की चुनौती
Published by : Paritosh Shahi Updated At : 08 Aug 2025 9:28 PM
सांकेतिक तस्वीर
Govindganj Vidhansabha: गोविंदगंज सीट सामाजिक और जातीय संतुलन के लिहाज से यह सीट हमेशा से राजनीतिक दलों के लिए चुनौतीपूर्ण रही है. कृषि प्रधान इस क्षेत्र में विकास, सड़क, सिंचाई और रोजगार जैसे मुद्दे हमेशा से चुनावी बहस का केंद्र रहे हैं.
Govindganj Vidhansabha: पूर्वी चंपारण जिले की महत्वपूर्ण गोविंदगंज विधानसभा सीट बिहार की सियासत में एक अहम स्थान रखती है. पिछले विधानसभा चुनाव 2020 में गोविंदगंज सीट पर कड़ा मुकाबला देखने को मिला था. एनडीए गठबंधन की ओर से बीजेपी ने प्रत्याशी उतारा था, जबकि महागठबंधन की तरफ से कांग्रेस ने जोरदार टक्कर दी थी. अंततः यह सीट भारतीय जनता पार्टी (BJP) के खाते में गई. भाजपा के सुनील मणि त्रिपाठी ने कांग्रेस प्रत्याशी को हराया.
बीजेपी की जीत के पीछे रहे ये कारण
इस जीत के पीछे बीजेपी की मजबूत संगठनात्मक पकड़, केंद्र व राज्य सरकार की योजनाएं और स्थानीय जातीय समीकरणों का संतुलन महत्वपूर्ण कारक साबित हुए थे. खासकर यादव, कुशवाहा, वैश्य और दलित वोटों में हुए बंटवारे ने बीजेपी को लाभ पहुंचाया. अब जब 2025 का चुनाव धीरे-धीरे नजदीक आ रहा है, तो सभी प्रमुख दल इस सीट पर फिर से अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति में जुट गए हैं.
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लगातार दो बार नहीं चुना गया कोई भी उम्मीदवार
राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो गोविंदगंज एक बार फिर हॉट सीट बनने जा रही है, जहां उम्मीदवारों को न केवल संगठनात्मक ताकत दिखानी होगी, बल्कि स्थानीय मुद्दों की गहरी समझ भी रखनी होगी. इसके पीछे कारण है कि यहां के लोगों ने हर बार अपनी पसंद को बदला और पिछले 4 चुनाव से यहां किसी भी विधायक ने लगातार दो बार जीत नहीं दर्ज कर पाये हैं.
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By Paritosh Shahi
परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.
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