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Pawan Singh: अपनी शर्तों पर BJP में शामिल हुए पवन सिंह, विधानसभा चुनाव जीतने के लिए पार्टी ने दी कुर्बानी

Updated at : 04 Oct 2025 4:02 PM (IST)
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पवन सिंह

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Pawan Singh: लोकसभा चुनाव में हार का सामना कर चुके पवन सिंह विधानसभा चुनाव में जीतकर अपने दर्द को कम करने की कोशिश में है. ऐसे में उन्होंने जीत का स्वाद चखने के लिए एक बार फिर से अपनी पुरानी पार्टी बीजेपी की तरफ रुख किया है. हालांकि बताया जा रहा है कि पवन इस बार अपनी शर्तों पर बीजेपी में शामिल हुए हैं.

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Pawan Singh: भोजपुरी के पावर स्टार पवन सिंह 16 महीने बाद भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए है. बताया जा रहा है कि एक्टर ने बीजेपी में वापसी के लिए पार्टी के सामने शर्त रखा था कि वह पार्टी में तभी आएंगे जब पार्टी उन्हें आरा विधानसभा सीट से प्रत्याशी बनाएगी. लोकसभा चुनाव में पवन सिंह की ताकत की वजह से कई सीटों पर हार का सामना कर चुकी बीजेपी ने भी एक्टर की बात को मान लिया. हालांकि चर्चा तो यह भी थी कि पवन बीजेपी से टिकट ना मिलने की स्थिती में तेजस्वी यादव की राष्ट्रीय जनता दल या जन सुराज से चुनावी मैदान में उतर सकते थे और उनके राजद और जन सुराज के नेताओं के साथ लगातार संपर्क में रहने की भी चर्चा आम थी. 

पवन सिंह
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चुनाव लड़ने के लिए आरा सीट को ही क्यों चुना पवन ने?

लोकसभा चुनाव में हार का सामना कर चुके पवन सिंह विधानसभा चुनाव में जीतकर अपने दर्द को कम करने की कोशिश में है. लेकिन विधानसभा और लोकसभा चुनाव दोनों के मुद्दे अलग-अलग और समीकरण दोनों अलग होते हैं. ऐसे में पवन सिंह ने इस सीट के जातीय समीकरणों को ध्यान में रखकर अपने लिए इस सीट की मांग की है. बात करें इस विधानसभा में जातिवार वोटरों को तो यहां 35 हजार राजपूत, 28 हजार यादव मतदाता हैं. साथ ही विधानसभा क्षेत्र में ब्राह्मण और दलित मतदाता भी अच्छी संख्या में हैं. ब्राह्मण जहां बीजेपी का कोर वोट बैंक माना जाता है वहीं, दलित चिराग पासवान और जीतनराम मांझी की पार्टियों के मजबूत वोटर हैं. ऐसे में इन सारे समीकरणों को ध्यान में रखकर पवन सिंह ने आरा सीट को चुना है

आरा सीट पर है BJP का दबदबा

वहीं, आरा विधानसभा सीट पर साल 2000 से लगातार बीजेपी का कब्जा है. पार्टी के बड़े नेता अमरेंद्र प्रताप सिंह इस सीट पर पांच बार से विधायक हैं. हालांकि 2015 के विधानसभा चुनाव में यह सीट राजद के खाते में चली गई और मोहम्मद नवाज आलम विधायक बने. इसके पीछे कारण ये था कि जेडीयू उस समय महागठबंधन के साथ थी. लेकिन 2020 में जेडीयू के एनडीए में आने के बाद एक बार फिर से यह सीट बीजेपी के खाते में आई और सिंह पांचवी बार विधायक बनें. वहीं, अब उनकी उम्र 78 साल हो गई है और पार्टी अपने नियम के मुताबिक इस सीट के लिए कोई मजबूत और नया उम्मीदवार ढूढ़ रही है और पवन सिंह में पार्टी को मौका दिखता है. ऐसे में पार्टी अपने बड़े नेता की नाराजगी भी मोल उठाने की तैयारी में है. 

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पवन सिंह में बीजेपी को दिखता है मौका 

बीजेपी भी पवन सिंह में मौका देख रही है. इसके पीछे दो कारण हैं पहला कि पवन सिंह के पास अपना फैन बेस है. दूसरा की पवन सिंह भोजपुर के साथ ही आसपास के इलाकों में भी लोकप्रियता रखते हैं. वहीं, बीजेपी पवन के सहारे राजपूत वोटरों को भी साधने की कोशिश में है.

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Prashant Tiwari

लेखक के बारे में

By Prashant Tiwari

प्रशांत तिवारी डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत पंजाब केसरी से करके राजस्थान पत्रिका होते हुए फिलहाल प्रभात खबर डिजिटल के बिहार टीम तक पहुंचे हैं, देश और राज्य की राजनीति में गहरी दिलचस्पी रखते हैं. साथ ही अभी पत्रकारिता की बारीकियों को सीखने में जुटे हुए हैं.

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