बिहार चुनाव से पहले मुन्ना शुक्ला और सूरजभान सिंह को मिली बड़ी राहत, 28 साल पुराने हत्याकांड मामले में आया फैसला
Published by : Anshuman Parashar Updated At : 17 Oct 2025 9:48 PM
28 साल पुराने हत्याकांड मामले में सूरजभान सिंह और मुन्ना शुक्ला को मिली राहत
Bihar Election 2025: बिहार चुनाव 2025 के बीच वैशाली में सियासी और न्यायिक हलचल देखने को मिली. करीब 28 साल पुराने बबलू श्रीवास्तव हत्याकांड मामले में पूर्व विधायक मुन्ना शुक्ला और पूर्व सांसद सूरजभान सिंह को हाजीपुर कोर्ट ने सबूतों के अभाव में बाइज्जत बरी कर दिया.
Bihar Election 2025: पूर्व विधायक विजय कुमार उर्फ मुन्ना शुक्ला और पूर्व सांसद सूरजभान सिंह को लगभग 28 साल पहले हुए बबलू श्रीवास्तव हत्याकांड मामले में हाजीपुर कोर्ट ने बड़ी राहत दी है. अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृतीय उमेश कुमार की अदालत ने शुक्रवार को दोनों बाहुबली नेताओं को बबलू श्रीवास्तव सेमत तीन सुरक्षाकर्मियों की हत्या के मामले में सबूतों के अभाव में बाइज्जत बरी कर दिया.
मुन्ना शुक्ला और सूरजभान सिंह किस मामले में गए थे जेल?
यह घटना करीब 28 वर्ष पहले वैशाली जिले के सराय थाना क्षेत्र के पटेढ़ा अख्तियारपुर गांव के पास हुई थी. यह मामला हाजीपुर जेल से पेशी के लिए मुजफ्फरपुर कोर्ट लाए जा रहे विचाराधीन बंदी बबलू श्रीवास्तव की हत्या से जुड़ा है. पुलिस वैन पर अज्ञात हमलावरों ने अंधाधुंध फायरिंग कर दी थी, जिसमें बबलू श्रीवास्तव और उनके साथ चल रहे तीन सुरक्षाकर्मी भी मारे गए थे. कुल पांच लोगों की नृशंस हत्या के इस मामले में ही लालगंज के पूर्व विधायक मुन्ना शुक्ला और पूर्व सांसद सूरजभान सिंह को आरोपी बनाया गया था.
परिजनों ने फैसले को बताया ‘न्याय की जीत’
मुन्ना शुक्ला, जो पहले से ही पूर्व मंत्री बृजबिहारी प्रसाद हत्याकांड में जेल की सजा काट रहे हैं, उनके परिजनों ने इस फैसले पर संतोष व्यक्त किया है. परिजनों का कहना है कि मारे गए बंदी बबलू श्रीवास्तव मुन्ना शुक्ला के भाई भुटकुन शुक्ला हत्याकांड का आरोपी था. इसी संबंध के आधार पर मुन्ना शुक्ला और सूरजभान सिंह का नाम दुर्भावनापूर्ण तरीके से इस मामले में फंसाया गया था. परिजनों के अनुसार, कोर्ट ने अब न्याय किया है.
फैसले के समय मुन्ना शुक्ला और सूरजभान सिंह दोनों अदालत में मौजूद थे. सिविल कोर्ट के एपीपी राजकुमार सिंह ने इस महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय की पुष्टि की. बिहार की राजनीति के दो बाहुबली नेताओं के लिए यह फैसला कानूनी रूप से एक बड़ी जीत मानी जा रही है.
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अंशुमान पराशर पिछले दो वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल के लिए बिजनेस की लेटेस्ट खबरों पर काम कर रहे हैं. इसे पहले बिहार की राजनीति, अपराध पर भी इन्होंने खबरें लिखी हैं. बिहार विधान सभा चुनाव 2025 में इन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और विस्तृत राजनीतिक कवरेज किया है.
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