आखिरी समय में बदल जाता है हरनौत का माहौल, इस बार मुकाबला और दिलचस्प, जीतने पर हरिनारायण बनेंगे सबसे ज्यादा उम्र के MLA
Published by : Paritosh Shahi Updated At : 01 Nov 2025 6:01 PM
सांकेतिक फोटो
Bihar Chunav 2025: हरनौत विधानसभा सीट पर इस बार दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल रहा है. जदयू के वरिष्ठ नेता हरिनारायण सिंह फिर मैदान में हैं, जिन्हें कांग्रेस के अरुण कुमार और जनसुराज के कमलेश पासवान कड़ी चुनौती दे रहे हैं. यह चुनाव नीतीश कुमार की साख और हरिनारायण के रिकॉर्ड दोनों के लिए अहम है.
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Bihar Chunav 2025: हरनौत विधानसभा सीट से 78 वर्षीय जदयू उम्मीदवार हरिनारायण सिंह एक बार फिर मैदान में हैं. उनके सामने 42 वर्षीय कांग्रेस प्रत्याशी अरुण कुमार चुनौती पेश कर रहे हैं, जबकि जनसुराज के कमलेश पासवान मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश में जुटे हैं. चंडी और हरनौत दो विधानसभा क्षेत्र से हरिनारायण सिंह अब तक 13 बार चुनाव लड़ चुके हैं और 9 बार जीत हासिल कर चुके हैं. इस बार यदि वे जीतते हैं, तो सबसे अधिक उम्र में विधायक बनने और सबसे अधिक बार चुनाव लड़ने का एक अनोखा रिकॉर्ड बना सकते हैं.
मुकाबला जदयू बनाम कांग्रेस
इस सीट पर कुल 11 उम्मीदवार हैं, लेकिन मुख्य मुकाबला जदयू और कांग्रेस के बीच ही माना जा रहा है. पिछले तीन चुनावों (2010, 2015, 2020) में यहां जदयू का सीधा मुकाबला लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) से हुआ था और जदयू ने लगातार जीत दर्ज की. इस बार एलजेपी एनडीए में शामिल है, जिसका सीधा लाभ जदयू के उम्मीदवार को मिल सकता है. जनसुराज के उम्मीदवार कमलेश पासवान, जो नगर पंचायत के तीन बार निर्वाचित प्रतिनिधि रह चुके हैं, शहरी वोटों में सेंध लगा सकते हैं. माना जा रहा है कि इससे कांग्रेस को फायदा और जदयू को नुकसान हो सकता है.
पार्टी में असंतोष, लेकिन एकजुटता दिख रही
जदयू के कुछ पुराने कार्यकर्ताओं ने हरिनारायण सिंह की उम्मीदवारी पर शुरू में नाराजगी जतायी थी, लेकिन नीतीश कुमार के हस्तक्षेप के बाद स्थिति काफी हद तक सामान्य हो गयी है. छह नवंबर को होने वाली मतदान की तारीख नजदीक आने के साथ ही पार्टी की एकजुटता दिखने लगी है.
स्थानीय मतदाता बताते हैं कि हरनौत में चुनाव से ठीक 24 घंटे पहले माहौल बदल जाता है. आखिरी समय में लोग जाति-धर्म भूलकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की प्रतिष्ठा के लिए वोट करने एकजुट हो जाते हैं.
हरनौत नीतीश कुमार की राजनीतिक कर्मभूमि रही है. उन्होंने यहां से चार बार चुनाव लड़ा. 1977 और 1980 में हारे, जबकि 1985 और 1995 में जीते. इसके बाद उन्होंने विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा. साल 2010 से हरिनारायण सिंह लगातार यहां से विधायक चुने जा रहे हैं.
पिछले चुनाव का रुझान
2020 के चुनाव में जदयू प्रत्याशी हरिनारायण सिंह को 65001 वोट मिले थे, जबकि एलजेपी की ममता देवी 37951 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रही थीं. कांग्रेस के कुंदन कुमार 21003 वोट लेकर तीसरे स्थान पर रहे थे. इस तरह जदयू ने एलजेपी पर लगभग 27000 वोटों की बढ़त हासिल की थी.
इस बार हरनौत की लड़ाई पहले से ज्यादा दिलचस्प और महत्वपूर्ण है. नीतीश कुमार की साख, एक वरिष्ठ उम्मीदवार का रिकॉर्ड और बदलते राजनीतिक समीकरण सब कुछ दांव पर लगा है. हरनौत एक बार फिर बिहार की राजनीति का हॉटस्पॉट बनने जा रहा है.
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उम्मीदवारों की सूची
- अरुण कुमार (भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस)
- धर्मेंद्र कुमार (आम आदमी पार्टी)
- हरि नारायण सिंह (जनता दल यूनाइटेड)
- इन्द्रसेन प्रियदर्शी (राष्ट्रीय सनातन पार्टी)
- कन्हैया लाल यादव- भारतीय पार्टी (लोकतांत्रिक)
- कमलेश पासवान (जन सुराज पार्टी)
- धनंजय कुमार (विकास वंचित इंसान पार्टी)
- प्रेम रंजन कुमार (जनतांत्रिक लोकहित पार्टी)
- अनिरुद्ध कुमार (निर्दलीय)
- पिंटू पासवान (निर्दलीय)
- विनय भूषण कुमार (निर्दलीय)
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अब तक का हरनौत विधान सभा क्षेत्र से जीत उम्मीदवारों की सूची
चुनावी वर्ष- विजेता- पार्टी
1977- भोला प्रसाद सिंह- स्वतंत्र राजनीतिज्ञ
1980- अरुण कुमार सिंह- स्वतंत्र राजनीतिज्ञ
1985- नीतीश कुमार – लोकदल
1990- ब्रज नंदन यादव – स्वतंत्र राजनीतिज्ञ
1995- नीतीश कुमार – समता पार्टी
1996- अरुण कुमार सिंह- समता पार्टी
2000- विश्वमोहन चौधरी- समता पार्टी
2005- सुनील कुमार- जदयू
2005- सुनील कुमार- जदयू
2010- हरि नारायण सिंह- जदयू
2015- हरि नारायण सिंह- जदयू
2020- हरि नारायण सिंह- जदयू
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By Paritosh Shahi
परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.
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