Bihar Election 2025: महागठबंधन में लेफ्ट और VIP फायदे में, सीट बंटवारे में NDA के छोटे दलों को हुआ नुकसान
Published by : Abhinandan Pandey Updated At : 23 Oct 2025 8:07 AM
चिराग, मांझी और उपेंद्र कुशवाहा को हुआ सीटों का नुकसान
Bihar Election 2025: बिहार चुनाव में सीटों के नए समीकरण ने राजनीतिक पारा बढ़ा दिया है. जहां महागठबंधन में लेफ्ट दलों और वीआईपी को बढ़त मिली है, वहीं एनडीए के सहयोगी दलों को सीटों में कटौती झेलनी पड़ी है. दोनों गठबंधनों के भीतर असंतोष भी खुलकर सामने आने लगा है.
Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव के पहले और दूसरे चरण के नामांकन के बाद अब दोनों प्रमुख गठबंधनों एनडीए और महागठबंधन के बीच सीट बंटवारे का गणित पूरी तरह बदल चुका है. इस बार का राजनीतिक समीकरण न सिर्फ पिछले चुनाव से अलग है बल्कि इसमें नए सहयोगियों की एंट्री और पुराने दलों की स्थिति में बड़ा फेरबदल भी देखने को मिला है. जहां महागठबंधन के सहयोगी दलों में उत्साह है, वहीं एनडीए के घटक दलों के बीच सीटों में कटौती ने नाराजगी की स्थिति पैदा कर दी है.
एनडीए के लिए सीटों में कमी, सहयोगियों को करना पड़ा समायोजन
2020 के विधानसभा चुनाव में एनडीए के तहत जदयू को 115 और बीजेपी को 110 सीटें दी गई थीं. लेकिन इस बार दोनों प्रमुख दलों ने बराबर-बराबर 101-101 सीटों पर चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है. इसका मतलब है कि जदयू को 14 और बीजेपी को 9 सीटों की हानि हुई है. एनडीए के घटक दलों के बीच यह समझौता सहयोगी पार्टियों को समायोजित करने की मजबूरी में किया गया.
मांझी को 7, उपेंद्र कुशवाहा को 6 सीटों पर करना पड़ा संतोष
पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) को इस बार 7 की जगह 6 सीटें मिली हैं. वहीं उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) को 6 सीटों पर संतोष करना पड़ा है. दिलचस्प यह है कि चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), जो पिछले चुनाव में एनडीए से अलग होकर 134 सीटों पर लड़ी थी, इस बार फिर गठबंधन में शामिल हुई है. लेकिन, उसे सिर्फ 29 सीटें मिली हैं. यानी एनडीए में वापसी के बावजूद लोजपा (रा) को अपनी राजनीतिक सीमाओं को काफी घटाना पड़ा है.
महागठबंधन में ‘संतुलन का खेल’, कांग्रेस ने दी बड़ी कुर्बानी
महागठबंधन में सीटों का बंटवारा भी आसान नहीं रहा. राजद और कांग्रेस के बीच लंबे समय तक चली खींचतान के बाद आखिरकार फॉर्मूला तय हुआ. राष्ट्रीय जनता दल (राजद) को इस बार 143 सीटें मिली हैं, जो पिछली बार से सिर्फ एक कम है. वहीं कांग्रेस को 61 सीटें दी गई हैं, जबकि 2020 में वह 70 सीटों पर चुनाव लड़ी थी. यानी कांग्रेस ने गठबंधन को मजबूत रखने के लिए 9 सीटों का बलिदान दिया है. हालांकि पार्टी के अंदर कुछ जिलों में असंतोष की खबरें हैं, लेकिन नेतृत्व इसे “साझा लक्ष्य के लिए आवश्यक त्याग” बताकर शांत करने में जुटा है.
वाम दलों और वीआईपी को मिला फायदा
महागठबंधन में इस बार वामपंथी दलों की स्थिति पहले से कहीं बेहतर हुई है. 2020 में भाकपा-माले, सीपीआई और सीपीएम को कुल 29 सीटें दी गई थीं, जबकि इस बार यह संख्या बढ़कर 35 हो गई है.
- भाकपा-माले को 19 से बढ़ाकर 20 सीटें
- सीपीआई को 6 से बढ़ाकर 9 सीटें
- सीपीएम को 4 से बढ़ाकर 6 सीटें मिली हैं.
इसके अलावा, इस बार विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) ने भी पाला बदलते हुए महागठबंधन का दामन थामा है. वीआईपी को पहले एनडीए से 11 सीटें मिली थीं, जबकि अब महागठबंधन में उसे 15 सीटों पर चुनाव लड़ने का मौका दिया गया है.
नए चेहरों की एंट्री, दोनों गठबंधनों में असंतोष
इस बार के चुनाव में दोनों ही गठबंधनों में नए दलों की आमद और पुराने समीकरणों की उलटफेर ने माहौल को दिलचस्प बना दिया है. जहां एनडीए ने लोजपा (रा) के लिए जगह बनाई है, वहीं महागठबंधन ने वीआईपी को शामिल करके नई सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश की है. हालांकि, कुछ सीटों पर उम्मीदवार चयन को लेकर असंतोष और विरोध अब भी जारी है.
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By Abhinandan Pandey
अभिनंदन पांडेय पिछले दो वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की और दैनिक जागरण, भोपाल में काम किया. वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के हिस्सा हैं. राजनीति, खेल और किस्से-कहानियों में उनकी खास रुचि है. आसान भाषा में खबरों को लोगों तक पहुंचाना और ट्रेंडिंग मुद्दों को समझना उन्हें पसंद है. अभिनंदन ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से की. पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को सही तरीके से लोगों तक पहुंचाने की सोच ने उन्हें इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. दैनिक जागरण में रिपोर्टिंग के दौरान उन्होंने भोपाल में बॉलीवुड के कई बड़े कलाकारों और चर्चित हस्तियों के इंटरव्यू किए. यह अनुभव उनके करियर के लिए काफी अहम रहा. इसके बाद उन्होंने प्रभात खबर डिजिटल में इंटर्नशिप की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की वास्तविक दुनिया को करीब से समझा. बहुत कम समय में उन्होंने रियल टाइम न्यूज लिखना शुरू कर दिया. इस दौरान उन्होंने सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता भी बेहद जरूरी होती है. फिलहाल वह प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ काम कर रहे हैं. बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में कवर किया, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और वीडियो कंटेंट भी तैयार किए. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और भरोसेमंद खबर पहुंचे. पत्रकारिता में उनका लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और एक विश्वसनीय पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.
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