VIDEO : आसनसोल रेलवे स्टेशन में दो सप्ताह से बंद है भोजनालय, दर-दर भटक रहे यात्री
Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 11 Aug 2023 5:52 PM
आईआरसीटीसी के आसनसोल स्टेशन के एरिया मैनेजर निखिल सोनर ने प्रभात खबर को बताया कि प्लेटफॉर्म नंबर पांच के भोजनालय को चलाने के लिए जिस व्यक्ति को टेंडर दिया गया था, उसकी अवधि समाप्त हो गई. उन्होंने कहा कि इसका टेंडर दोबारा देने की प्रक्रिया जारी है.
आसनसोल : पश्चिम बंगाल के आसनसोल डिस्ट्रिक्ट टाउन में बने रेलवे स्टेशन पर आने वाले यात्रियों को भोजन के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है. इसका कारण यह है कि आसनसोल रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर पांच पर बना भोजनालय करीब दो सप्ताह से बंद है. इसकी वजह से यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. चौंकाने वाली बात यह है कि इस भोजनालय के बंद हो जाने की वजह से यहां आने वाले यात्रियों को पेट की भूख मिटाने के लिए जेब ढीली करनी पड़ रही है. फिर भी उन्हें ढंग का खाना नहीं मिल रहा है. आपको बता दें कि आसनसोल भारतीय रेलवे का वही स्टेशन है, जहां पर देश में रेलवे की ओर से पहला रेस्टूरेंट खोला गया था.
इस बाबत आईआरसीटीसी के आसनसोल स्टेशन के एरिया मैनेजर निखिल सोनर ने प्रभात खबर को बताया कि प्लेटफॉर्म नंबर पांच के भोजनालय को चलाने के लिए जिस व्यक्ति को टेंडर दिया गया था, उसकी अवधि समाप्त हो गई. उन्होंने कहा कि इसका टेंडर दोबारा देने की प्रक्रिया जारी है. इस प्रक्रिया के पूरी होते ही इस भोजनालय को दोबारा चालू कर दिया जाएगा.
आपको बता दें कि आसनसोल रेलवे स्टेशन के पांच नंबर प्लेटफॉर्म पर बने भोजनालय में लोगों को कम पैसे में अच्छा भोजन मिलता है. यही वजह है कि यहां पर न केवल ट्रेन से सफर करने वाली यात्री ही अपनी भूख मिटाते हैं, बल्कि स्टेशन पर काम करने वाले कूली, आसपास के दुकानदार और इसे जानने वाले लोग भी भोजन करते हैं. एक दैनिक यात्री ने बताया कि इस भोजनालय में कम पैसा में अच्छा खाना मिलता है. उन्होंने कहा कि कोलकाता के बाद आसनसोल रेलवे स्टेशन काफी विख्यात है.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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