पंचर का झंझट खत्म! घिसे-पिटे टायर की लाइफ बढ़ाने का धांसू ट्रिक, सिर्फ इतने होंगे खर्च

Tyre Puncture trick (Image: ChatGPT)
मानसून में खराब सड़कों पर बाइक चलाना मुश्किल हो जाता है, खासकर घिसे-पिटे टायरों के साथ. एंटी पंचर लिक्विड (APL) एक ऐसा समाधान है जो आपके टायर को खुद-ब-खुद पंचर से बचाता है. यह लिक्विड सिर्फ पंचर रोकता ही नहीं, बल्कि टायर को ठंडा भी रखता है और 10,000 किलोमीटर तक की वारंटी के साथ आता है.
मानसून के मौसम में लगातार बारिश के चलते सड़कों की हालत खराब हो जाती है और जगह-जगह पर गड्ढे बन जाते हैं. ऐसे में डैमेज सड़कों पर बाइक चलाना मुश्किल हो जाता है. सबसे ज्यादा दिक्कत उन लोगों को होती है, जिनके बाइक की टायरें पुरानी हो जाती हैं या ज्यादा घिस चुके होते हैं, जिसके चलते पंचर की संभावना बढ़ जाती है. ऐसे में टायर में पंचर की इस प्रॉब्लम को एंटी पंचर लिक्विड (APL) से ठीक किया जा सकता है. अगर आपकी गाड़ी के टायर पुराने और घिसे हुए हैं, तो नया लेने के बजाय एक बार इसका इस्तेमाल कर सकते हैं. इसे टायर के अंदर डाल दिया जाता है. ऐसे में पंचर खुद से जाम हो जाता है.
पंचर वाली जगह पर लिक्विड कैसे डालें?
यदि आपकी बाइक के टायर में किसी जगह पंचर हो गया है तो सबसे पहले उसे रोकने के लिए एंटी लिक्विड को टायर में डालना जरूरी है. इसे कई प्रकार से टायर के अंदर डाला जा सकता है. अगर आपके पास नॉर्मल मोटरसाइकिल है तो दोनों टायरों में एक ही लिक्विड डालने से काम चल जाएगा. इसे बाइक के अलावा कार या स्कूटर के टायरों में भी डाला जा सकता है. ऐसा करने के लिए आपको इंजेक्शन की मदद लेनी पड़ेगी. लिक्विड डालने से पहले टायर की हवा पूरी तरह से निकालें. इसका इस्तेमाल सिर्फ ट्यूबलेस टायर्स में ही किया जा सकता है.
एंटी पंचर लिक्विड कैसे काम करता है?
जब ट्यूबलेस टायर में एंटी पंचर लिक्विड को इंसर्ट किया जाता है, तब वो अंदर जाते ही पूरे एरिया को कवर कर लेता है. ऐसे में जब टायर के किसी जगह पर पंचर हो जाता है, तब लिक्विड वहीं आकर सूख जाता है. उसके बाद पंचर वाली जगह से हवा बाहर नहीं निकलता है. आपके लिए इसे यूज करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसे बनाने वाली कंपनियां 10,000 किलोमीटर तक वर्क गारंटी देती हैं. यह वारंटी नए टायर पर मिलती है. हालांकि, एक समय के बाद अंदर में ही लिक्विड ड्राई हो जाता है, जिसके चलते वह जगह हार्ड हो जाती है.
एंटी पंचर लिक्विड की कीमत कितनी है?
देश के बाजारों में कई कंपनियों का एंटी पंचर लिक्विड उपलब्ध है, जिसे आप ऑनलाइन या ऑफलाइन खरीद सकते हैं. इसकी कीमत की शुरुआत 2 हजार रुपए से हो जाती है. फिर अलग-अलग कंपनियों के हिसाब से इसका दाम 1 हजार रुपए तक हो जाता है. यह सिर्फ टायरों को पंचर होने से ही नहीं बचाता, बल्कि उसे ठंडा भी रखता है. खासकर गर्मी में यह ज्यादा असरदार होता है.
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By Shivansh Shekhar
शॉर्ट बायो
शिवांश शेखर ऑटोमोबाइल और खेल स्पेशलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. ऑटो सेक्शन में कार/बाइक लॉन्च, फीचर्स, खासियत, टिप्स, कंपेरिजन और सपेक्स से संबंधित खबरें कवर करते हैं.
विस्तृत बायो
शिवांश शेखर ऑटोमोबाइल और खेल स्पेशलिस्ट पत्रकार हैं, जो पिछले 3 वर्षों से डिजिटल मीडिया में ऑटो और खेल जगत से जुड़ी खबरों के बारे में लगातार लिखते हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. ऑटो सेक्शन में उनकी रूचि कार/बाइक लॉन्च, फीचर्स, स्पेसिफिकेशन, टिप्स, ट्रिक्स और कंपेरिजन से जुड़े विषयों में है. इसके अलावा फ्लेक्स फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्रीज के बदलते ट्रेंड्स पर लगातार लिखते हैं.
उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को सिर्फ लॉन्च, कीमत और फीचर्स के बारे में ही न बताया जाए, बल्कि यह भी जानकारी दी जाए कि वह तकनीक आम लोगों के लिए कितने काम का है, उसे इस्तेमाल करने का अनुभव कैसा रहेगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.
पढ़ाई
बिहार राज्य के जहानाबाद जिले में जन्में शिवांश शेखर की शुरुआती शिक्षा (BSEB) से पूरी हुई. इसके बाद उन्होंने साल 2023 में चौधरी चरण सिंह यूनीवर्सिटी, मेरठ (CCSU) के अंतर्गत आने वाली इंसटीच्युट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, नोएडा (IMS) से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त की. पढ़ाई के दौरान ही शिवांश की रुचि खेल और ऑटो के विषयों पर लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने खेल और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया.
काम का सफर
पत्रकारिता का ककहरा सीखने के बाद शिवांश का सफर एपीएन न्यूज से शुरू हुआ था. उन्होंने पत्रकारिता का समूह जागरण न्यू मीडिया में बतौर सब एडिटर खेल और अन्य खबरों की तकनीकी समझ विकसित की. जेएनएम में करीब डेढ़ साल खेल और अन्य विषयों पर काम करने के बाद उन्होंने एसियानेट न्यूज की तरफ रुख अपनाया. वहां, करीब डेढ़ साल तक ऑटोमोबाइल और स्पोर्ट्स सेक्शन में काम किया और फिर प्रभात खबर का रुख किया, जहां ऑटो बीट पर काम कर रहे हैं. ट्रेंड्स को लगातार फॉलो करते हैं.
विजन
शिवांश का मानना है कि ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नई गाड़ियों के बारे में जानकारी नहीं देती, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारों के फैसलों और डिजिटल एक्सपिरियंस पर भी असर डालती हैं.
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