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भारत में फॉर्मूला वन रेस को सुब्रत रॉय ने दी थी नई ऊंचाई, फिर देखे कई चढ़ाव-उतार

Updated at : 15 Nov 2023 8:21 PM (IST)
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सहारा इंडिया परिवार ने साल 2011 में फोर्स इंडिया टीम में 100 मिलियन डॉलर के निवेश के साथ करीब 42.5 फीसदी हिस्सेदारी हासिल की. इससे पहले, इस टीम पर मालिकाना हक शराब कारोबारी और भारत के भगोड़ा घोषित उद्योगपति विजय माल्या के पास था.

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नई दिल्ली : सहारा ग्रुप के संस्थापक और प्रमुख का लंबी बीमारी के बाद मंगलवार को 75 साल की उम्र में निधन हो गया. भारत के रिटेल सेक्टर, रियल स्टेट और फाइनेंशियल सर्विसेज में विशाल कारोबारी साम्राज्य स्थापित करने वाले सुब्रत रॉय पोंजी योजनाओं की वजह से कानूनी चुनौतियों का सामना करते हुए विवादों में फंस गए थे. सुब्रत रॉय को सहारा प्रमुख के नाम से भी जाने जाते थे. सहारा इंडिया परिवार न केवल भारतीय क्रिकेट टीम की टी-शर्ट का स्पॉन्सर के तौर पर जुड़ा था, बल्कि मोटरस्पोर्ट के शौकीनों के लिए भारत में फॉर्मूला-1 रेस को लाने में सुब्रतो रॉय की भूमिका अहम रही है.

2011 में विजय माल्या से छीनी फोर्स इंडिया टीम

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, सहारा इंडिया परिवार ने साल 2011 में फोर्स इंडिया टीम में 100 मिलियन डॉलर के निवेश के साथ करीब 42.5 फीसदी हिस्सेदारी हासिल की. इससे पहले, इस टीम पर मालिकाना हक शराब कारोबारी और भारत के भगोड़ा घोषित उद्योगपति विजय माल्या के पास था. इसके बाद टीम का नाम बदलकर सहारा फोर्स इंडिया कर दिया गया. रिपोर्ट में कहा गया है कि इन वर्षों में, सर्जियो पेरेज, निको हुलकेनबर्ग और एस्टेबन ओकन जैसे लोकप्रिय ड्राइवरों ने सहारा फोर्स इंडिया F1 टीम के लिए गाड़ी चलाई.

2018 से फोर्स इंडिया का उतार शुरू

हालांकि, कानूनी चुनौतियों की वजह से सुब्रत रॉय को जेल भेज दिया गया. इसके बाद विजय माल्या से जुड़ी वित्तीय समस्याओं के कारण सहारा फोर्स इंडिया 2018 फॉर्मूला वन सीजन के बीच में प्रशासन में चली गई. अगस्त 2018 में टीम की संपत्ति कनाडाई अरबपति और निवेशक लॉरेंस स्ट्रोक के स्वामित्व वाली रेसिंग प्वाइंट एफ 1 टीम द्वारा खरीदी गई थी और 2018 सीजन के शेष के लिए फोर्स इंडिया नाम के तहत रेस जारी रखी गई.

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2019 में बदल गया टीम का नाम

रिपोर्ट के अनुसार, कानूनी अड़चनों में फंसने के बाद सुब्रत रॉय वाली फोर्स इंडिया फरवरी 2019 में ब्रिटिश लाइसेंस के तहत प्रतिस्पर्धा करते हुए टीम का नाम बदलकर रेसिंग प्वाइंट एफ1 टीम कर दिया गया. इसके करीब एक साल साल बाद घोषणा की गई कि लॉरेंस स्ट्रोक एक कंसोर्टियम यू ट्री ओवरसीज लिमिटेड का नेतृत्व कर रहा है, जिसने ब्रिटिश लक्जरी स्पोर्ट्स कार निर्माता एस्टन मार्टिन में 16.7 फीसदी हिस्सेदारी हासिल की. इसका नतीजा यह निकला कि वर्ष 2021 के सीजन के लिए रेसिंग पॉइंट एफ1 टीम की एस्टन मार्टिन एफ1 टीम में कारोबारी रीब्रांडिंग की गई. रीब्रांड के हिस्से के रूप में टीम ने अपने रेसिंग कलर बीडब्ल्यूटी गुलाबी को एस्टन मार्टिन के ब्रिटिश रेसिंग ग्रीन कलर के आधुनिक एडिशन में बदल दिया.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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