Flood में इलेक्ट्रिक कार, बाइक या स्कूटर चलानी चाहिए या नहीं? जानें सच्चाई

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Monsoon EV Guide (Image Credit: ChatGPT)

Monsoon EV Guide (Image Credit: ChatGPT)

क्या इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) बाढ़ के पानी में सुरक्षित हैं? पेट्रोल-डीजल गाड़ियों से तुलना और ईवी के डिजाइन से जुड़े सुरक्षा मानकों की पूरी जानकारी पाएं.

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अगर आपके पास भी इलेक्ट्रिक कार, बाइक या स्कूटर है, तो दिमाग यह सवाल जरूर उठता होगा कि क्या फ्लड वाली सड़कों पर गाड़ी लेकर जाएं या नहीं? यह सवाल बहुत आम है, लेकिन इसपर सीधा जवाब नहीं दिया जा सकता है कि ऐसा करना ठीक होगा या नहीं. इसके लिए माइंड में यह बात समझने की जरूरत होती है कि आपकी ईवी का डिजाइन कंपनी ने कैसे किया है. क्या गाड़ी पानी से भरी सड़कों पर चलने के लिए पूरी तरह से तैयार है. 

एलेक्ट्रिक गाड़ी और पानी के बीच कनेक्शन 

कई लोगों के अंदर इलेक्ट्रिक गाड़ियों को लेकर यह गलतफहमी होती है कि पेट्रोल और डीजल इंजन वाली वाहनों की तुलना में इनमें पानी से डैमेज होने का डर अधिक रहता है, लेकिन इसमें कोई सच्चाई नहीं है. रियलिटी में ईवी को हेवी रेन और फ्लड जैसी अलग-अलग पर्यावरणीय हालातों में सेफ्टी मानकों को कंप्लीट करने के लिए कड़ी टेस्टिंग के दौर से गुजरना पड़ता है. इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी में आमतौर पर बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) फिट किया जाता है, जो नमी के संपर्क में आने पर शॉर्ट सर्किट को रोकने के लिए डिजाइन किया गया है. 

इलेक्ट्रिक गाड़ियों का डिजाइन और सेफ्टी 

कंपनियां अपनी इलेक्ट्रिक गाड़ियों को पानी से सेफ रखने के लिए उसमें कई सुरक्षा मानकों का इस्तेमाल करती हैं. अधिकांश ईवी में बैटरी और इलेक्ट्रिकल सिस्टम पूरी तरह से सीलबंद होते हैं, जिसके पास बरसात में गीली सड़कों पर आसानी से झेलने की क्षमता रखते हैं. हालांकि, फ्लड वाली जगहों पर गाड़ी को खड़ा करके रखना आपके लिए परेशानी का कारण बन सकता है. यदि पानी का लेवल आपकी ईवी के ग्राउंड क्लियरेंस से ऊपर है, तो यह उसके अंदर लगे कंपोनेंटस को डैमेज कर सकता है या फिर इलेक्ट्रिकल खराबी का कारण बन सकता है. 

फ्लड वाली सड़कों से पार होने पर क्या करें?

यदि आपको अपनी ईवी के साथ मजबूरन किसी फ्लड वाली सड़कों से पार होना पड़ रहा है, तो वहां से निकलने के बाद कहीं ड्राई स्थान पर गाड़ी रोकें और उसकी सावधानीपूर्वक जांच करें. उसमें ध्यान से देखें कि कहीं केबिन के अंदर, बैटरी के पास या इलेक्ट्रिक मोटरों के आसपास पानी तो नहीं जम गया है. अच्छे से यह देखें कि बैटरी और इलेक्ट्रिकल कनेक्शन पूरी तरह से ड्राई हो. रीजेनरेटटिव ब्रेकिंग जैसे फीचर्स का इस्तेमाल करें, क्योंकि इससे अचानक ब्रेक लगाने से बचा जा सकता है और पानी के छींटें नहीं उड़ेंगे. 

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Shivansh Shekhar

लेखक के बारे में

By Shivansh Shekhar

शॉर्ट बायो 

शिवांश शेखर ऑटोमोबाइल और खेल स्पेशलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. ऑटो सेक्शन में कार/बाइक लॉन्च, फीचर्स, खासियत, टिप्स, कंपेरिजन और सपेक्स से संबंधित खबरें कवर करते हैं.

विस्तृत बायो 

शिवांश शेखर ऑटोमोबाइल और खेल स्पेशलिस्ट पत्रकार हैं, जो पिछले 3 वर्षों से डिजिटल मीडिया में ऑटो और खेल जगत से जुड़ी खबरों के बारे में लगातार लिखते हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. ऑटो सेक्शन में उनकी रूचि कार/बाइक लॉन्च, फीचर्स, स्पेसिफिकेशन, टिप्स, ट्रिक्स और कंपेरिजन से जुड़े विषयों में है. इसके अलावा फ्लेक्स फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्रीज के बदलते ट्रेंड्स पर लगातार लिखते हैं. 

उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को सिर्फ लॉन्च, कीमत और फीचर्स के बारे में ही न बताया जाए, बल्कि यह भी जानकारी दी जाए कि वह तकनीक आम लोगों के लिए कितने काम का है, उसे इस्तेमाल करने का अनुभव कैसा रहेगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई  

बिहार राज्य के जहानाबाद जिले में जन्में शिवांश शेखर की शुरुआती शिक्षा (BSEB) से पूरी हुई. इसके बाद उन्होंने साल 2023 में चौधरी चरण सिंह यूनीवर्सिटी, मेरठ (CCSU) के अंतर्गत आने वाली इंसटीच्युट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, नोएडा (IMS) से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त की. पढ़ाई के दौरान ही शिवांश की रुचि खेल और ऑटो के विषयों पर लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने खेल और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया. 

काम का सफर 

पत्रकारिता का ककहरा सीखने के बाद शिवांश का सफर एपीएन न्यूज से शुरू हुआ था. उन्होंने पत्रकारिता का समूह जागरण न्यू मीडिया में बतौर सब एडिटर खेल और अन्य खबरों की तकनीकी समझ विकसित की. जेएनएम में करीब डेढ़ साल खेल और अन्य विषयों पर काम करने के बाद उन्होंने एसियानेट न्यूज की तरफ रुख अपनाया. वहां, करीब डेढ़ साल तक ऑटोमोबाइल और स्पोर्ट्स सेक्शन में काम किया और फिर प्रभात खबर का रुख किया, जहां ऑटो बीट पर काम कर रहे हैं. ट्रेंड्स को लगातार फॉलो करते हैं.

विजन 

शिवांश का मानना है कि ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नई गाड़ियों के बारे में जानकारी नहीं देती, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारों के फैसलों और डिजिटल एक्सपिरियंस पर भी असर डालती हैं.

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