रॉयल एनफील्ड होगी भारत में और मजबूत, प्रोडक्शन बढ़ाने की तैयारी

तमिलनाडु के बाहर पहली बड़ी फैक्ट्री लगाएगी रॉयल एनफील्ड / सिम्बॉलिक पिक एक्स से
रॉयल एनफील्ड आंध्र प्रदेश में नया मैन्युफैक्चरिंग प्लांट और वेंडर पार्क बनाने जा रही है. यह रॉयल एनफील्ड का तमिलनाडु के बाहर पहला बड़ा मैन्युफैक्चरिंग विस्तार है.
प्रीमियम मोटरसाइकिल सेगमेंट में मजबूत पकड़ रखने वाली रॉयल एनफील्ड अब दक्षिण भारत में अपने विस्तार को नई रफ्तार देने जा रही है. कंपनी ने आंध्र प्रदेश में 2,200 करोड़ रुपये का बड़ा निवेश करने का फैसला लिया है, जिसके तहत तिरुपति जिले के सत्यवेदु इलाके में नया विनिर्माण संयंत्र और वेंडर पार्क तैयार किया जाएगा. यह रॉयल एनफील्ड का तमिलनाडु के बाहर पहला बड़ा मैन्युफैक्चरिंग विस्तार माना जा रहा है. इस प्रोजेक्ट से न सिर्फ उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, बल्कि हजारों रोजगार भी पैदा होने की उम्मीद है.
सत्यवेदु में बनेगा नया मैन्युफैक्चरिंग हब
आंध्र प्रदेश सरकार ने कंपनी को तमिलनाडु सीमा के पास स्थित वनल्लुरु और रल्लाकुप्पम गांवों में जमीन आवंटित की है. यहां अत्याधुनिक मोटरसाइकिल निर्माण यूनिट तैयार की जाएगी. राज्य निवेश संवर्द्धन बोर्ड ने इस परियोजना को मंजूरी दे दी है, जिसे मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू की अध्यक्षता में स्वीकृति मिली.
सरकार का मानना है कि यह निवेश आंध्र प्रदेश को ऑटोमोबाइल और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में मजबूत पहचान दिलाने में मदद करेगा.
उत्पादन क्षमता में होगा बड़ा इजाफा
नई यूनिट शुरू होने के बाद रॉयल एनफील्ड की कुल उत्पादन क्षमता में करीब 9 लाख यूनिट सालाना की बढ़ोतरी हो सकती है. कंपनी लगातार घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी मांग बढ़ते देख रही है, ऐसे में यह प्लांट उसकी सप्लाई क्षमता को मजबूत करेगा.
विशेषज्ञों के मुताबिक भारत पहले ही प्रीमियम मोटरसाइकिल निर्माण का बड़ा केंद्र बन चुका है और यह निवेश देश की वैश्विक स्थिति को और मजबूत कर सकता है.
वेंडर पार्क से बदलेगा पूरा ऑटो इकोसिस्टम
इस परियोजना की खास बात सिर्फ फैक्ट्री नहीं, बल्कि उसके साथ तैयार होने वाला समर्पित वेंडर पार्क भी है. कंपनी अपने सप्लायर नेटवर्क को भी आंध्र प्रदेश में शिफ्ट करने की तैयारी कर रही है. इससे लोकल ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री को बड़ा फायदा मिल सकता है.
ऑटोमोबाइल सेक्टर में वेंडर पार्क को बेहद अहम माना जाता है क्योंकि इससे उत्पादन लागत कम होती है और सप्लाई चेन तेज बनती है.
हजारों लोगों को मिलेगा रोजगार
रिपोर्ट्स के अनुसार इस प्रोजेक्ट से लगभग 5,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे. इससे तिरुपति और आसपास के इलाकों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं. स्थानीय युवाओं को मैन्युफैक्चरिंग, सप्लाई चेन और तकनीकी क्षेत्रों में नौकरी के नए अवसर मिलने की उम्मीद है.
2032 तक पूरा होगा प्रोजेक्ट
कंपनी इस परियोजना को दो चरणों में पूरा करेगी. पहला चरण 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि दूसरा चरण 2032 तक खत्म होने की संभावना है. आंध्र प्रदेश सरकार का कहना है कि वह इलेक्ट्रॉनिक्स, ईवी, रिन्यूएबल एनर्जी और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में बड़े निवेश आकर्षित करने पर फोकस कर रही है.
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By Rajeev Kumar
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