रतन टाटा को टाटा नैनो बनाने का आइडिया कैसे आया? मुंबई की बारिश ने बदल दी सोच

Published by : Rajeev Kumar Updated At : 09 Oct 2025 7:00 PM

विज्ञापन

रतन टाटा को एक लाख की कार टाटा नैनो बनाने की प्रेरणा कहां से मिली? फोटो सोशल मीडिया से साभार

मुंबई की बारिश में एक परिवार को स्कूटर पर संघर्ष करते देख रतन टाटा को टाटा नैनो बनाने का विचार आया. जानिए कैसे एक दृश्य ने बदल दी भारतीय ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री

विज्ञापन

रतन टाटा अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके विचार और कार्य आज भी जीवित हैं. टाटा नैनो का निर्माण उनके उसी दूरदर्शी सोच का प्रतीक है, जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया कि कैसे एक भारतीय उद्योगपति ने आम आदमी के लिए एक लाख रुपये में कार देने का सपना देखा और उसे साकार भी किया. एक लाख की कार का सपना – टाटा नैनो की प्रेरणा : मुंबई की तेज बारिश में एक परिवार को स्कूटर पर संघर्ष करते देख रतन टाटा के मन में एक विचार ने जन्म लिया- क्या हर भारतीय को एक सुरक्षित और सस्ती कार नहीं मिलनी चाहिए? इसी सोच से शुरू हुआ टाटा नैनो का सफर. मात्र ₹1 लाख की कीमत में एक चार पहिया वाहन देना एक क्रांतिकारी कदम था, जिसने ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को हिला कर रख दिया.

बारिश में भीगता परिवार बना प्रेरणा

रतन टाटा ने एक दिन मुंबई की मूसलधार बारिश में एक परिवार को स्कूटर पर जाते देखा. बच्चों को बीच में बैठाकर, माता-पिता बारिश से जूझते हुए सफर कर रहे थे. यह दृश्य उनके दिल को छू गया और उन्होंने ठान लिया कि एक ऐसी कार बनाई जाए जो आम आदमी की पहुंच में हो.

टाटा नैनो: आम आदमी की कार

टाटा नैनो को 2008 में लॉन्च किया गया था और इसे दुनिया की सबसे सस्ती कार के रूप में पेश किया गया. इसकी शुरुआती कीमत मात्र ₹1 लाख रखी गई थी. इसका उद्देश्य था उन परिवारों को चार पहियों की सुरक्षा देना जो दोपहिया वाहनों पर सफर करते थे.

डिजाइन और फीचर्स

  • इंजन: 624cc, 2-सिलेंडर पेट्रोल इंजन
  • गियरबॉक्स: 4-स्पीड मैनुअल ट्रांसमिशन
  • फ्यूल टैंक: बिना कैप के डिजाइन
  • बेसिक सुविधाएं: एक वाइपर, एक साइड मिरर, तीन लुग नट्स प्रति व्हील
  • वेरिएंट्स: Nano Standard, Nano CX, Nano LX (जिसमें एयर कंडीशनिंग और बेहतर इंटीरियर था).

क्या हुआ बाद में?

हालांकि शुरुआत में इसे “People’s Car” कहा गया और काफी प्रचार हुआ, लेकिन बिक्री उम्मीद से कम रही. उत्पादन में देरी, गुणवत्ता को लेकर संदेह और सुरक्षा चिंताओं ने इसकी लोकप्रियता को प्रभावित किया. 2018 में इसका उत्पादन बंद कर दिया गया.

टाटा की विरासत

टाटा नैनो ने दुनिया को दिखाया कि कैसे इनोवेशन और सामाजिक सोच मिलकर एक क्रांतिकारी उत्पाद बना सकते हैं. आज भी इसे एक साहसिक प्रयोग और भारत के ऑटोमोबाइल इतिहास में मील का पत्थर माना जाता है.

टाटा समूह में रतन टाटा का उदय

1981 में जेआरडी टाटा ने रतन टाटा को अपना उत्तराधिकारी चुना. शुरुआत में लोगों को उनके नेतृत्व पर संदेह था, लेकिन उन्होंने नेल्को और कपड़ा उद्योग जैसे संघर्षरत क्षेत्रों को पुनर्जीवित कर अपनी क्षमता साबित की.

वैश्विक ब्रांडों का अधिग्रहण और सामाजिक दृष्टिकोण

टेटली, कोरस और जगुआर लैंड रोवर जैसे ब्रांडों का अधिग्रहण रतन टाटा की दूरदर्शिता का प्रमाण है. उन्होंने टाटा समूह को वैश्विक स्तर पर स्थापित किया और साथ ही शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा जैसे सामाजिक क्षेत्रों में भी योगदान दिया.

EV क्रांति की जान ‘रेयर अर्थ एलिमेंट्स’ क्या चीज हैं, जिसके लिए चीन के पीछे पड़े भारत, अमेरिका और पाकिस्तान?

विज्ञापन
Rajeev Kumar

लेखक के बारे में

By Rajeev Kumar

राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola