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हीरो की लेक्ट्रो साइकिल : यूथ की क्यों बनी च्वाइस? पढ़िए फनी टाइप स्टोरी

Updated at : 09 Sep 2023 5:12 PM (IST)
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हीरो की लेक्ट्रो साइकिल : यूथ की क्यों बनी च्वाइस? पढ़िए फनी टाइप स्टोरी

आज जब कोरोना का दुनिया में नाम तो है, पर खुदा न करे कि फिर उसका निशान देखने को मिले, क्योंकि हमारा आदित्य एल-1 असली कोरोना का टेस्ट करने के लिए लैंग्रेज प्वाइंट पर स्थापित होने जा रहा है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो ने सूर्य की सीमाओं का अध्ययन करने के लिए अग्नेयास्त्र छोड़ दिया है.

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नई दिल्ली : भारत में दोपहिया वाहन बनाने के मामले में हीरो मोटोकॉर्प का कोई मुकाबला नहीं है. जैसे टाटा बड़े वाहनों के मामले में खांटी, वैसे हीरो तो खैर हीरो ही है. हम सब बचपन से ही हरक्यूलस और हीरो की साइकिल चलाते आए हैं. और, हरक्यूलस के बाद तो भारत के साइकिल बाजार में हीरो ही हीरो हो गई. उसके बाद वह साइकिल के साथे-साथे जापानी कंपनी होंडा से हाथ मिलाके मोटरसाइकिल भी बनाने लगी. तब हीरो-होंडा की मोटरसाइकिल आने लगी. लेकिन, बाद में इन दुनों कंपनियों में खटपट हो गई, तो हीरो अलग हो गई और होंडा भी. अब जो हीरो साइकिल बनाती थी, 2020 में जब सारे संसार में कोरोना फैला, तो उसी घड़ी में एक नई साइकिल लाई. उसका नाम धर दी लेक्ट्रो बाइक. अब उस घड़ी में तो किसी को ये समझ में ही नहीं आया कि ये लेक्ट्रो बाइक कौन सी साइकिल है? लेकिन, सही मायने में वो बैटरी से चलने वाली बाइक थी. तब उसका दाम 20 हजार रुपया था.

आज जब कोरोना का दुनिया में नाम तो है, पर खुदा न करे कि फिर उसका निशान देखने को मिले, क्योंकि हमारा आदित्य एल-1 असली कोरोना का टेस्ट करने के लिए लैंग्रेज प्वाइंट पर स्थापित होने जा रहा है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो ने सूर्य की सीमाओं का अध्ययन करने के लिए अग्नेयास्त्र छोड़ दिया है. तो महामारी वाले कोरोना टाइम में ही भारत की देसी और खांटी कंपनी हीरो इलेक्ट्रिक साइकिल लेक्ट्रो बाइक 14 सितंबर 2020 को लॉन्च की थी.

अरे बाप रे! आज के नौजवान इस इलेक्ट्रिक बाइसाइकिल के लुटेरा बन गया है. लुटेरा इन द सेंस कि चोरी-डकैती और लूट करने वाला लुटेरा नहीं. लुटेरा का अर्थ यह कि अगर कोई चीज पसंद आ जाए, तो दोनों हाथ से हंसोत लो. उसको लुटेरा कहते हैं. मने जिस साइकिल की दुकान में नजर आ जाए, तो घर में माय-बाप से लड़-झगड़ के खरीदवा ही लेता है. तो कहने का मतबल ये है कि जिस बाइसाइकिल के बारे में एतना कुछ भूमिका बांध ही दी गई है, तो फिर उसके बारे में अगर हम आपको कुछ-कुछ होता टाइप बता ही दें, तो इसमें न हमारा कुछ बिगड़ेगा और न आपका. खरीदना, न खरीदना.. आप पर निर्भर करता है. तो फिर आइए, लटपटाते हुए लहरिया कट मारके जानते हैं…

क्या है ई-साइकिल

लइकन-बच्चन, आपको बताते चलें कि भारत में साइकिल बनावे वाली कंपनी हीरो साइकिल्स की इलेक्ट्रिक साइकिल ब्रांड का नाम हीरो लेक्ट्रो है. जैसा कि हम आपको पहले ही बता दिए थे कि हीरो साइकिल्स ने कोरोना महामारी के बाद आदमी सब के खान-पान, बात-विचार और व्यवहार में कमजोरी को भांप लिया था. काहे कि महामारी के डर से हदस के जितने लोगों की मौत हो गई, उससे कहीं अधिक जिंदा रहने वाले लोग हदसे रहे. उनके लिए एक डेग चलना भी मानों सौ डेगों के बराबर था. ऐसे में हीरो साइकिल्स ने बाजार में सस्ती इलेक्ट्रिक साइकिल को लॉन्च किया, ताकि आदमी बिना पैडल मारे ही साइकिल पर बैठ के दो-चार किलोमीटर का सफर तय कर ले. इसमें खास बात ई रही कि जो बच्चा सब स्कूटर और मोटरसाइकिल चलाने के लिए नहीं जानता था, वो लइकवनों इस इलेक्ट्रिक सइकिलवा को चलना सीख गया. काहे कि इसमें न गियर बदलना है और न पैडल पर जोर लगाना. जहां हैंडल है, वहां एक्सीलेटर है, उसके घुमाओ और टम्पू-तैम्पू से पहले घर पहुंच जाओ.

मैनचेस्टर में तैयार किया गया था डिजाइन

बता दें कि इस इलेक्ट्रिक साइकिल के लॉन्चिंग के समय हीरो साइकिल कोरोना महामारी के बाद की स्थिति में होने वाले बदलाव के बाद ई-बाइक क्रांति का लाभ उठाने और इस सेगमेंट को बढ़ावा देने की उम्मीद कर रही थी. इसीलिए मैनचेस्टर में कंपनी के ग्लोबल डिजाइन सेंटर में हीरो लेक्ट्रो को डिजाइन किया गया था. यह ई-साइकिल की नयी रेंज तीन श्रेणियों- कम्यूटर , फिटनेस और लीजर में आती है. इस साइकिल में ब्लूटूथ के माध्यम से स्मार्टफोन कनेक्टिविटी की सुविधा भी दी गई है.

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हीरो इलेक्ट्रो के खास फीचर्स

  • छोटी और मध्यम दूरी की यात्राओं के लिए इस बाइक की कम्यूटर रेंज अच्छी है.

  • यह एक फिटनेस साइकिल है, जिसे फिटनेस उत्साही लोगों को ध्यान में रखकर बनाया गया है.

  • आई स्मार्ट फीचर्स और ब्लूटूथ के माध्यम से स्मार्टफोन कनेक्टिविटी के अलावा मैप, बैटरी, राइडिंग मोड के बारे में रियलटाइम की जानकारी प्रदान की जाती है.

  • यह ई-साइकिल लिथियम आयन बैटरी और स्मार्ट ईडीयू का उपयोग करता है, जो राइडर को चार अलग-अलग तरीकों से चलाने के लिए उपयोगी है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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