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EV vs ICE: लग्जरी कार बाजार में ईवी की पकड़ ढीली, जीएसटी ने बदला खेल

Updated at : 04 Jan 2026 1:33 PM (IST)
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ev vs ice car cost of ownership

लग्जरी ईवी पर जीएसटी का झटका, आईसीई मॉडल बने आकर्षक / / सांकेतिक तस्वीर

EV vs ICE: जीएसटी 2.0 सुधारों के बाद लग्जरी कार सेगमेंट में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी तीन प्रतिशत घटी. आईसीई गाड़ियां अब कुल स्वामित्व लागत में बेहतर विकल्प साबित हो रही हैं.

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EV vs ICE Cost of Ownership: भारत के लग्जरी कार बाजार में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की पकड़ कमजोर पड़ती दिख रही है. जीएसटी 2.0 सुधारों के बाद ईवी और इंटरनल कंबशन इंजन (आईसीई) गाड़ियों के बीच कीमत का अंतर बढ़ गया है. नतीजतन, शुरुआती लग्जरी सेगमेंट में ईवी की पैठ लगभग तीन प्रतिशत घट गई है. उद्योग जगत का मानना है कि फिलहाल आईसीई गाड़ियां स्वामित्व की कुल लागत (TCO) के लिहाज से ग्राहकों को ज्यादा आकर्षक विकल्प दे रही हैं.

लग्जरी ईवी सेगमेंट पर सीधा असर

नई जीएसटी दरों ने लग्जरी ईवी की मांग को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है. मर्सिडीज-बेंज इंडिया के सीईओ संतोष अय्यर ने बताया कि अक्टूबर-नवंबर 2025 में ईवी की हिस्सेदारी 2-3 प्रतिशत घटी है. कंपनी की कुल बिक्री में ईवी की हिस्सेदारी आठ प्रतिशत है, लेकिन 1.5 करोड़ रुपये से ऊपर की गाड़ियों में यह 20 प्रतिशत तक पहुंची हुई है.

आईसीई गाड़ियों का TCO हुआ मजबूत

जीएसटी सुधारों के बाद आईसीई गाड़ियों का कुल स्वामित्व खर्च ईवी की तुलना में बेहतर साबित हो रहा है. यही वजह है कि ग्राहक फिलहाल ईवी से ज्यादा आईसीई मॉडल को प्राथमिकता दे रहे हैं. उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि जब टैक्स स्ट्रक्चर फिर से संतुलित होगा, तब ईवी की पैठ में सुधार देखने को मिलेगा.

बीएमडब्ल्यू का अलग नजरिया

बीएमडब्ल्यू ग्रुप इंडिया के सीईओ हरदीप सिंह बरार का कहना है कि जीएसटी कटौती ने आईसीई पोर्टफोलियो को और आकर्षक बना दिया है. कंपनी ने टैक्स लाभ सीधे ग्राहकों तक पहुंचाया है, जिससे कीमतों में औसतन 6.7 प्रतिशत की कमी आई है. हालांकि, बरार का मानना है कि ईवी की मांग अभी भी स्थिर और मजबूत बनी हुई है क्योंकि ग्राहक केवल कीमत नहीं, बल्कि स्थिरता और भविष्य की तकनीक को भी महत्व देते हैं.

ग्राहक सोच में बदलाव

लग्जरी कार खरीदार अब केवल कीमत पर ध्यान नहीं दे रहे. वे गाड़ी चलाने की कम लागत, पर्यावरणीय स्थिरता और भविष्य के लिए तैयार तकनीक को भी अहम मान रहे हैं. यही वजह है कि ईवी की मांग पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है, बल्कि यह एक संतुलन की स्थिति में है.

आगे का रास्ता क्या होगा?

विशेषज्ञों का मानना है कि ईवी की पैठ फिलहाल दबाव में है, लेकिन लंबे समय में यह फिर से बढ़ सकती है. टैक्स स्ट्रक्चर और सरकारी नीतियां जैसे ही ईवी के पक्ष में होंगी, लग्जरी सेगमेंट में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की हिस्सेदारी फिर से ऊपर जा सकती है.

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Rajeev Kumar

लेखक के बारे में

By Rajeev Kumar

राजीव, 14 वर्षों से मल्टीमीडिया जर्नलिज्म में एक्टिव हैं. टेक्नोलॉजी में खास इंटरेस्ट है. इन्होंने एआई, एमएल, आईओटी, टेलीकॉम, गैजेट्स, सहित तकनीक की बदलती दुनिया को नजदीक से देखा, समझा और यूजर्स के लिए उसे आसान भाषा में पेश किया है. वर्तमान में ये टेक-मैटर्स पर रिपोर्ट, रिव्यू, एनालिसिस और एक्सप्लेनर लिखते हैं. ये किसी भी विषय की गहराई में जाकर उसकी परतें उधेड़ने का हुनर रखते हैं. इनकी कलम का संतुलन, कंटेंट को एसईओ फ्रेंडली बनाता और पाठकों के दिलों में उतारता है. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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