गाड़ी की डिक्की में ये 5 चीजें नहीं हैं? तो हाईवे पर निकलना है 'सुसाइड मिशन'!
Published by : Rajeev Kumar Updated At : 26 Jan 2026 1:59 AM
गाड़ी की डिक्की में ये चीजें हों तो सफर रहेगा सुरक्षित / सांकेतिक तस्वीर चैटजीपीटी एआई से
कार की डिक्की में ये जरूरी सामान (Essential Items) रखकर आप न सिर्फ भारी चालान से बच सकते हैं, बल्कि इमरजेंसी में अपनी जान भी बचा सकते हैं. पूरी लिस्ट यहां देखें
मैं पिछले 18 सालों से गाड़ियां चला रहा हूं, लेकिन पिछले महीने की उस काली रात ने मेरी सोच बदल दी. हाईवे के बीचों-बीच टायर फटा, मोबाइल की बैटरी डेड थी और डिक्की में ‘जैक’ तो था पर उसे चलाने वाला पाना (Spanner) गायब! उस 3 घंटे के खौफनाक इंतजार ने मुझे सिखाया कि आपकी डिक्की सिर्फ सामान रखने का डिब्बा नहीं, बल्कि आपकी ‘लाइफलाइन’ है.
ज्यादातर भारतीय ड्राइवर डिक्की को कबाड़खाना समझते हैं, लेकिन सच तो यह है कि सड़क पर आपकी जान और आपका पैसा, दोनों इस बात पर निर्भर करते हैं कि आपकी कार के पीछे वाले हिस्से में क्या रखा है.
1. कागजों का मायाजाल: डिजिटल के भरोसे न रहें
आजकल जमाना mParivahan का है, मैं मानता हूं. लेकिन सोचिए, अगर आप किसी ऐसे इलाके में हैं जहां नेटवर्क ‘जीरो’ है और पुलिस ने रोक लिया?
- RC और इंश्योरेंस: इनकी एक-एक फिजिकल कॉपी डिक्की के एक वाटरप्रूफ फोल्डर में जरूर रखें.
- PUC सर्टिफिकेट: सबसे ज्यादा चालान इसी छोटे से कागज की वजह से कटते हैं.
प्रो टिप: अपने इंश्योरेंस की कॉपी के पीछे ‘रोड साइड असिस्टेंस'(RSA) का नंबर बड़े अक्षरों में लिख लें.
2. ‘मैकेनिकल वाॅरियर्स’: जो मैकेनिक की कमी पूरी करेंगे
रास्ते में गाड़ी खराब होना तनावपूर्ण है, लेकिन अगर आपके पास सही औजार हैं, तो आप खुद ‘सुपरहीरो’ बन सकते हैं.
| जरूरी सामान | क्यों है जरूरी? |
| स्टेपनी (Spare Tire) | हवा चेक की हुई होनी चाहिए, वरना बेकार है |
| जैक और व्हील स्पैनर | टायर बदलने के प्राथमिक हथियार |
| Warning Triangle | रात में पीछे से आने वाली गाड़ियों को आपकी लोकेशन बताने के लिए |
| पोर्टेबल एयर पंप | आजकल ₹1500 में मिल जाता है, जो आपको पंचर की दुकान तक पहुचा देगा. |
3. फर्स्ट एड किट: सिर्फ दिखावा नहीं, जरूरत है
ज्यादातर लोग कार के साथ मिली मेडिकल किट को कभी खोलते भी नहीं. याद रखिए, एक्सीडेंट के पहले 10 मिनट ‘गोल्डन ऑवर’ होते हैं.
चेतावनी: अपनी किट चेक करें! अगर उसमें रखी दवाइयां या ऑइंटमेंट एक्सपायर हो चुके हैं, तो वे मदद के बजाय नुकसान करेंगे. इसमें कुछ पेनकिलर्स, ओआरएस (ORS) के पैकेट और बैंड-एड जरूर बढ़ा लें.
4. सर्वाइवल गियर: छोटी चीजें, बड़ा प्रभाव
अक्सर हम बड़ी चीजों के चक्कर में बेसिक चीजें भूल जाते हैं. मैं अपनी डिक्की में ये तीन चीजें हमेशा रखता हूं:
- एक मजबूत टॉर्च: फोन की फ्लैशलाइट टायर बदलते समय काम नहीं आती
- माइक्रोफाइबर कपड़ा और पानी: अचानक वाइपर खराब हो जाए या कांच गंदा हो, तो यह ‘लाइफ सेवर’ है.
- छाता: यकीन मानिए, भारी बारिश में टायर बदलना बिना छाते के नामुमकिन है.
5. डिक्की को ‘बम’ न बनाएं: ये गलतियां भारी पड़ेंगी
जितना जरूरी यह जानना है कि क्या रखें, उससे कहीं ज्यादा जरूरी है यह जानना कि क्या न रखें:
- पेट्रोल/डीजल की बोतल: गर्मी में यह आग का गोला बन सकती है
- अत्यधिक वजन: डिक्की को ठूंस-ठूंस कर भरने से आपकी गाड़ी का माइलेज और बैलेंस दोनों बिगड़ जाते हैं.
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By Rajeev Kumar
राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर
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