बंद होगी आशीर्वाद योजना, किसानों का कर्ज होगा माफ
Updated at : 07 Feb 2020 7:01 AM (IST)
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मनोज सिंह रांची : वित्तीय वर्ष (2020-21) के कृषि विभाग के बजट में बदलाव का प्रस्ताव तैयार किया गया है. इसके अनुसार रघुवर सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री आशीर्वाद योजना बंद होगी. इस योजना मद में खर्च होनेवाली राशि का उपयोग अब किसानों का कर्ज माफ करने में किया जायेगा. मुख्यमंत्री आशीर्वाद योजना के तहत सरकार […]
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मनोज सिंह
रांची : वित्तीय वर्ष (2020-21) के कृषि विभाग के बजट में बदलाव का प्रस्ताव तैयार किया गया है. इसके अनुसार रघुवर सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री आशीर्वाद योजना बंद होगी. इस योजना मद में खर्च होनेवाली राशि का उपयोग अब किसानों का कर्ज माफ करने में किया जायेगा.
मुख्यमंत्री आशीर्वाद योजना के तहत सरकार किसानों को प्रति एकड़ पांच हजार रुपये दे रही थी. अधिकतम पांच एकड़ तक खेती करनेवाले किसानों को इसका लाभ मिलता है. इसमें किसानों को दो-दो किस्त में राशि दी गयी है. अंतिम किस्त के भुगतान की सूची तैयार है. इस पर सरकार को करीब 1000 करोड़ रुपये खर्च करने थे. इधर बजट के लिए हेमंत की सरकार ने जो प्रस्ताव तैयार किया है, उसके अनुसार इस योजना को बंद किया जायेगा. इसके स्थान पर किसानों का कर्ज माफ किया जायेगा.
कृषि विभाग ने बजट के लिए तैयार किया प्रस्ताव. कर्ज माफी के लिए 2000 करोड़ रुपये का प्रावधान
यूपीए महागठबंधन के चुनावी घोषणा पत्र में शामिल था किसानों के कर्ज माफी की बात
यूपीए से जुड़े दलों ने चुनाव के दौरान अपने घोषणा पत्र में किसानों के कर्ज माफी की बात शामिल की थी. इस पर आनेवाले वित्तीय वर्ष में करीब 2000 करोड़ रुपये का प्रावधान होगा. वर्तमान सरकार ने किसानों को ऋण माफी के लिए प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया है. इस फॉरमूले पर विचार किया जा रहा है. कांग्रेस नेतृत्ववाली सरकार ने मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में किसानों के कर्ज माफी की दिशा में काम किया है. विभाग में योगदान देने के बाद कृषि मंत्री बादल ने भी किसानों को ऋण माफी की दिशा में सकारात्मक पहल करने की बात कही थी.
धान बेचनेवाले किसानों को प्रति क्विंटल 500 रुपये देने का प्रस्ताव, डीबीटी के माध्यम से दी जायेगी रािश कृषि विभाग को धान बेचने वाले किसानों को प्रति क्विंटल 500 रुपये देने का प्रस्ताव भी देने को कहा गया है.
धान खरीदारी का काम खाद्य आपूर्ति विभाग करता है. इसके लिए दोनों विभागों के बीच समन्वय स्थापित करना होगा. विभागीय अधिकारियों के अनुसार, यह प्रस्ताव वित्त विभाग के पास गया है. किसानों को सरकार से धान बेचने के लिए प्रोत्साहित करना सरकार का लक्ष्य है. ऐसे किसानों को सूची खाद्य आपूर्ति विभाग से प्राप्त कर प्रति क्विंटल 500 रुपये के हिसाब से डीबीटी का लाभ दिया जा सकता है.
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