Who Traitor Made India Slave of British: अगर ये गद्दार न होता, तो भारत कभी अंग्रेजों का गुलाम न होता?

Who is Biggest Traitor of India AI Image
Who Traitor Made India Slave of British: किस गद्दार की वजह से प्लासी युद्ध में अंग्रेजों को जीत मिली थी? आइए जानते हैं.
Who Traitor Made India Slave of British: कभी ‘सोने की चिड़िया’ कहा जाने वाला भारत आज भी अपने गौरवशाली अतीत के लिए जाना जाता है. इतिहास गवाह है कि भारत एक समय आर्थिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक दृष्टि से अत्यंत समृद्ध राष्ट्र था. लेकिन इसी समृद्धि ने विदेशी आक्रांताओं को आकर्षित किया और उन्होंने बार-बार भारत पर हमले किए. इन्हीं में से एक सबसे बड़ा हमला ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का था, जिसने भारत को सदियों तक गुलाम बनाकर रखा.
भारत को खोखला करने की शुरुआत
अंग्रेजों ने भारत की असंख्य दौलत, सोना-चांदी, रत्न और बहुमूल्य धरोहरें लूटकर अपने देश भेजीं. लेकिन भारत पर उनके शासन की शुरुआत एक व्यक्ति की गद्दारी से हुई. यह व्यक्ति था मीर जाफर बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला का विश्वासपात्र सेनापति.
भरोसे का खून, देश का नुकसान
1757 में प्लासी का युद्ध लड़ा गया, जो भारतीय इतिहास का एक निर्णायक मोड़ बन गया. इस युद्ध में सिराजुद्दौला की सेना को मीर जाफर ने धोखा दिया. उसने अंग्रेजों से गुप्त समझौता कर लिया था, जिसमें उसे बंगाल का नवाब बनाने का वादा किया गया था. युद्ध के दौरान मीर जाफर ने अपने सैनिकों को लड़ाई से पीछे हटा लिया, जिससे नवाब की सेना कमजोर पड़ गई और अंग्रेजों को आसान जीत मिली.
नमकहरामी की ड्योढ़ी: गद्दारी की निशानी
मुर्शिदाबाद में स्थित मीर जाफर के महल के खंडहर को आज भी ‘नमकहराम की ड्योढ़ी’ कहा जाता है. यह स्थान उसकी गद्दारी का प्रतीक बन चुका है, जहां इतिहास खुद गवाह बनकर खड़ा है. सिराजुद्दौला को पराजित करने के बाद अंग्रेजों ने उन्हें बंदी बना लिया और बाद में उनकी हत्या कर दी गई. यह केवल एक नवाब की हार नहीं, बल्कि भारत के स्वतंत्र अस्तित्व पर पहला गंभीर प्रहार था.
कठपुतली नवाब और अंग्रेजों का वर्चस्व
युद्ध के बाद मीर जाफर को अंग्रेजों ने बंगाल का नवाब जरूर बना दिया, लेकिन वह स्वतंत्र शासक नहीं था. उसका सारा शासन ईस्ट इंडिया कंपनी के निर्देशों पर चलता था. इस गद्दारी ने अंग्रेजों को भारत में एक मजबूत राजनीतिक और सैन्य आधार दे दिया, जिससे उन्होंने धीरे-धीरे पूरे देश पर कब्जा करना शुरू किया.
भारत के इतिहास का सबसे बड़ा गद्दार
मीर जाफर का नाम आज भी विश्वासघात का पर्याय माना जाता है. इतिहास की किताबों में उसका उल्लेख एक ऐसे व्यक्ति के रूप में होता है, जिसकी स्वार्थपरता ने पूरे देश को गुलामी की जंजीरों में जकड़ दिया. यदि उस समय मीर जाफर ने अंग्रेजों का साथ न दिया होता, तो शायद भारत की स्वतंत्रता की कहानी कुछ और होती.
गद्दारी से मिली गुलामी की नींव
प्लासी की लड़ाई और मीर जाफर की भूमिका यह साबित करती है कि एक व्यक्ति की स्वार्थी सोच पूरी सभ्यता को डगमगा सकती है. मीर जाफर की गद्दारी ने न केवल बंगाल, बल्कि पूरे भारत के लिए दासता के युग का द्वार खोल दिया. उसकी यही गाथा आने वाली पीढ़ियों को यह सीख देती है कि निजी स्वार्थ कभी भी देशहित से बड़ा नहीं होना चाहिए.’
नोट: यह जानकारी विभिन्न मीडिया स्रोतों से ली गई है. प्रभात खबर.कॉम इसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है.
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लेखक के बारे में
By Aman Kumar Pandey
अमन कुमार पाण्डेय डिजिटल पत्रकार हैं। राजनीति, समाज, धर्म पर सुनना, पढ़ना, लिखना पसंद है। क्रिकेट से बहुत लगाव है। इससे पहले राजस्थान पत्रिका के यूपी डेस्क पर बतौर ट्रेनी कंटेंट राइटर के पद अपनी सेवा दे चुके हैं। वर्तमान में प्रभात खबर के नेशनल डेस्क पर कंटेंट राइटर पद पर कार्यरत।
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