Who is Sushila Karki: नेपाल की पहली महिला प्रधानमंत्री बनकर रचा इतिहास, जानिए कौन हैं सुशीला कार्की

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Sushila Karki

Sushila Karki : सुशीला कार्की बनीं नेपाल की पहली महिला प्रधानमंत्री

Who is Sushila Karki: जुलाई 2016 में कार्की को नेपाल का 24वां मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया था और वह इस पद पर आसीन होने वाली पहली और अब तक की एकमात्र महिला बनीं. कार्की लगभग 11 महीने तक इस पद पर रहीं. वरिष्ठ अधिवक्ता दिनेश त्रिपाठी ने कहा, ‘‘ उन्होंने भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहिष्णुता वाली एक साहसी और निष्पक्ष न्याय की वकालत करने वाली महिला की छवि बनाई है.

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Who is Sushila Karki: आज से करीब 50 साल पहले बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में राजनीति विज्ञान की पढ़ाई करने वाली छात्रा सुशीला कार्की के बारे में शायद ही किसी ने सोचा होगा कि आने वाले समय में ये नेपाल की प्रधानमंत्री बनकर इतिहास रच देंगी. लेकिन समय और परिस्थिति सब करा देती है. नेपाल के सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की अब नेपाल की पहली महिला प्रधानमंत्री बन चुकी हैं. राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल, सेना प्रमुख अशोक राज सिगडेल समेत नेपाल के शीर्ष सैन्य अधिकारियों की मौजूदगी में उन्होंने शुक्रवार को नेपाल की प्रधानमंत्री पद की शपथ ली.

साल 2016 में बनी थीं मुख्य न्यायाधीश

जुलाई 2016 में कार्की को नेपाल का 24वां मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया था और वह इस पद पर आसीन होने वाली पहली और अब तक की एकमात्र महिला बनीं. कार्की लगभग 11 महीने तक इस पद पर रहीं. वरिष्ठ अधिवक्ता दिनेश त्रिपाठी ने कहा, ‘‘ उन्होंने भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहिष्णुता वाली एक साहसी और निष्पक्ष न्याय की वकालत करने वाली महिला की छवि बनाई है. एक साहसी और दृढ़ निश्चय न्यायाधीश के रूप में, वह भ्रष्टाचार के विरुद्ध मजबूती से खड़ी रही हैं.’’ कार्की को तत्कालीन प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा सरकार द्वारा पेश किए गए महाभियोग प्रस्ताव का भी सामना करना पड़ा था, लेकिन बाद में इसे वापस ले लिया गया था. कई पक्षों ने इस प्रस्ताव को राजनीतिक रूप से पक्षपातपूर्ण माना था.

BHU से की थी स्नातकोत्तर की पढ़ाई

सुशीला कार्की का जन्म 7 जून 1952 को पूर्वी नेपाल के विराटनगर के शंकरपुर-3 में हुआ था. यह भारत के पास स्थित है. उन्होंने 1971 में महेंद्र मोरंग परिसर-त्रिभुवन विश्वविद्यालय, नेपाल से स्नातक की डिग्री और 1975 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर की डिग्री पूरी की. इसके बाद उन्होंने 1978 में त्रिभुवन विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री हासिल की. कार्की ने न्यायिक पेशे में 32 साल बिताए और न्यायपालिका के क्षेत्र में महिलाओं की प्रगति का प्रतीक बन गईं. उन्होंने 1979 में विराटनगर में अपनी वकालत शुरू की, जहां उनकी मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि ने उनके कानूनी करियर को आकार दिया.

साधारण परिवार से रखती है ताल्लुक

1985 में कार्की को महेंद्र मल्टीपल कैंपस, धरान में सहायक शिक्षक के रूप में भी नियुक्त किया गया. कार्की 2007 में वरिष्ठ अधिवक्ता बनीं और 2009 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट में तदर्थ न्यायाधीश नियुक्त किया गया. 18 नवंबर 2010 को वह स्थायी न्यायाधीश बनीं. कार्की अपने माता-पिता की सात संतानों में सबसे बड़ी हैं और विराटनगर के एक साधारण किसान परिवार में पली-बढ़ीं. उनका विवाह नेपाली कांग्रेस के पूर्व लोकप्रिय नेता दुर्गा प्रसाद सुबेदी से हुआ है. दोनों की मुलाकात बीएचयू में पढ़ाई के दौरान हुई थी. (इनपुट भाषा)

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प्रीतीश सहाय

लेखक के बारे में

By प्रीतीश सहाय

12 वर्षों से टीवी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दे रहा हूं. रांची विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग से पढ़ाई की है. राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय विषयों के साथ-साथ विज्ञान और ब्रह्मांड विषयों पर रुचि है. बीते छह वर्षों से प्रभात खबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने के बाद डिजिटल जर्नलिज्म का अनुभव काफी अच्छा रहा है.

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