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सुरक्षा गारंटी के लिए जेंलेंस्की ने NATO से न जुड़ने के दिए संकेत, लेकिन सीमा पर समझौता अस्वीकार

Updated at : 15 Dec 2025 10:24 AM (IST)
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Volodymyr offers to drop NATO ambition but rejects to cede territory ahead of peace talks

वोलोदिमिर जेलेंस्की ने नाटो में शामिल होने की महत्वाकांक्षा छोड़ने की पेशकश की, लेकिन शांति वार्ता से पहले क्षेत्र छोड़ने से इनकार कर दिया. फोटो- एक्स

Volodymyr Zelenskyy offers to drop NATO ambition: यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने रविवार (14 दिसंबर, 2025) को कहा कि यदि पश्चिमी देशों से ठोस सुरक्षा गारंटी मिलती है तो उनका देश नाटो में शामिल होने की अपनी कोशिश छोड़ने को तैयार है. हालांकि, बर्लिन पहुंचने पर उन्होंने युद्ध समाप्ति को लेकर अमेरिकी दूतों से होने वाली बातचीत से पहले यह स्पष्ट कर दिया कि अमेरिका द्वारा रूस को क्षेत्र सौंपने के दबाव को वह स्वीकार नहीं करेंगे.

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Volodymyr Zelenskyy offers to drop NATO ambition: रूस–यूक्रेन युद्ध को तीन साल से अधिक समय हो चुका है. यह 22 फरवरी 2022 से शुरू हुआ यह सैन्य संघर्ष अब चौथे साल के करीब है. अब यह संघर्ष केवल सैन्य टकराव तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि कूटनीति, सुरक्षा गारंटी और भू-राजनीतिक संतुलन का बड़ा सवाल बन चुका है. एक ओर रूस अपने कब्जे वाले इलाकों को लेकर कठोर रुख अपनाए हुए है, तो दूसरी ओर यूक्रेन पश्चिमी देशों से दीर्घकालिक सुरक्षा आश्वासन चाहता है. इसी पृष्ठभूमि में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने पश्चिमी देशों, खासकर अमेरिका और यूरोप के सामने अपनी शर्तें और चिंताएं खुलकर रखी हैं.

रविवार को जेलेंस्की ने स्पष्ट कहा कि यदि पश्चिमी देश यूक्रेन को ठोस और भरोसेमंद सुरक्षा गारंटी देते हैं, तो उनका देश नाटो में शामिल न होने पर भी विचार कर सकता है. हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अमेरिका यूक्रेन पर रूस को किसी भी तरह का क्षेत्र सौंपने के लिए दबाव न बनाए. जेलेंस्की का कहना है कि सुरक्षा गारंटी का मकसद भविष्य में रूस को दोबारा युद्ध छेड़ने से रोकना होना चाहिए.

बर्लिन में कूटनीतिक बातचीत

जेलेंस्की युद्ध समाप्ति से जुड़े कूटनीतिक प्रयासों के तहत अमेरिका के राजनयिकों से बातचीत के लिए बर्लिन पहुंचे. यहां वह अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर के साथ संभावित वार्ता से पहले जर्मन चांसलर से मिले. बर्लिन में हुई यह बैठक यूक्रेन, अमेरिका और यूरोपीय अधिकारियों के बीच चल रही सिलसिलेवार बैठकों का हिस्सा है, जिनका उद्देश्य युद्ध को समाप्त करने के लिए किसी साझा रास्ते पर सहमति बनाना है.

नाटो पर पश्चिम का रुख और यूक्रेन की अपेक्षाएं

वार्ता से पहले जेलेंस्की ने ‘व्हाट्सऐप ग्रुप चैट’ पर एक ऑडियो क्लिप के जरिए पत्रकारों के सवालों का जवाब दिया. उन्होंने कहा कि अमेरिका और यूरोप के कुछ देशों ने यूक्रेन की नाटो सदस्यता के प्रयास को खारिज कर दिया है. ऐसे में कीव को उम्मीद है कि पश्चिम उसे नाटो सदस्य देशों को दी जाने वाली सुरक्षा गारंटी के समान ही कानूनी और व्यावहारिक सुरक्षा आश्वासन देगा. जेलेंस्की के अनुसार, यह यूक्रेन की ओर से एक बड़ा समझौता होगा.

कानूनी रूप से बाध्यकारी गारंटी की मांग

यूक्रेन के राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि कोई भी सुरक्षा आश्वासन केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसे कानूनी रूप से बाध्यकारी बनाया जाना चाहिए और अमेरिकी कांग्रेस का समर्थन भी मिलना चाहिए. उन्होंने यह भी बताया कि स्टटगार्ट में यूक्रेनी और अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के बीच हुई बैठक के बाद उन्हें अपनी टीम से विस्तृत जानकारी मिलने की उम्मीद है. जेलेंस्की ने कहा कि वह रविवार देर शाम जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज और संभवतः अन्य यूरोपीय नेताओं से अलग-अलग मुलाकात करेंगे. इन बैठकों में युद्ध की स्थिति, संभावित समझौते और यूरोप की भूमिका पर चर्चा होने की संभावना है.

समझौते में आ रही बाधाएं

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रूस से युद्ध को जल्द समाप्त करने की मांग कर रहे हैं और समझौते में हो रही देरी से असंतुष्ट हैं. हालांकि, संभावित समझौतों के रास्ते में कई बड़ी बाधाएं हैं, जिनमें यूक्रेन के पूर्वी दोनेत्सक क्षेत्र पर नियंत्रण सबसे अहम मुद्दा है. इस इलाके के बड़े हिस्से पर फिलहाल रूसी सेनाओं का कब्जा है. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन से मांग की है कि वह दोनेत्सक क्षेत्र के उस हिस्से से अपनी सेना वापस बुला ले, जो अब भी यूक्रेनी नियंत्रण में है. कीव ने इस मांग को सिरे से खारिज कर दिया है. जेलेंस्की ने बताया कि अमेरिका ने भी यूक्रेन के सामने दोनेत्सक से पीछे हटने और वहां एक मुक्त आर्थिक क्षेत्र बनाने का सुझाव रखा था, लेकिन उन्होंने इसे अव्यवहारिक बताते हुए ठुकरा दिया.

दोनेत्सक पर रूस की मांग और यूक्रेन का जवाब

जेलेंस्की ने कहा कि अमेरिका ने यह विचार भी रखा था कि यूक्रेन दोनेत्सक से पीछे हट जाए और वहां एक विसैन्यीकृत मुक्त आर्थिक क्षेत्र बनाया जाए, लेकिन उन्होंने इस प्रस्ताव को अव्यवहारिक बताते हुए ठुकरा दिया. उन्होंने कहा, “मैं इसे उचित नहीं मानता, क्योंकि उस आर्थिक क्षेत्र का प्रबंधन कौन करेगा?” उन्होंने आगे कहा, “अगर हम संपर्क रेखा के साथ किसी बफर जोन की बात कर रहे हैं, अगर हम किसी आर्थिक क्षेत्र की बात कर रहे हैं और यह मानते हैं कि वहां केवल एक पुलिस मिशन होगा और सैनिकों को हटा लिया जाएगा, तो सवाल बहुत सीधा है. उदाहरण के लिए, अगर यूक्रेनी सैनिक 5–10 किलोमीटर पीछे हटते हैं, तो रूसी सैनिक भी कब्जे वाले इलाकों में उतनी ही दूरी तक पीछे क्यों नहीं हटते?”

रूस अपनी शर्तों पर अब भी कायम

रूस के राष्ट्रपति के विदेश मामलों के सलाहकार यूरी उशाकोव ने रूसी बिजनेस दैनिक कोमर्सांत को बताया कि यदि किसी संभावित शांति योजना के तहत दोनेत्सक के कुछ हिस्सों को विसैन्यीकृत क्षेत्र बनाया जाता है, तब भी वहां रूसी पुलिस और नेशनल गार्ड तैनात रहेंगे. उशाकोव ने चेतावनी दी कि किसी समझौते की तलाश में काफी समय लग सकता है. उन्होंने कहा कि अमेरिकी प्रस्ताव, जिनमें रूसी मांगों को ध्यान में रखा गया था, यूक्रेन और उसके यूरोपीय सहयोगियों द्वारा सुझाए गए बदलावों के कारण “और खराब” हो गए हैं.

रविवार को रूसी सरकारी टीवी पर प्रसारित बयान में उशाकोव ने कहा, “इन दस्तावेजों में यूक्रेनियों और यूरोपियों का योगदान रचनात्मक होने की संभावना नहीं है,” और चेतावनी दी कि मॉस्को को “कड़ी आपत्तियां” होंगी. उन्होंने यह भी कहा कि जब इस महीने की शुरुआत में विटकॉफ और कुशनर ने पुतिन से मुलाकात की थी, तब मॉस्को में क्षेत्रीय मुद्दे पर सक्रिय रूप से चर्चा हुई थी. उशाकोव ने कहा, “अमेरिकी हमारी स्थिति को जानते और समझते हैं.”

बफर जोन और सीमा रेखा पर सवाल

जेलेंस्की ने सवाल उठाया कि यदि सीमा रेखा के साथ किसी बफर जोन या आर्थिक क्षेत्र की बात की जाती है और यह माना जाता है कि वहां केवल पुलिस बल तैनात होगा, तो फिर यह शर्त दोनों पक्षों पर समान रूप से क्यों लागू नहीं होती. उन्होंने कहा कि अगर यूक्रेनी सैनिक पांच से दस किलोमीटर पीछे हटते हैं, तो रूसी सैनिक भी कब्जे वाले क्षेत्रों में उतनी ही दूरी तक पीछे क्यों नहीं हटते.

अंतिम रुख: जहां हैं, वहीं बने रहने की बात

इस पूरे मुद्दे को जेलेंस्की ने “बेहद संवेदनशील” बताया और कहा कि मौजूदा हालात में सबसे व्यावहारिक विकल्प यही है कि दोनों पक्ष जहां खड़े हैं, वहीं बने रहें. उनके अनुसार, किसी भी समाधान को यूक्रेन की संप्रभुता, सुरक्षा और भविष्य को ध्यान में रखकर ही आगे बढ़ाया जाना चाहिए.

रूस और यूक्रेन के बीच हवाई हमले जारी

इन शांति वार्ताओं के बीच दोनों देशों के बीच युद्ध अब भी जारी है. यूक्रेन की वायुसेना ने कहा कि रूस ने रातों-रात यूक्रेन पर बैलिस्टिक मिसाइलें और 138 हमलावर ड्रोन दागे. वायुसेना के अनुसार, इनमें से 110 को मार गिराया गया या निष्क्रिय कर दिया गया, लेकिन छह स्थानों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों के निशान मिले हैं. उन्होंने बताया कि बीते एक हफ्ते में रूस ने यूक्रेन पर 1,500 से ज्यादा स्ट्राइक ड्रोन, लगभग 900 गाइडेड एरियल बम और 46 विभिन्न प्रकार की मिसाइलें दागी हैं.

वहीं रूस के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उसकी वायु रक्षा प्रणालियों ने शनिवार देर रात और रविवार तड़के 235 यूक्रेनी ड्रोन मार गिराए. बेलगोरोद क्षेत्र में एक ड्रोन हमले में यास्नये जोरी गांव में एक व्यक्ति घायल हो गया और उसका घर जल गया, यह जानकारी क्षेत्रीय गवर्नर व्याचेस्लाव ग्लैडकोव ने दी. यूक्रेनी ड्रोन ने वोल्गोग्राद क्षेत्र के उर्युपिंस्क में एक तेल डिपो को निशाना बनाया, जिससे आग लग गई, ऐसा क्षेत्रीय गवर्नर आंद्रेई बोचारोव ने बताया. क्रास्नोडार क्षेत्र में यूक्रेनी ड्रोन ने अफिप्स्की कस्बे पर हमला किया, जहां एक तेल रिफाइनरी स्थित है. अधिकारियों के अनुसार, धमाकों से रिहायशी इमारतों की खिड़कियों के शीशे टूट गए, हालांकि रिफाइनरी को किसी नुकसान की सूचना नहीं है.

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Anant Narayan Shukla

लेखक के बारे में

By Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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