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US Removed Leaders: अमेरिका ने कई नेताओं को सत्ता से हटाया, लेकिन वेनेजुएला का मामला अलग क्यों है, जानें

Updated at : 05 Jan 2026 2:56 PM (IST)
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US Removed Leaders From Power

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

US Removed Leaders: अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उनके घर से गिरफ्तार कर लिया है. इस अप्रत्याशित कदम से पूरी दुनिया में हलचल मच गई है. मादुरो और उनकी पत्नी, सीलिया फ्लोरेस पर ड्रग तस्करी और आतंकवाद के आरोप हैं. लैटिन अमेरिकी देश, संयुक्त राष्ट्र और विशेषज्ञ इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बता रहे हैं.

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US Removed Leaders:  रविवार की सुबह अमेरिका ने दुनिया में कम देखे गए कदम उठाए. अमेरिकी विशेष सेनाओं ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उनके घर से गिरफ्तार किया और अमेरिका ले गए. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कि मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस पर न्यूयॉर्क में ड्रग्स और आतंकवाद के मामले में मुकदमा चलेगा. अमेरिका ने हमेशा से यह तरीका अपनाया है कि किसी नेता को अस्वीकार्य घोषित किया जाए, सैन्य बल का इस्तेमाल किया जाए और सरकार बदली जाए. लेकिन इस बार मामला पहले से कहीं अधिक जटिल और संवेदनशील है.

US Removed Leaders in Hindi: अमेरिका के पहले के हस्तक्षेप

इतिहास में अमेरिका और उसके सहयोगियों ने कई देशों में सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से हस्तक्षेप किया है. 1953 में ब्रिटिश गुयाना (अब गयाना) में चुने गए प्रधानमंत्री चेड्डी जगन की सरकार केवल 133 दिनों में गिरा दी गई, क्योंकि उनके सुधार ब्रिटिश व्यापार हितों को नुकसान पहुंचा सकते थे. 1965 में डोमिनिकन रिपब्लिक में राष्ट्रपति जुआन बोश को सत्ता में लौटने से रोकने के लिए अमेरिका ने 22,000 सैनिक भेजे. 1983 में ग्रेनेडा में प्रधानमंत्री मॉरिस बिशप की हत्या के बाद अमेरिका ने सैनिक तैनात किए. 1989 में पनामा में जनरल मैनुएल नॉरीगा को हटाने के लिए 24,000 अमेरिकी सैनिक भेजे गए. 2004 में हैती के राष्ट्रपति जीन-बर्ट्रेंड अरिस्टिड को सत्ता से हटाकर अफ्रीका भेजा गया.

इसके अलावा, 1953 में ईरान के प्रधानमंत्री मोहम्मद मोसाद्देक, 1954 में ग्वाटेमाला के राष्ट्रपति जैकोबो आर्बेंज गुस्मन, और 1973 में चिली के राष्ट्रपति साल्वाडोर अलेंडे को हटाने में अमेरिका की भूमिका रही. चिली में यह सैन्य तख्तापलट जनरल ऑगस्टो पिनोचेत के नेतृत्व में हुआ और इसमें अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA भी शामिल थी. (US Removed Leaders From Power Invaded Several Countries in Hindi)

मादुरो का मामला क्यों अलग है?

वेनेजुएला एक बड़ा देश है, जिसकी जनसंख्या लगभग 3 करोड़ है और उसकी सेना अमेरिकी हमलों के लिए लंबे समय से तैयार है. पहले के हस्तक्षेप का वैश्विक संदर्भ अलग था, लेकिन अब मादुरो के खिलाफ अभियान पूरी दुनिया की नजरों में है. कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्टावो पेट्रो ने इसे लैटिन अमेरिका की संप्रभुता पर हमला कहा. ब्राजील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा ने इसे अत्यंत खतरनाक उदाहरण बताया. मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लॉडिया शीनबॉम ने इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन कहा. फ्रांस के विदेश मंत्री ने इसे बल के गैर-उपयोग के सिद्धांत का उल्लंघन बताया. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया. इस कारण से कोलंबिया ने वेनेजुएला सीमा पर सैनिक तैनात कर दिए, और गुयाना ने अपनी सुरक्षा योजनाएं सक्रिय कर दी हैं. विशेषज्ञ अभी यह नहीं बता पा रहे कि अमेरिका आगे और कोई ऑपरेशन करेगा या नहीं.

मादुरो और उनकी पत्नी पर आरोप

अमेरिका ने मादुरो और उनकी पत्नी पर नार्को-टेररिज्म और ड्रग्स के गंभीर आरोप लगाए हैं. दोनों को न्यूयॉर्क के फेडरल कोर्ट में पेश किया जाएगा और उन्हें आजीवन कारावास की सजा भी हो सकती है. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है और अब सत्ता कानून की बजाय व्यक्तिगत पसंदों पर भारी हो रही है.

अमेरिका की रणनीति और वैश्विक प्रतिक्रिया

इतिहास में अमेरिका ने उन देशों में हस्तक्षेप किया, जहां उसकी सरकारों को खतरा महसूस हुआ. लेकिन 2026 का वेनेजुएला पहले के छोटे देशों जैसा नहीं है. यह बड़ा देश है, जिसकी सेना मजबूत है. मादुरो के खिलाफ अभियान के कारण कई देशों ने निंदा की. कोलंबिया ने इसे ‘संप्रभुता पर हमला’ कहा. ब्राजील ने इसे ‘अत्यधिक खतरनाक उदाहरण’ बताया. मेक्सिको ने इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन कहा. फ्रांस और संयुक्त राष्ट्र ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया.

इससे लैटिन अमेरिका में विभाजन और बढ़ गया है. कोलंबिया ने सीमा पर सेना तैनात की, और गुयाना ने सुरक्षा योजनाएं सक्रिय की. विशेषज्ञ सवाल उठा रहे हैं कि क्या अमेरिका इस तरह की बेमियादी प्रतिबद्धता के लिए तैयार है. वेनेजुएला के रक्षा मंत्री ने इसे “आपराधिक आक्रमण” कहा और लड़ाई जारी रखने का संकल्प लिया.

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Govind Jee

लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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