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ईरान में फिर भड़की विरोध की चिंगारी, जनवरी के बाद छात्रों का महाविद्रोह, क्या ट्रंप करेंगे हमला?

Updated at : 22 Feb 2026 9:41 AM (IST)
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Iran Protest Students Revolt Trump Attack Threat

यह तस्वीर ईरान प्रोटेस्ट की है, जो पहले की है.

Iran Protest: ईरान की यूनिवर्सिटीज में बड़े पैमाने पर अशांति है. जनवरी में हुई जानलेवा हिंसा के बाद, स्टूडेंट्स एक बार फिर आगे आ गए हैं..तेहरान से लेकर मशहद तक, आजादी के नारे और सिक्योरिटी फोर्सेज के साथ सीधी झड़पों की खबरें आ रही हैं. एक तरफ, देश में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, और दूसरी तरफ डोनाल्ड ट्रंप की मिलिट्री एक्शन की धमकी. क्या ईरान में तख्तापलट होगा या वॉर होगा?

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Iran Protest: ईरान में एक बार फिर हालात बिगड़ते नजर आ रहे हैं. पिछले महीने हुई भीषण हिंसा और मौतों के बाद, शनिवार को पहली बार देश की कई बड़ी यूनिवर्सिटीज में छात्रों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, नए सेमेस्टर की शुरुआत होते ही तेहरान की शरीफ यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी समेत कई कैंपस में भारी विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं.

कैंपस में भिड़े दो गुट

शरीफ यूनिवर्सिटी में सैकड़ों छात्र शांतिपूर्ण तरीके से मार्च निकाल रहे थे, लेकिन जल्द ही वहां तनाव बढ़ गया. प्रदर्शनकारी छात्र ‘तानाशाह मुर्दाबाद’ के नारे लगा रहे थे, जो सीधे तौर पर ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की ओर इशारा था. वीडियो फुटेज में देखा गया कि वहां सरकार समर्थक गुट भी मौजूद था, जिसके बाद दोनों पक्षों में हिंसक झड़पें और मारपीट शुरू हो गई.

तेहरान से मशहद तक फैला गुस्सा

सिर्फ तेहरान ही नहीं, बल्कि ईरान के दूसरे सबसे बड़े शहर मशहद में भी छात्र सड़कों पर उतर आए हैं. बीबीसी और सोशल मीडिया फुटेज के अनुसार:

  • शाहिद बेहेष्टी यूनिवर्सिटी: यहां छात्रों ने धरने (सिट-इन) की शुरुआत की है.
  • अमीर कबीर यूनिवर्सिटी: यहां भी सरकार विरोधी नारेबाजी की गई.
  • मशहद: यहां छात्रों ने ‘आजादी-आजादी’ और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने के नारे लगाए. खबरों की मानें तो रविवार के लिए भी बड़े प्रदर्शनों की तैयारी है.

आखिर क्यों सुलग रहा है ईरान?

इस ताजा गुस्से की जड़ें पिछले साल दिसंबर और इस साल जनवरी में हुए प्रदर्शनों से जुड़ी हैं. शुरुआत में लोग खराब अर्थव्यवस्था और महंगाई के खिलाफ सड़कों पर उतरे थे, लेकिन धीरे-धीरे यह आंदोलन पूरी सरकार को बदलने की मांग में बदल गया. यह 1979 की क्रांति के बाद का सबसे बड़ा आंदोलन माना जा रहा है.

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मौतों के आंकड़ों पर भारी विवाद

जनवरी की हिंसा में कितने लोग मारे गए, इसे लेकर आंकड़ों में बड़ा अंतर है:

  • HRANA (मानवाधिकार संस्था): इनका दावा है कि अब तक 6,159 मौतें कन्फर्म हो चुकी हैं, जिनमें 92 बच्चे भी शामिल हैं. संस्था करीब 17,000 अन्य मौतों की रिपोर्ट की जांच भी कर रही है.
  • ईरानी सरकार: सरकार का कहना है कि 3,100 लोग मारे गए हैं, जिनमें से ज्यादातर सुरक्षाकर्मी या आम लोग थे जिन्हें ‘दंगाईयों’ ने निशाना बनाया.

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध जैसे हालात

यह प्रदर्शन ऐसे समय में हो रहे हैं जब अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव चरम पर है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगले 10-15 दिनों में पता चल जाएगा कि कोई समझौता होगा या अमेरिका सैन्य कार्रवाई (स्ट्राइक) करेगा.

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ताजा स्थिति क्या है?

  • जंगी तैयारी: अमेरिका ने अपने एयरक्राफ्ट कैरियर ‘USS अब्राहम लिंकन’ और ‘USS जेराल्ड आर फोर्ड’ को खाड़ी क्षेत्र में तैनात कर दिया है.
  • वार्ता का दौर: ओमान की मध्यस्थता में बातचीत चल रही है, लेकिन यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) को लेकर पेंच फंसा हुआ है.
  • ईरान का रुख: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का कहना है कि वे जल्द ही नया प्रस्ताव देंगे, जबकि खामेनेई ने चेतावनी दी है कि अगर हमला हुआ तो पूरे क्षेत्र में युद्ध छिड़ जाएगा.

सोशल मीडिया पर भी दोनों पक्ष एक्टिव हैं. जहां कुछ लोग बाहरी मदद से सरकार बदलना चाहते हैं, वहीं कुछ गुट विदेशी दखल के खिलाफ हैं. अब सबकी नजरें अगले कुछ दिनों पर टिकी हैं कि क्या बातचीत से रास्ता निकलेगा या स्थिति और बिगड़ेगी.

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Govind Jee

लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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