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US Refugee Deal: शरणार्थी सौदे का खुलासा कर फंसा अमेरिका, इन दो देशों ने कर दी बोलती बंद

Updated at : 27 Jun 2025 10:30 AM (IST)
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US Refugee Deal

US Refugee Deal

US Refugee Deal: अमेरिका ने दावा किया कि ग्वाटेमाला और होंडुरास ने शरणार्थियों को स्वीकारने के लिए समझौते किए हैं, लेकिन दोनों देशों ने इससे साफ इनकार कर दिया. इस घटनाक्रम से अमेरिका की शरण नीति पर सवाल खड़े हो गए हैं और कूटनीतिक असहजता भी सामने आई है.

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US Refugee Deal: अमेरिका की गृह सुरक्षा सचिव क्रिस्टी नोएम ने हाल ही में ग्वाटेमाला और होंडुरास की यात्रा के बाद दावा किया कि दोनों देशों ने ऐसे समझौते किए हैं, जिनके तहत वे अमेरिका की ओर पलायन करने वाले प्रवासियों को शरण देने के लिए तैयार हैं. नोएम के अनुसार, यह कदम ट्रंप प्रशासन की उस नीति का हिस्सा है, जिसके तहत प्रवासियों को उनके देश या किसी तीसरे सुरक्षित देश में भेजा जाएगा. उन्होंने इसे “विकल्प देने की नीति” बताते हुए कहा कि संकट में फंसे लोगों को सिर्फ अमेरिका ही नहीं, बल्कि अन्य देशों में भी सुरक्षित ठिकाना मिल सकता है.

लेकिन नोएम के इस दावे के तुरंत बाद ही अमेरिका को कूटनीतिक झटका लगा, जब ग्वाटेमाला और होंडुरास दोनों ने ऐसे किसी भी समझौते से साफ इनकार कर दिया. ग्वाटेमाला के राष्ट्रपति कार्यालय ने बयान जारी कर स्पष्ट किया कि अमेरिकी अधिकारी की यात्रा के दौरान कोई “सेफ थर्ड कंट्री” समझौता नहीं हुआ. उन्होंने बस यह स्वीकार किया कि अमेरिका ग्वाटेमाला को एक अस्थायी ट्रांजिट पॉइंट के रूप में इस्तेमाल करेगा, जहां से प्रवासियों को उनके देशों में वापस भेजा जाएगा. होंडुरास की ओर से भी यही स्थिति रही. देश के आव्रजन निदेशक ने किसी भी तरह के समझौते से इनकार किया, जबकि विदेश मंत्रालय ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.

इस स्थिति ने अमेरिका की शरणार्थी नीति और उसके दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं. क्रिस्टी नोएम ने स्वयं यह स्वीकार किया कि इन समझौतों को लागू करना इन देशों के लिए राजनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण है. कमजोर आर्थिक स्थिति, संसाधनों की भारी कमी और घरेलू विरोध ने ग्वाटेमाला और होंडुरास को ऐसे किसी भी समझौते से दूर रखा है. दोनों देश फिलहाल वामपंथी सरकारों द्वारा शासित हैं, जिससे ट्रंप प्रशासन की नीतियों से सहमति जताना उनके लिए राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो सकता है.

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ग्वाटेमाला दौरे के दौरान नोएम ने अमेरिका और ग्वाटेमाला के बीच एक जॉइंट सिक्योरिटी एमओयू पर हस्ताक्षर किया, जिसके तहत अमेरिकी अधिकारी ग्वाटेमाला के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एजेंटों को ट्रेनिंग देंगे ताकि आतंकी गतिविधियों की पहचान की जा सके.

गौरतलब है कि ट्रंप के पहले कार्यकाल में अमेरिका ने होंडुरास, ग्वाटेमाला और एल साल्वाडोर के साथ “सेफ थर्ड कंट्री” समझौते किए थे. हालांकि, इन देशों के नागरिक खुद बड़ी संख्या में अमेरिका की ओर पलायन कर रहे थे, जिससे यह नीति ज्यादा प्रभावी साबित नहीं हो पाई थी.

इस बीच, मैक्सिको की नई राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबौम ने भी साफ कर दिया है कि उनका देश “सेफ थर्ड कंट्री” समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करेगा. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि मानवीय आधार पर मैक्सिको ने अमेरिका द्वारा भेजे गए 5,000 से अधिक प्रवासियों को मदद दी है. अमेरिका ने पनामा और कोस्टा रिका जैसे देशों के साथ भी ऐसे सीमित समझौते किए हैं, लेकिन वहां भी अब तक प्रवासियों की संख्या बहुत कम रही है. इस पूरी स्थिति ने अमेरिका की शरणार्थी नीति के भविष्य और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं.

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Aman Kumar Pandey

लेखक के बारे में

By Aman Kumar Pandey

अमन कुमार पाण्डेय डिजिटल पत्रकार हैं। राजनीति, समाज, धर्म पर सुनना, पढ़ना, लिखना पसंद है। क्रिकेट से बहुत लगाव है। इससे पहले राजस्थान पत्रिका के यूपी डेस्क पर बतौर ट्रेनी कंटेंट राइटर के पद अपनी सेवा दे चुके हैं। वर्तमान में प्रभात खबर के नेशनल डेस्क पर कंटेंट राइटर पद पर कार्यरत।

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