Trump-Khamenei War of Words: ईरान में विरोध प्रदर्शन के बीच दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच जुबानी जंग भी तेज हो गई है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार (स्थानीय समय) को कहा कि ईरान की स्थिति पर बहुत करीबी नजर रखी जा रही है और उन्होंने देश में प्रदर्शन कर रहे लोगों की सुरक्षा की उम्मीद जताई. ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर प्रदर्शनकारियों को मारा गया, तो अमेरिका इसमें दखल देगा और ईरान को “जहां सबसे ज्यादा दर्द होता है, वहां चोट करेगा.” वहीं ईरान के सुप्रीम लीडर अयातोल्लाह अली खामेनेई ने भी अपनी बातों से मंशा जताई कि ईरान डरने वाला नहीं है. उन्होंने कहा कि दुनिया के तानाशाह और घमंडी शक्तियों की तरह डोनाल्ड ट्रंप का भी पतन होगा. इस दौरान उन्होंने इस्लामी इतिहास के दो किरदारों फिरौन और निमरोद का भी जिक्र किया.
अगर वे लोगों को मारेंगे, तो हम दखल देंगे- ट्रंप
ट्रंप ने शुक्रवार को व्हाइट हाउस में तेल और गैस क्षेत्र के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक की. इसी दौरान मीडिया के सवालों ईरान के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “ईरान बड़ी मुश्किल में है. मुझे लगता है कि लोग कुछ ऐसे शहरों पर कब्जा कर रहे हैं, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी. हम हालात पर बहुत ध्यान से नजर रख रहे हैं. मैंने बहुत सख्त बयान दिया है कि अगर वे पहले की तरह लोगों को मारना शुरू करते हैं, तो हम दखल देंगे. हम उन्हें वहां बहुत जोर से चोट करेंगे, जहां सबसे ज्यादा दर्द होता है. इसका मतलब जमीनी सेना भेजना नहीं है, लेकिन इसका मतलब है उन्हें कड़ा जवाब देना. हम ऐसा नहीं चाहते, लेकिन अगर हुआ तो करेंगे.”
अमेरिकी राष्ट्रपति ने आगे कहा, “ईरान में जो हो रहा है, वह काफी अविश्वसनीय है. इसे देखना हैरान करने वाला है. उन्होंने बहुत खराब काम किया है, उन्होंने अपने लोगों के साथ बहुत बुरा व्यवहार किया है और अब उन्हें उसका जवाब मिल रहा है. देखते हैं आगे क्या होता है. हम इसे बहुत करीब से देख रहे हैं.” प्रदर्शनकारियों को लेकर ट्रंप ने कहा, “मैं बस यही उम्मीद करता हूं कि ईरान के प्रदर्शनकारी सुरक्षित रहें, क्योंकि इस वक्त वहां हालात बेहद खतरनाक हैं. और मैं फिर ईरानी नेताओं से कहता हूं, बेहतर है कि आप गोलियां चलाना शुरू न करें, क्योंकि अगर आपने शुरू किया तो हम भी जवाब देंगे.”
पॉलिसी रिसर्च ऑर्गनाइजेशन- इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर के अनुसार, 7 जनवरी के बाद से ईरान में विरोध प्रदर्शनों की संख्या और तीव्रता में तेज बढ़ोतरी हुई है. इसमें तेहरान जैसे बड़े शहरों और उत्तर-पश्चिमी ईरान के इलाके भी शामिल हैं. थिंक टैंक ने कहा कि शासन ने दमन तेज कर दिया है, जिसमें कम ही देखे जाने वाले कदम के तौर पर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) की जमीनी सेनाओं को कम से कम एक प्रांत में प्रदर्शनों को दबाने के लिए तैनात किया गया है. ईरान में इन प्रदर्शनों के बाद इंटरनेट शटडाउन कर दिया गया है. स्वतंत्र मीडिया रिपोर्ट्स का दावा है कि 28 दिसंबर 2025 से अब तक इन प्रदर्शनों में अब तक 60 से ज्यादा लोग मारे गए हैं. वहीं टाइम मैगजीन की रिपोर्ट ने एक डॉक्टर का हवाला देते हुए कहा कि इस प्रदर्शन में अब तक 200 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं.
ईरान के सुप्रीम लीडर ने प्रदर्शनकारियों के पीछे अमेरिका का हाथ बताया
ईरान की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है. इसके बाद, 9 जनवरी को ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई ने बड़े पैमाने पर हो रहे प्रदर्शनों के पीछे अमेरिकी प्रशासन का हाथ होने का आरोप लगाया था. एक सार्वजनिक संबोधन में खामेनेई ने कहा कि प्रदर्शनकारी अमेरिकी राष्ट्रपति को खुश करने के लिए काम कर रहे हैं. ईरान में हो रहे प्रदर्शनों में क्राउन प्रिंस रजा पहलवी के आह्वान ने भी असर डाला है. उन्होंने ईरानी जनता से सड़कों पर उतरने की मांग की थी. सोशल मीडिया पर वे पिछले लगभग 2 हफ्ते से इस पर लगातार अपडेट कर रहे हैं. उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप से मिलने के लिए समय भी मांगा है. दोनों के बीच अगले हफ्ते मुलाकात भी हो सकती है. आपको बता दें कि रजा पहलवी पिछले 47 साल से देश से बाहर निर्वासन में रह रहे हैं.
खामनेई ने कहा दंगाई देश को नुकसान पहुंचा रहे
ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, खामेनेई ने कहा, “कुछ लोग ऐसे भी हैं जिनका काम सिर्फ तबाही मचाना है. बीती रात तेहरान में और कुछ अन्य जगहों पर, कुछ उपद्रवियों ने अपने ही देश की एक इमारत को नुकसान पहुंचाया. मान लीजिए उन्होंने किसी इमारत या दीवार को तोड़ दिया, सिर्फ अमेरिका के राष्ट्रपति को खुश करने के लिए. क्योंकि उसने कुछ बेमतलब की बातें कही थीं कि ‘अगर ईरान की सरकार ऐसा-वैसा करती है तो मैं तुम्हारे साथ खड़ा हो जाऊंगा.’ यानी इन दंगाइयों और देश को नुकसान पहुंचाने वालों के साथ. ये लोग उसी पर अपनी उम्मीदें टिकाए बैठे हैं. अगर वह सक्षम है तो पहले अपने देश को संभाले! उसके अपने देश में ही तरह-तरह की घटनाएं हो रही हैं.”
ट्रंप का भी होगा पतन- खामेनेई
आयतुल्लाह खामेनेई ने राष्ट्रपति ट्रंप पर तानाशाह की तरह व्यवहार करने का आरोप लगाया और कहा कि अहंकार के चरम पर पहुंचने पर ही तानाशाहों का पतन होता है. उन्होंने कहा, “हमारा राष्ट्र विदेशियों के लिए भाड़े पर काम करने वालों को बर्दाश्त नहीं करता. आप चाहे जो भी हों, जैसे ही आप किसी विदेशी के लिए काम करने लगते हैं, देश की नजर में आप अस्वीकार्य हो जाते हैं. और वह व्यक्ति (ट्रंप) जो वहां घमंड और अहंकार के साथ बैठा है और पूरी दुनिया पर फैसले सुना रहा है, उसे यह भी जान लेना चाहिए कि दुनिया के तानाशाह और घमंडी शक्तियां, जैसे फिरौन, नमरूद, रजा खान, मोहम्मद रजा और उनके जैसे, अपने अहंकार के शिखर पर ही गिराए गए. यह व्यक्ति भी उसी तरह गिराया जाएगा.”
फिरौन कौन थे?
फिरौन (Pharaoh) असल में किसी एक व्यक्ति का नाम नहीं था, बल्कि प्राचीन मिस्र के शासकों की उपाधि थी, जैसे आज के समय में राजा या सम्राट कहा जाता है. हालांकि, धार्मिक ग्रंथों खासतौर पर कुरान और बाइबल में भी फिरौन का जिक्र होता है. यह आम तौर पर उससे मतलब उस मिस्री शासक को कहा गया है जो हज़रत मूसा (मूसेस) के दौर में सत्ता में था.
धार्मिक कथाओं के अनुसार, यह फिरौन बेहद अहंकारी और क्रूर शासक था. उसने खुद को ईश्वर घोषित कर दिया था और अपनी प्रजा से अपनी पूजा करवाता था. उसने बनी इसराइल (यहूदियों) पर भारी अत्याचार किए, उन्हें गुलामी में रखा और यह आशंका होने पर कि उनके बीच कोई ऐसा बच्चा पैदा होगा जो उसकी सत्ता को चुनौती देगा, नवजात लड़कों की हत्या का आदेश दे दिया. कुरान और बाइबल के मुताबिक, जब उसने हजरत मूसा और उनके अनुयायियों का पीछा किया, तो अंत में लाल सागर में डूबकर उसकी मौत हो गई. इस घटना को अक्सर इस बात की मिसाल माना जाता है कि घमंड और जुल्म का अंत आखिरकार विनाश में होता है.
निमरोद कौन था?
निमरोद (Nimrod) को प्राचीन मेसोपोटामिया (आज का इराक क्षेत्र) का एक शक्तिशाली लेकिन अत्याचारी शासक माना जाता है. वह हजरत इब्राहीम (अब्राहम) के समय का राजा बताया जाता है. ऐतिहासिक और धार्मिक परंपराओं में उसे एक ऐसे शासक के रूप में याद किया जाता है, जिसने अपनी ताकत और सत्ता के घमंड में आकर खुद को भगवान समझना शुरू कर दिया.
हालांकि कुरान में निमरोद का नाम सीधे तौर पर नहीं आता, लेकिन सूरह अल-बकराह में जिस राजा का उल्लेख है, उसने हजरत इब्राहीम से जीवन और मृत्यु को लेकर बहस की थी, इस्लामी विद्वान उसे ही निमरोद मानते हैं. बाइबिल और यहूदी परंपराओं में भी निमरोद को एक ऐसे शासक के रूप में दिखाया गया है, जिसने ईश्वर के खिलाफ विद्रोह किया. इस्लामी रिवायतों में उसकी मौत की कहानी बेहद प्रतीकात्मक मानी जाती है. कहा जाता है कि एक बहुत छोटे से मच्छर के जरिए उसकी मृत्यु हुई, जो उसके दिमाग में चला गया.
खामनेई ने इन दोनों का नाम का उदाहरण ट्रंप के पतन से जोड़ा है. उनका मकसद यह बताना है कि कितना ही बड़ा और ताकतवर इंसान क्यों न हो, उसका अहंकार उसे सबसे छोटी चीज से भी तबाह कर सकता है.
ये भी पढ़ें:-

