Thailand Cambodia War : सावन में शिव मंदिर के पास थाईलैंड और कंबोडिया के बीच जंग!
Published by : Amitabh Kumar Updated At : 25 Jul 2025 7:13 AM
Thai people looks at damage of Phanom Dong Rak hospital after Cambodia fired
Thailand Cambodia War : थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सीमा विवाद बढ़ चुका है. गोलीबारी में कम से कम 11 लोगों की मौत हो गई. ज्यादातर आम नागरिकों की जान इसमें गई है. 11वीं सदी में खमेर सम्राट सूर्यवर्मन ने भगवान शिव के लिए प्रीह विहिहर मंदिर बनवाया था. यह मंदिर आज थाईलैंड और कंबोडिया के बीच युद्ध का कारण बन चुका है. यहां अभी भी शिवलिंग स्थित है.
Thailand Cambodia War : साल 2025 को युद्ध का साल माना जा रहा है. ऐसा इसलिए क्योंकि केवल सात महीनों में दुनिया ने तीन बड़े युद्ध देख लिये हैं. पहले भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष हुआ, फिर इजरायल और ईरान के बीच लड़ाई छिड़ी. इसके बाद अब थाईलैंड और कंबोडिया के बीच जंग शुरू हो गई है. गुरुवार सुबह को खबर आई कि दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे पर बड़े हमले कर रही हैं. कंबोडिया ने थाईलैंड के सीमावर्ती क्षेत्रों में रॉकेट दागे, जबकि थाईलैंड की वायुसेना ने कंबोडिया के सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए. इन हमलों में 11 लोगों की जान चली गई.
युद्ध की असली वजह एक विवादित क्षेत्र है, जो हिंदू धर्म से जुड़ा
थाईलैंड और कंबोडिया के बीच लड़ाई उत्तरी कंबोडिया और थाईलैंड की सीमा पर हो रही है, खासकर थाईलैंड के सुरीन और सीसाकेट राज्यों में जंग तेज होती नजर आ रही है. इस युद्ध की असली वजह एक विवादित क्षेत्र है, जो हिंदू धर्म से जुड़ा है. गुरुवार की सुबह कंबोडिया के एक ड्रोन की थाई सीमा पर मौजूदगी ने युद्ध की चिंगारी भड़काई. यह विवाद दोनों देशों के बीच अचानक जंग की वजह बन गई.
कहां है शिव मंदिर जिसकी वजह से है विवाद
11वीं सदी का प्रीह विहिहर मंदिर थाईलैंड और कंबोडिया के बीच युद्ध का कारण बन गया है. यह मंदिर कंबोडिया के प्रीह विहार प्रांत और थाईलैंड के सिसाकेत प्रांत की सीमा पर मौजूद है. 1962 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) ने फैसला दिया था कि यह मंदिर कंबोडिया का है, लेकिन आसपास की 4.6 वर्ग किलोमीटर जमीन पर दोनों देश दावा करते नजर आते हैं. थाईलैंड इसे अपनी जमीन मानता है, जबकि कंबोडिया भी इसे अपना हिस्सा कहता है. यह मंदिर खमेर सम्राट सूर्यवर्मन ने 11वीं सदी में भगवान शिव के लिए बनवाया था. समय के साथ यह मंदिर सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि राष्ट्रवाद, राजनीति और सैन्य ताकत का भी प्रतीक बन गया है. मंदिर में शिवलिंग और भगवान शिव के द्वारपाल भी हैं.
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थाईलैंड और कंबोडिया के बीच गोलाबारी
थाईलैंड और कंबोडिया ने छोटे हथियारों से गोलीबारी की और तोप से गोले दागे. यही नहीं रॉकेट से हमले किये गये. थाईलैंड ने भी हवाई हमले किए. गुरुवार सुबह झड़पें शुरू होने पर एक वीडियो में थाईलैंड के ग्रामीणों को अपने घरों से भागते हुए देखा जा सकता है. थाई रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता सुरसंत कोंगसिरी ने बताया कि सीमा पर कम से कम छह इलाकों में झड़पें जारी हैं. ये झड़पें बुधवार को सीमा पर एक बारुदी सुरंग में विस्फोट के बाद शुरू हुईं, जिसमें थाईलैंड के पांच सैनिक घायल हो गए और बैंकॉक ने कंबोडिया में अपने राजदूत को वापस बुला लिया तथा कंबोडिया के राजदूत को निष्कासित कर दिया. थाईलैंड ने भी अपने नागरिकों से कंबोडिया छोड़ने का अनुरोध करते हुए सभी भूमि सीमा चौकियों को सील कर दिया है.
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By Amitabh Kumar
अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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