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चीन का भूत उतार देगा ये जानवर, 112 मील दूर खड़ा खतरनाक योद्धा; जंग में मात देने के लिए ताइवान लेगा इसका सहारा!

9 Oct, 2025 2:13 pm
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Taiwan Porcupine Strategy

पॉर्क्यूपाइन- ऐक ऐसा जानवर है जिसके शरीर पर कांटा बना रहता है.

Taiwan Porcupine Strategy: ताइवान की पॉर्क्यूपाइन स्ट्रैटेजी. छोटा द्वीप, बड़ा कांटा. चीन के हमले को महंगा, कठिन और खतरनाक बनाने वाली असममित रक्षा और मिसाइल‑नौसेना तंत्र के बारे में जानें.

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Taiwan Porcupine Strategy: दुनिया की निगाहें गाजा और रूस‑यूक्रेन पर बटी हो सकती हैं, पर ईस्ट एशिया में भी एक सख्त साजिश चल रही है. चीन के ठीक 112 मील पार बैठा ताइवान किसी सरल आत्मसमर्पण का नाम नहीं है वह अपनी रक्षा के लिए ऐसी रणनीति तैयार कर रहा है जिससे हमला तो किया जा सके, पर जीत इतनी सस्ती न हो कि बीजिंग को फल मिल जाए. इसे ही कहते हैं पॉर्क्यूपाइन स्ट्रैटेजी यानी साही रणनीति और साही की तरह कांटेदार, जो छूने वाले को दर्द दे दे.

Taiwan Porcupine Strategy: पॉर्क्यूपाइन स्ट्रैटेजी क्या है?  

यह रणनीति असममित रक्षा पर आधारित है. इसका मतलब बड़े, सीधे टकराव में दुश्मन को मात देने की जगह उसे इतना महंगा और खूनखराबे‑भरा चुकाना कि वह पीछे हट जाए. यह विचार 2008 में अमेरिकी नौसेना युद्ध कॉलेज के शोध‑प्रोफेसर विलियम एस मरे ने प्रस्तावित किया था और इसे कई सैन्य विशेषज्ञ, जिनमें फिलिप इंग्राम, MBE भी शामिल हैं, ताइवान की मौजूदा नीतियों के साथ जोड़कर देखते हैं. ताइवान की रणनीति का लक्ष्य यह नहीं कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) को सीधे‑सीधे हराया जाए, बल्कि हमला इतना जोखिमपूर्ण और महंगा बना देना है कि बीजिंग निर्णय बदल दे.

पहली ढाल है वायु शक्ति- हवा पर नियंत्रण रखना

ताइवान की वायुसेना उसकी पहली रक्षा है. देश ने अपने F‑16 Viper लड़ाकू विमानों को अपग्रेड किया है, साथ ही स्वदेशी जेट और फ्रांसीसी Mirage 2000 जैसी मशीनें भी हैं. इन विमानों का मकसद है शुरुआती हवाई हमलों को नाकाम करना और हवाई क्षेत्र पर नियंत्रण बनाए रखना क्योंकि हवा अगर बची रहे तो बाकी बचाव की उम्मीद बनी रहती है.

दूसरी ढाल है नौसेना का जाल- समुद्र को घातक बनाना

वायुसेना के साथ ताइवान की नौसेना समुद्री मोर्चे को संभालेगी. लक्ष्य है चीन की नौसेना को ताइवान जलडमरूमध्य में रोकना, समुद्री मार्गों को माइनफील्ड और खतरनाक बनाकर नाकाबंदी को तोड़ना. ताइवान की नौसेना में अमेरिकी युद्धपोत, फ्रिगेट्स और विशेष रूप से Tuo Chiang‑class जैसी तेज, छोटे पर घातक कॉर्वेट्स शामिल हैं छोटे जहाज जो बड़े जहाजों के लिए भयावह परेशानियां खड़ी कर सकते हैं.

तीसरी ढाल है मिसाइल व्यवस्था को दूर से काटना

ताइवान की मिसाइल प्रणालियां इस रणनीति के कांटे हैं पॉर्क्यूपाइन. पॉर्क्यूपाइन एक ऐसा जानवर है जो जिसके शरीर पर कांटे की तरह उसके शरीर तीर के समान बना रहता है. ताइवान इसी जानवर से मदद लेकर अपनी सुरक्षा कर सकता है और ये कांटेदार तीरों को शत्रु के तरफ फेंकता है जिससे हमला भी कर सकता है. लंबी दूरी की मिसाइलें चीन के ठिकानों पर चोट कर सकती हैं जबकि छोटी‑रेंज मिसाइलें संभावित चीनी जहाजों और विमानों को तबाह कर सकती हैं. यही वह दम है जिससे ताइवान हमलावर को दर्द महसूस करा कर उसे पीछे हटने पर मजबूर कर सकता है. 

छोटे, गुप्त और तेज

साही रणनीति (पॉर्क्यूपाइन स्ट्रैटेजी) असममित क्षमताओं पर जोर देती है जिसमें छोटी संख्या में बड़ी नहीं, स्मार्ट, गुप्त, गतिशील और प्रेरित यूनिट्स. इनका उद्देश्य PLA के संचालन केन्द्रों और प्रमुख नोड्स पर प्रहार कर उसके ऑपरेशनल समायोजन को बाधित करना है. ताइवान अपने जलडमरूमध्य के भूगोल का पूरा फायदा उठाकर दुश्मन की गति और आक्रमण योजना को विफल करने की स्थितियां बनाएगा.

रणनीति को तीन परतों में देखा जा सकता है जिसमें बाहरी परत खुफिया और टोही जो आश्चर्य हमले से बचाएगी; बीच का परत जिसमें अमेरिकी एयर सपोर्ट और समुद्री गुरिल्ला युद्ध योजनाएं और भीतरी परत में ताइवान का भूगोल और जनसांख्यिकी जो लैंडिंग और उतराई को मुश्किल बनाएंगे. ये परतें मिलकर किसी भी आक्रमण को जटिल, महंगा और जोखिमपूर्ण बनाती हैं.

चीन की ताकत और ताइवान की चुनौतियां

PLA ने पिछले दशक में हवाई और नौसैनिक नाकाबंदी, साइबर हमले और मिसाइल क्षमताएं बढ़ा ली हैं. अनुमान है कि PLA के पास शुरुआती 25,000 से अधिक सैनिकों की लैंडिंग की क्षमता है और जरूरत पड़ने पर नागरिक जहाजों को तैनात करके यह क्षमता और बढ़ सकती है. फिर भी, ताइवान के छोटे‑छोटे हथियार, मिसाइल‑श्रेणी और जल‑भौगोलिक बाधाएं चीनी ऑपरेशन को आसानी से सफल नहीं होने देंगी.

ताइवान ने 2018 में Overall Defense Concept (ODC) अपनाकर असममित दृष्टिकोण की ओर अपना रुख स्पष्ट किया यानी पारंपरिक बड़े बलों के बजाय वितरण‑आधारित रक्षा. आधिकारिक भाषा में ताइवान कहता है कि वह “युद्ध की इच्छा किए बिना युद्ध की तैयारी कर रहा है” एक स्पष्ट संदेश कि वह संघर्ष से बचना चाहता है लेकिन जीत सस्ती नहीं होने देगा.

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Govind Jee

लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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