60900 MT गैस-डीजल वाला रूसी जहाज बना टाइम बम, यूरोप में फैली दहशत; इटली हो जाएगा बर्बाद!

Updated at : 18 Mar 2026 6:08 PM (IST)
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Russian Oil Tanker Arctic Metagaz Turns ticking time bomb in Mediterranean Warns Italy WWF

ड्रोन हमले में जला रूस का तेल टैंकर. फोटो- एक्स

Russian Oil Tanker Ticking Time Bomb: रूस का जहाज यूरोप के देशों का काल बन गया है. इसमें न तो क्रू मेंबर है और न ही इसे कोई रोकने की कोशिश कर रहा है. इसमें 60000 मीट्रिक टन एलएनजी है और 900 मीट्रिक टन डीजल है. इससे सबसे बड़ा खतरा इटली और माल्टा को है.

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Russian Oil Tanker Ticking Time Bomb: मेडिटेरेनियन सागर में एक बड़ा खतरा मंडरा रहा है. रूस का प्रतिबंधित टैंकर आर्कटिक मेटागाज (Arctic Metagaz) इस समय बिना चालक दल के बेकाबू हालत में समुद्र में बह रहा है. टैंकर के एक हिस्से में बड़ा छेद हो चुका है और इससे भीषण पर्यावरणीय आपदा का खतरा तेजी से बढ़ता जा रहा है. यूरोपीय देशों में इस घटना को लेकर दहशत का माहौल है. इटली समेत यूरोपीय संघ के 9 देशों ने यूरोपीय आयोग को संयुक्त पत्र लिखकर तुरंत कार्रवाई की मांग की है. इटली के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस टैंकर को चलता-फिरता इनवायरमेंटल बम बताया है, जो कभी भी फट सकता है.

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, यह टैंकर रूस के उस शैडो फ्लीट का हिस्सा है, जो पश्चिमी प्रतिबंधों से बचने के लिए गुपचुप तरीके से तेल और गैस की सप्लाई करता है. 277 मीटर लंबा यह जहाज रूस के आर्कटिक पोर्ट मरमांस्क से मिस्र के लिए रवाना हुआ था. लेकिन 3 मार्च को मध्य भूमध्य सागर के अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में, माल्टा से करीब 168 नॉटिकल मील दक्षिण-पूर्व में इस पर समुद्री और हवाई ड्रोन से हमला हुआ. 

लीबिया ने क्रू मेंबर्स को बचाया

जिस समय इस पर हमला हुआ था, उस समय इस पर 30 क्रू मेंबर थे, लेकिन तब से यह जहाज समुद्र में लावारिस और खतरनाक स्थिति में तैर रहा है. चालक दल को लीबिया के कोस्टगार्ड ने सुरक्षित निकाल लिया  और बेंगाजी पहुंचाया. जहाज के ऊपर से ली गई निगरानी फुटेज में यह टैंकर काले धुएं से झुलसा हुआ और एक तरफ झुका हुआ दिखाई दे रहा है. इसके बाएं हिस्से (पोर्ट साइड) में बड़ा छेद हो गया है और आसपास के पानी में संदिग्ध परत जैसी चीज तैरती दिख रही है, जिससे रिसाव की आशंका और बढ़ गई है. 

जहाज पर तबाही का सामान

सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह टैंकर 60,000 मीट्रिक टन से ज्यादा लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) लेकर चल रहा है, यह अभी तक जहाज के ढांचे में मौजूद है. इसके अलावा इसमें करीब 900 मीट्रिक टन डीजल भी मौजूद है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इसमें विस्फोट हुआ या तेल रिसाव हुआ, तो यह पूरे क्षेत्र के समुद्री पर्यावरण को तबाह कर सकता है. यही कारण है कि इसे चलता-फिरता बम माना जा रहा है.

रूस ने हमले का आरोप यूक्रेन पर लगाया था

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इसे आतंकी हमला करार दिया था. रूस ने इसके लिए यूक्रेन को जिम्मेदार ठहराया. हालांकि, यूक्रेन ने इस हमले में अपनी भूमिका को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है. यूक्रेन रूसी जहाजों पर हमला करना वैध लक्ष्य मानता है, क्योंकि उसका मानना है कि इसी रूस इस युद्ध को फंड कर रहा है. 

अभी कहां है यह जहाज

रविवार तक यह जहाज सिसिली के लिनोसा द्वीप से करीब 20 नॉटिकल मील दूर बहता हुआ पाया गया. वहीं, बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, 17 मार्च तक यह टैंकर इटली के समुद्री क्षेत्र से दूर दक्षिण की ओर बहता हुआ लीबिया की दिशा में बढ़ रहा है. लैम्पेडुसा द्वीप के आसपास के समुद्री इलाके पर विशेष नजर रखी जा रही है. इटली और माल्टा के अधिकारी लगातार इसकी गतिविधियों पर निगरानी बनाए हुए हैं. अब सबसे बड़ा खतरा यह है कि जहाज पूरी तरह नियंत्रण खो चुका है और समुद्र में बह रहा है.

इटली ने जहाज को गैस से भरा टाइम बम करार दिया

इटली के काउंसिल ऑफ मिनिस्टर्स के सचिव अल्फ्रेडो मान्टोवानो ने चेतावनी दी है कि इस टैंकर से जुड़ा खतरा बेहद विशाल है और यह किसी भी समय विस्फोट कर सकता है. इटली को डर है कि बदलती हवाओं के कारण यह उनके तट के करीब आ सकता है. इस गंभीर स्थिति को देखते हुए इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने रक्षा, विदेश, ऊर्जा और समुद्री सुरक्षा से जुड़े मंत्रियों के साथ आपात बैठक की.

बैठक में इसे गैस से भरा टाइम बम करार दिया गया और साफ कहा गया कि इसे किसी इटालियन पोर्ट पर लाना सुरक्षित नहीं है. इटली और माल्टा दोनों इस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और टगबोट्स व एंटी-पॉल्यूशन संसाधनों को तैनात कर दिया गया है. पहले लीबिया ने गलती से इस जहाज के डूबने की खबर दे दी थी, लेकिन बाद में माल्टा ने इसे देखा और इटली को सूचना दी. 

अब दोनों देशों ने समुद्र में मौजूद जहाजों को आदेश दिया है कि वे इस खतरनाक टैंकर से कम से कम 5 नॉटिकल मील की दूरी बनाए रखें. माल्टा ने एक विशेष समुद्री बचाव टीम को लगाया है, जो यह तय करेगी कि जहाज को खींचकर किसी बंदरगाह तक लाया जाए या समुद्र में ही डुबो दिया जाए.

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पर्यावरण संगठनों ने जारी किया मैक्सिमम अलर्ट

इस पूरे घटनाक्रम ने पर्यावरण संगठनों की चिंता भी बढ़ा दी है. वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड (WWF) ने मैक्सिमम अलर्ट जारी करते हुए चेतावनी दी है. संगठन के मुताबिक, अगर यह जहाज डूबता है या इसमें रिसाव होता है, तो इससे समुद्र में आग लग सकती है, जहरीले गैस के बादल बन सकते हैं और लंबे समय तक पानी व वातावरण प्रदूषित हो सकता है.

जिस इलाके में यह जहाज बह रहा है, वहां भूमध्य सागर की लगभग सभी संरक्षित समुद्री प्रजातियां पाई जाती हैं. यहां ब्लूफिन टूना और स्वॉर्डफिश जैसी मछलियां भी गुजरती हैं. WWF ने चेताया है कि यह इलाका बेहद संवेदनशील है और यहां किसी भी तरह की दुर्घटना से अपूरणीय पर्यावरणीय नुकसान हो सकता है. अगर ये नहीं रोका गया और इटली और माल्टा के आस-पास यह घटना हुई तो उनके समुद्री किनारे बर्बाद हो सकते हैं. 

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Anant Narayan Shukla

लेखक के बारे में

By Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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