Russia Ukraine War: यूक्रेन को छोड़ रूस के साथ UN में खड़ा हो गया अमेरिका! जेलेंस्की को बड़ा झटका

Edited by Pritish Sahay
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Russia Ukraine War

Russia Ukraine War: संयुक्त राष्ट्र महासभा के मतदान में अमेरिका और रूस ने यूरोप समर्थित यूक्रेनी प्रस्ताव का विरोध किया. अमेरिका के इस कदम से यूएस और यूरोप के संबंधों पर भी प्रभाव पड़ने की आशंका है. वहीं, रूस से हमले से हलकान जेलेंस्की के लिए यह किसी बड़े झटके से कम नहीं है.

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Russia Ukraine War: अमेरिका के एक कदम से यूक्रेन और राष्ट्रपति जेलेंस्की को बड़ा झटका लगा है. संयुक्त राष्ट्र के तीन प्रस्तावों पर मतदान के दौरान अमेरिका रूस के साथ खड़ा नजर आया. यूएन में यूरोपीय संघ और यूक्रेन की ओर से रूस के हमले की निंदा से जुड़ा एक प्रस्ताव पेश किया गया. लेकिन, अमेरिका ने इस प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया. अमेरिका के इस कदम से यूएस और यूरोप के संबंधों पर भी प्रभाव पड़ने की आशंका है, दोनों के रिश्तों में थोड़ी तल्खी भी आई है. इसके अलावा रूस-यूक्रेन युद्ध पर अमेरिका के बदलते रुख ने एक नया संदेह को भी जन्म दे दिया है. इस प्रस्ताव के पक्ष में 93, विपक्ष में 18 और 65 मतों के साथ पारित किया गया.

यूएन में पेश किया गया प्रस्ताव

रूस और यूक्रेन में बीते तीन साल से जारी युद्ध को खत्म करने की मांग करते हुए संयुक्त राष्ट्र में एक प्रस्ताव पेश किया गया. प्रस्ताव में रूस की आक्रामकता की निंदा की गई और रूसी सैनिकों की तत्काल वापसी की मांग की गई. संयुक्त राष्ट्र महासभा में अमेरिका और रूस ने यूरोप समर्थित यूक्रेन के प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया. इसके बाद अमेरिका ने अपने प्रतिस्पर्धी प्रस्ताव पर मतदान से खुद को अलग कर लिया. अमेरिका की इस नीति से यूक्रेन को जोरदार झटका लगा है.

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य देश अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस के पास वीटो की शक्ति है. 15 सदस्यीय परिषद में शून्य के मुकाबले 10 वोट से मतदान हुआ और पांच देश मतदान से दूर रहे. ये सभी यूरोपीय देश थे. अमेरिका का राष्ट्रपति बनने के बाद ट्रंप ने संघर्ष के जल्द से जल्द समाधान के लिए रूस के साथ अचानक बातचीत शुरू की जिससे यूक्रेन के साथ अमेरिका के रिश्ते में तल्खी आई है. यूरोपीय नेता भी इस बात से निराश हैं कि पिछले सप्ताह उन्हें और यूक्रेन को रूस के साथ प्रारंभिक वार्ता से बाहर रखा गया है.

न्यूज एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक मतदान में महासभा ने यूक्रेन को लेकर प्रस्ताव पर 18 के मुकाबले 93 मतों से मंजूरी दी, जबकि 65 सदस्यों ने मतदान नहीं किया. इसके कारण यूक्रेन के लिए समर्थन कम होता दिख रहा है, क्योंकि पिछले मतदान में 140 से अधिक देशों ने रूस के हमले की निंदा की थी और उससे तत्काल सैनिकों की वापसी की मांग की थी. इसके बाद सभा ने रूस और यूक्रेन युद्ध के दौरान हुई आम लोगों की मौत संबंधी अमेरिका के प्रस्ताव को मंजूरी दी. प्रस्ताव में संघर्ष को जल्द खत्म करने और यूक्रेन-रूस के बीच स्थायी शांति की अपील की गई है, हालांकि इसमें रूस की आक्रामकता का कहीं भी जिक्र नहीं किया गया है.

तीन सालों से जारी है युद्ध

बता दें, रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध बीते करीब तीन सालों से जारी है. रूस लगातार यूक्रेन के शहरों पर हमला कर रहा है. यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की अमेरिका सहित यूरोप के कई देशों से मदद की मदद ले रहे हैं. हालांकि अमेरिका में सत्ता परिवर्तन के बाद नये शासक ट्रंप की यूक्रेन-रूस को लेकर नीतियों में थोड़ा बदलाव आया है, जिसकी बानगी मतदान के दौरान भी नजर आई.

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प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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