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ईरान-अमेरिकी जंग से भड़का रूस, कहा- अंतरराष्ट्रीय कानून खत्म, बुलाई P-5 देशों की बैठक

Updated at : 08 Mar 2026 8:58 PM (IST)
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Russia on Iran US war

रूस ने दुहराई P-5 देशों के बैठक की मांग, फोटो- पीटीआई

ईरान पर अमेरिका-इजराइल हमलों और बढ़ते पश्चिम एशिया तनाव के बीच रूस ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून कमजोर पड़ गया है और वैश्विक सुरक्षा को खतरा है. क्रेमलिन ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के प्रस्ताव के तहत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पी-5 देशों यानी रूस, अमेरिका, चीन, फ्रांस, ब्रिटेन की शिखर बैठक बुलाने की मांग दोहराई है.

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Russia on Iran US war: ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमले और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच रूस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. रूस ने कहा है कि मौजूदा समय में अंतरराष्ट्रीय कानून लगभग खत्म हो गया है. दुनिया की सुरक्षा व्यवस्था गंभीर चुनौती का सामना कर रही है. ऐसे बिगड़ते माहौल में रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों यानी पी-5 देशों की शिखर बैठक बुलाने की मांग दोहराई है. क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि मौजूदा दौर में वैश्विक स्थिति इस बात की ओर इशारा करती है कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के उस पुराने प्रस्ताव पर फिर से गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए, जिसमें उन्होंने दुनिया की सुरक्षा और स्थिरता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए पी-5 देशों के शिखर सम्मेलन का आह्वान किया था.

दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि पी-5 देशों की शिखर बैठक बुलाने का प्रस्ताव राष्ट्रपति पुतिन ने कोविड-19 महामारी से पहले रखा था, लेकिन अब पश्चिम एशिया में तेजी से बिगड़ते हालात के कारण इसकी जरूरत और बढ़ गई है. पेस्कोव के मुताबिक क्रेमलिन का मानना है कि रूस, अमेरिका, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे प्रभावशाली देशों को एक साथ बैठकर वैश्विक संकट, बढ़ते सैन्य तनाव और अंतरराष्ट्रीय कानून के कमजोर पड़ते प्रभाव पर गंभीर चर्चा करनी चाहिए. उनका कहना है कि ऐसे समय में बड़े देशों के बीच संवाद और समन्वय ही वैश्विक स्थिरता बनाए रखने का सबसे अहम रास्ता हो सकता है.

हमने खो दी है अंतरराष्ट्रीय कानून नाम की चीज- दिमित्री पेस्कोव

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक पेस्कोव ने सरकारी टीवी चैनल रॉसिया को दिए एक इंटरव्यू में कहा “हम सबने अंतरराष्ट्रीय कानून नाम की चीज खो दी है. मुझे तो यह भी समझ नहीं आता कि किसी से अंतरराष्ट्रीय कानून के नियमों और सिद्धांतों का पालन करने की उम्मीद कैसे की जा सकती है. असल में, अंतरराष्ट्रीय कानून का अस्तित्व ही खत्म हो चुका है”. उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून कानूनी तौर पर मौजूद हैं, लेकिन अब वास्तविक रूप से नहीं हैं. उन्होंने कहा हम किसी को यह नहीं बता सकते कि अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करो, किस कानून का पालन करो? आज कोई भी यह परिभाषित नहीं कर सकता कि वह कानून क्या है.”

रूस ने जताई गंभीर चिंता

अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान पर किए गए हमलों के बाद पश्चिम एशिया में तेजी से बढ़ते तनाव पर रूस ने गंभीर चिंता जताई है. क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि इन हमलों के बाद क्षेत्र की स्थिति काफी अस्थिर हो गई है. उनके मुताबिक पश्चिम एशिया पहले से ही कई क्षेत्रीय संघर्षों और लंबे समय से अनसुलझे मुद्दों से जूझ रहा है, और अब हालिया घटनाओं ने हालात को और जटिल बना दिया है. पेस्कोव ने कहा “यह क्षेत्र काफी हद तक अस्थिर हो गया है और यहां मौजूद कई क्षेत्रीय संघर्षों और अनसुलझे मुद्दों के संचयी प्रभाव के कारण आर्थिक और राजनीतिक, दोनों तरह के परिणाम सामने आ रहे हैं.” उन्होंने संकेत दिया कि मौजूदा परिस्थितियां पूरे क्षेत्र और वैश्विक स्थिरता के लिए चिंता का विषय बन सकती हैं.

अमेरिका को बतानी चाहिए अपनी योजना- रूस

इस बीच रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भी अमेरिका से अपनी रणनीति और योजनाओं को स्पष्ट करने की मांग की है. उन्होंने कहा कि अमेरिका को यह बताना चाहिए कि उसकी व्यापक योजनाएं मौजूदा अंतरराष्ट्रीय नियमों और मानदंडों के साथ किस तरह मेल खाती हैं. एक कार्यक्रम के दौरान लावरोव ने कहा कि हम अक्सर यह समझने और परिभाषित करने की कोशिश करते हैं कि हम किस तरह की दुनिया में रह रहे हैं. हमारा मानना है कि अमेरिका को अपनी योजनाओं के बारे में स्पष्ट रूप से बताना चाहिए और यह भी समझाना चाहिए कि वे पहले से स्थापित अंतरराष्ट्रीय मानदंडों से कैसे संबंधित हैं. (इनपुट भाषा)

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Pritish Sahay

लेखक के बारे में

By Pritish Sahay

12 वर्षों से टीवी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दे रहा हूं. रांची विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग से पढ़ाई की है. राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय विषयों के साथ-साथ विज्ञान और ब्रह्मांड विषयों पर रुचि है. बीते छह वर्षों से प्रभात खबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने के बाद डिजिटल जर्नलिज्म का अनुभव काफी अच्छा रहा है.

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