छुटकू से सेशेल्स के जरिए चीन को मात देगा भारत, हिंद महासागर में ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ की काट ‘नेकलेस ऑफ डायमंड्स’
सेशेल्स में गार्ड ऑफ ऑनर के दौरान पीएम मोदी. फोटो- एक्स.
PM Modi Seychelles Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सेशेल्स यात्रा भारत की हिंद महासागर रणनीति के लिहाज से बेहद अहम है. जानिए कैसे छोटे से द्वीपीय देश सेशेल्स के जरिए भारत चीन की स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स (हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती नौसैनिक मौजूदगी ) रणनीति का जवाब दे रहा है.
India Seychelles PM Modi Vist: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 27 जून को तीन दिवसीय राजकीय यात्रा पर सेशेल्स पहुंचे थे. पीएम मोदी देश के 50वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे. इस दौरान वह सेशेल्स की नेशनल असेंबली को संबोधित करेंगे. भारत और सेशेल्स के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना के 50 वर्ष पूरे हो रहे हैं. लेकिन करीब 11 साल बाद हो रहा भारतीय प्रधानमंत्री का यह दौरा केवल कार्यक्रमों पर फोकस्ड नहीं है. भारत इस छोटे से देश से चीन की रणनीति को विफल कर सकता है. पीएम मोदी की इस यात्रा से हिंद महासागर क्षेत्र में भारत और सेशेल्स के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती मिलेगी.
सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी के विशेष निमंत्रण पर पीएम मोदी 27 से 29 जून तक सेशेल्स में रहेंगे. सेशेल्स पहुंचने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि यह देश भारत का महत्वपूर्ण समुद्री पड़ोसी है और भारत के ‘महासागर विजन’ का अहम साझेदार भी है. इस नीति का उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा, शांति और साझा आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है. माना जा रहा है कि राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के साथ होने वाली बातचीत में समुद्री सुरक्षा, विकास सहयोग, क्षमता निर्माण, ब्लू इकोनॉमी और हिंद महासागर से जुड़े रणनीतिक मुद्दे प्रमुख एजेंडा रहेंगे. समुद्री मार्गों से होने वाली अवैध गतिविधियों और घुसपैठ पर रोक लगाने के उपायों पर भी चर्चा होने की संभावना है.
सेशेल्स में भारत चीन की ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ रणनीति का जवाब
हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती नौसैनिक मौजूदगी को ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ रणनीति कहा जाता है. यह भारत के चारों ओर समुद्री ठिकाने बनाने पर केंद्रित है. इसमें पाकिस्तान का ग्वादर बंदरगाह, श्रीलंका में हंबनटोटा बंदरगाह और अब बांग्लादेश में मोंगला पोर्ट शामिल है. इसका जवाब भारत ने अपने नेकलेस ऑफ डायमंड्स से देने की नीति अपनाई है. इस रणनीति का एक अहम हिस्सा सेशेल्स है, जो अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री साझेदार बन गया है. सेशेल्स हिंद महासागर में एक रणनीतिक स्थान पर स्थित है और भारत इसका इस्तेमाल चीन के समुद्री ठिकानों और गतिविधियों पर नजर रखने के लिए कर रहा है.
सेशेल्स पश्चिमी हिंद महासागर क्षेत्र में फैले 115 छोटे-बड़े द्वीपों का देश है. ये सभी द्वीप एक स्थान पर नहीं हैं, बल्कि समुद्र के विशाल इलाके में बिखरे हुए हैं. यही भौगोलिक स्थिति इसे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों के बीच एक रणनीतिक स्थान प्रदान करती है. इन समुद्री मार्गों के जरिए पूर्वी अफ्रीका, पश्चिमी एशिया, दक्षिण एशिया और पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के बीच आवाजाही होती है.
रोजाना बड़ी संख्या में ऊर्जा संसाधन, खाद्य सामग्री, तैयार उत्पाद और कच्चा माल लेकर जहाज इन रास्तों से गुजरते हैं. ऐसे में इन समुद्री मार्गों की सुरक्षा भारत जैसे देशों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनका अंतरराष्ट्रीय व्यापार काफी हद तक निर्बाध समुद्री परिवहन पर निर्भर करता है.

असम्प्शन द्वीप पर सैन्य ढांचे का विकास
भारत और सेशेल्स के बीच असम्प्शन द्वीप को लेकर एक समझौता हुआ है, जिसके तहत वहां सैन्य बुनियादी ढांचे को विकसित करने की योजना है. यह द्वीप मोजाम्बिक चैनल के पास स्थित है, जहां से हिंद महासागर के पश्चिमी हिस्से में होने वाली समुद्री गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती है.
इसका रणनीतिक महत्व इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि यह भारत को महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों की निगरानी और संचालन क्षमता प्रदान करता है. यह चीन के जिबूती स्थित स्थायी नौसैनिक अड्डे के मुकाबले भारत की समुद्री पहुंच को मजबूत करने में मदद कर सकता है.
असम्प्शन द्वीप पर एयरफील्ड और गहरे समुद्री बंदरगाह जैसी सुविधाएं भारत को लंबी दूरी के समुद्री निगरानी अभियानों में मदद कर सकती हैं. इससे भारतीय नौसेना के पी-8आई पोसाइडन जैसे निगरानी विमानों के जरिए चीनी पनडुब्बियों और जहाजों की गतिविधियों पर नजर रखना आसान हो सकता है.

हिंद महासागर में खुफिया नेटवर्क को मजबूत करना
भारत ने सेशेल्स में तटीय निगरानी रडार सिस्टम स्थापित किए हैं. इन रडार नेटवर्क की मदद से समुद्री क्षेत्र में आने-जाने वाले जहाजों की निगरानी की जाती है. इनसे मिलने वाली जानकारी भारत के इंफॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर-इंडियन ओशन रीजन (IFC-IOR) तक पहुंचती है, जहां समुद्री गतिविधियों का विश्लेषण किया जाता है.
मेडागास्कर और मॉरीशस जैसे देशों में मौजूद निगरानी केंद्रों के साथ मिलकर यह नेटवर्क हिंद महासागर में किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखने की क्षमता बढ़ाता है. इससे चीन के ऐसे जहाजों और दोहरे इस्तेमाल वाले समुद्री संसाधनों की निगरानी आसान होती है, जिनका उपयोग सैन्य उद्देश्यों के लिए भी किया जा सकता है.

समुद्री कूटनीति और सुरक्षा सहयोग
भारत अपनी ‘सागर’ (SAGAR- Security and Growth for All in the Region) नीति के तहत हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा और सहयोग बढ़ाने पर जोर देता है. इस नीति के तहत भारत खुद को क्षेत्र में एक प्रमुख सुरक्षा साझेदार के रूप में स्थापित कर रहा है. भारत सेशेल्स को उसकी विशाल समुद्री सीमा (Exclusive Economic Zone- EEZ) की सुरक्षा के लिए लगातार मदद देता रहा है. इसमें गश्ती नौकाएं, विमान और समुद्री सर्वेक्षण से जुड़ी सहायता शामिल है. इसके अलावा दोनों देशों की नौसेनाएं नियमित रूप से संयुक्त अभ्यास करती हैं, जिससे सेशेल्स की सुरक्षा जरूरतों में भारत की भूमिका मजबूत बनी रहती है.
‘नेकलेस ऑफ डायमंड्स’ रणनीति का विस्तार
सेशेल्स अकेले भारत की समुद्री रणनीति का हिस्सा नहीं है. यह कई अन्य रणनीतिक स्थानों के साथ मिलकर चीन के प्रभाव को संतुलित करने की कोशिश का हिस्सा है.
सेशेल्स का असम्प्शन द्वीप पश्चिमी हिंद महासागर और मोजाम्बिक चैनल के महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों पर नजर रखने में मदद करता है.
वहीं, मॉरीशस का अगालेगा द्वीप दक्षिणी हिंद महासागर क्षेत्र में निगरानी और खुफिया गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में देखा जाता है.
ओमान का दुक्म बंदरगाह भारतीय नौसेना को फारस की खाड़ी के पास जहाजों की मरम्मत और लॉजिस्टिक सहायता की सुविधा देता है.
सिंगापुर का चांगी नौसैनिक अड्डा मलक्का जलडमरूमध्य के पास भारत की रणनीतिक स्थिति को मजबूत करता है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है.
कुल मिलाकर, सेशेल्स भारत की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसके जरिए नई दिल्ली हिंद महासागर में अपनी समुद्री मौजूदगी बढ़ाना और चीन की बढ़ती नौसैनिक गतिविधियों का संतुलन बनाना चाहती है.

सेशेल्स को गिफ्ट किया लेस्पवार गश्ती जहाज
प्रधानमंत्री मोदी सेशेल्स की नेशनल असेंबली को भी संबोधित करने वाले भारत के पहले प्रधानमंत्री होंगे. प्रधानमंत्री ने इसे दोनों देशों के लोकतांत्रिक मूल्यों और संसदीय परंपराओं को दर्शाने वाला ऐतिहासिक अवसर बताया है. अपने कार्यक्रम के दौरान वह सेशेल्स में रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात करेंगे. भारतीय समुदाय को दोनों देशों के बीच मजबूत संबंधों का महत्वपूर्ण सेतु माना जाता है.
अपने दौरे के पहले दिन प्रधानमंत्री मोदी ने सेशेल्स कोस्ट गार्ड बेस का भी दौरा किया. वहां उन्होंने राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी के साथ मिलकर सेशेल्स रक्षा बलों (एसडीएफ) को तेज गश्ती जहाज ‘लेस्पवार’, एस्पॉयर नाम का तेज पेट्रोल बोट, सेशेल्स के सुरक्षा बलों के लिए लिलिपुट गाड़ियां, आधुनिक एम्बुलेंस और कई उपयोगी वाहन सौंपे.
इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में हमेशा सेशेल्स के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहेगा. उन्होंने कहा कि दोनों देश अपनी पुरानी मित्रता को और मजबूत करने के साथ-साथ हिंद महासागर क्षेत्र में सामूहिक समुद्री क्षमताओं को भी लगातार सुदृढ़ बना रहे हैं.
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर भी इस पहल की जानकारी साझा करते हुए कहा कि क्षमता निर्माण की दिशा में उठाया गया यह कदम सेशेल्स की सुरक्षा आवश्यकताओं के प्रति भारत की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है. उनके अनुसार, यह सहयोग दोनों देशों के बढ़ते रक्षा और समुद्री सुरक्षा संबंधों में एक नया मील का पत्थर साबित होगा.
Took part in the handing-over ceremony of the Fast Patrol Vessel Lespwar, ambulances and utility vehicles for SDF at the Seychelles Coast Guard Base with President Dr. Patrick Herminie.@StateHouseSey pic.twitter.com/z7ipBqeyCG
— Narendra Modi (@narendramodi) June 27, 2026
भारतीय नौसेना भी सेशेल्स पहुंची
इस यात्रा के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों की एक टुकड़ी भी सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस परेड में हिस्सा ले रही है. इसके अलावा भारतीय नौसेना के दो आधुनिक युद्धपोत भी समारोह में भाग लेने के लिए सेशेल्स पहुंचे हैं. इसे दोनों देशों के मजबूत रक्षा सहयोग और हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा के प्रति साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री की यह यात्रा फरवरी 2026 में राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी की भारत यात्रा के बाद हो रही है. उस दौरान दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी थी. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि वह राष्ट्रपति हर्मिनी के साथ उस चर्चा को आगे बढ़ाने के लिए उत्सुक हैं, ताकि दोनों देशों के लोगों की प्रगति, समुद्री सुरक्षा और पूरे हिंद महासागर क्षेत्र में समृद्धि को और बढ़ावा दिया जा सके.
साल 2015 के बाद प्रधानमंत्री मोदी का यह पहला सेशेल्स दौरा है. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे समुद्री सुरक्षा, विकास परियोजनाओं, क्षमता निर्माण और ब्लू इकोनॉमी जैसे क्षेत्रों में भारत और सेशेल्स के बीच सहयोग को नई गति मिलेगी. यह वही छोटा सा द्वीपीय देश है, जो भारत को हिंद महासागर में एक प्रभावशाली ताकत बनाने में अहम योगदान देता है. वहीं चीन के खिलाफ भी भारत की ताकत बनकर उभरता है.
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By Anant Narayan Shukla
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