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पाकिस्तान में हड़कंप! यूट्यूबर, पत्रकारों और पूर्व सेना अधिकारियों को उम्रकैद, जानें क्या है मामला

Updated at : 02 Jan 2026 7:22 PM (IST)
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Pakistan May Riots Journalists Youtubers Life Imprisonment

Pak Pm Shahbaz Sharif

Pakistan May Riots: पाकिस्तान में, यूट्यूबर आदिल राजा, पत्रकारों और पूर्व सेना अधिकारियों को 9 मई, 2023 की हिंसा के सिलसिले में हर किसी को दो-दो उम्रकैद की सजा सुनाई गई है. कोर्ट ने उन पर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर हिंसा भड़काने और सरकारी संस्थानों के खिलाफ अपराध करने का आरोप लगाया है. मानवाधिकार समूहों ने अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर चिंता जताई है.

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Pakistan May Riots: पाकिस्तान में मई 9, 2023 को हुई हिंसा ने देश की राजनीति और सेना को हिला दिया था. यह हिंसा तब भड़की जब पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को गिरफ्तार किया गया. हिंसा में सरकारी और सेना के कई प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचा. अब इस्लामाबाद की एंटी-टेररिज्म कोर्ट (ATC) ने इस मामले में कई हाई-प्रोफाइल लोगों को सजा सुनाई है.

Pakistan May Riots in Hindi: ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके हिंसा भड़काई

कोर्ट ने आरोप लगाया कि यूट्यूबर अदील राजा, पत्रकार वजहात सईद खान, सबीर शाकिर, शाहीन सहबाई, एंकर हैदर रजा मेहदी, विश्लेषक मईद पिरजादा और पूर्व सेना अधिकारी अकबर हुसैन ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके हिंसा भड़काई. प्रॉसिक्यूशन ने इसे डिजिटल आतंकवाद करार दिया. रिपोर्ट के अनुसार, ब्रैडफोर्ड रैली में आर्मी चीफ आसिम मुनिर के खिलाफ खतरे ने सेना को परेशान कर दिया और पाकिस्तान ने ब्रिटेन में अपने एंबेसडर को तलब किया. (Pakistan May Riots Journalists Youtubers Life Imprisonment in Hindi)

ट्रायल की प्रक्रिया

कोर्ट ने यह सजा अनुपस्थित अभियुक्तों के खिलाफ ट्रायल के बाद सुनाई. जज ताहिर अब्बास सिपरा ने ट्रायल पूरा होने के बाद फैसला दिया. अदील राजा, वजहात खान, शाहीन सहबाई और हैदर मेहदी के मामले रमना पुलिस स्टेशन में दर्ज थे, जबकि सबीर शाकिर, अकबर हुसैन और मईद पिरजादा के मामले आबपारा पुलिस स्टेशन में थे.

कोर्ट ने सभी को दो-दो जीवन कारावास की सजा सुनाई

कोर्ट ने सभी को दो-दो जीवन कारावास की सजा सुनाई. आरोप थे कि पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध छेड़ने का प्रयास और अपराधी साजिश. इसके अलावा जुर्माने भी लगाए गए. धारा 121-A के तहत 10 साल की कड़ी सजा और 2 लाख रुपये का जुर्माना (साजिश से जुड़े अपराध के लिए). धारा 131 के तहत 10 साल की सजा और 2 लाख रुपये का जुर्माना (विद्रोह भड़काने के लिए) एंटी-टेररिज्म एक्ट, 1997 के तहत तीन अलग-अलग 5 साल की सजा और 2 लाख रुपये का जुर्माना.

कोर्ट ने कहा कि अगर जुर्माना नहीं भरा गया, तो 6 महीने और जेल की सजा बढ़ सकती है. सभी सजा समानांतर रूप से चलेंगी, और जेल में बिताया गया समय सजा से घटाया जाएगा. अभियुक्तों के पास 7 दिनों में इस्लामाबाद हाई कोर्ट में अपील करने का अधिकार है. ट्रायल के दौरान 24 गवाहों को पेश किया गया. राज्य की ओर से राजा नवीद हुसैन कयानी ने पेश किया, जबकि एडवोकेट गुल्फाम अशरफ गोरैया ने बचाव किया. कोर्ट ने कहा कि अभियुक्तों की गिरफ्तारी पुलिस द्वारा उपलब्धता के अनुसार की जाएगी.

अधिकार समूहों की चिंता

अभियोजन 2023 में शुरू हुआ था. शाकिर, पिरज़ादा और हुसैन पर राजद्रोह और आतंकवाद के आरोप थे, जबकि सहबाई, खान, राजा और मेहदी पर विद्रोह भड़काने और सेना पर हमले के लिए उकसाने के आरोप थे. जून 2023 में अमनेस्टी इंटरनेशनल और रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स ने चेतावनी दी थी कि ये केस पत्रकारों और विश्लेषकों के खिलाफ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर दबाव डालते हैं.

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Govind Jee

लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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