Osama Bin Laden : महिला के कपड़े पहन आतंकी ओसामा बिन लादेन भाग गया, अब हुआ बड़ा खुलासा
Published by : Amitabh Kumar Updated At : 25 Oct 2025 8:09 AM
ओसामा बिन लादेन की कहानी (Photo: ANI)
Osama Bin Laden : पूर्व सीआईए अधिकारी जॉन किरियाकू ने बताया कि 2002 में संसद हमले के बाद अमेरिका को भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध का डर था. उन्होंने पाकिस्तान द्वारा आतंकवादी ग्रुपों को समर्थन देने की बात भी कही. जानें ओसामा बिन लादेन को लेकर किरियाकू ने क्या कहा?
India Pakistan Tensions : पूर्व सीआईए अधिकारी जॉन किरियाकू ने बड़ा खुलासा किया है. उन्होंने कहा कि अमेरिका की खुफिया एजेंसियों को 2002 में भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध होने का डर सताने लगा था. यह डर दिसंबर 2001 में संसद हमले और उसके बाद ऑपरेशन पराक्रम के दौरान बढ़ी तनावपूर्ण सैन्य स्थिति के कारण था. ANI को दिए एक खास इंटरव्यू में जॉन किरियाकू ने कहा कि अमेरिका ने खतरे को गंभीरता से लिया और इस वजह से इस्लामाबाद से अमेरिकी परिवारों को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया. किरियाकू ने 9/11 के बाद पाकिस्तान में सीआईए की आतंकवाद रोधी ऑपरेशनों का नेतृत्व किया था.
किरियाकू ने कहा कि ओसामा बिन लादेन एक महिला के भेष में भाग गया था और अमेरिका ने असल में मुशर्रफ को खरीदा था, यहां तक कि आईएसआई को करोड़ों नकद दिए गए. व्हाइट हाउस में उम्मीद थी कि 2001 और 2008 के हमलों के बाद भारत जवाब देगा.
EP-10 with Former CIA Agent & Whistleblower John Kiriakou premieres today at 6 PM IST
— ANI (@ANI) October 24, 2025
“Osama bin Laden escaped disguised as a woman…” John Kiriakou
“The U.S. essentially purchased Musharraf. We paid tens of millions in cash to Pakistan’s ISI…” John Kiriakou
“At the White… pic.twitter.com/pM9uUC3NIC
हम अल-कायदा को लेकर ज्यादा फोकस्ड थे : किरियाकू
किरियाकू ने पुरानी बातों को याद करते हुए कहा, “इस्लामाबाद से अमेरिकी परिवारों को निकाल लिया गया था. हमें लगता था कि भारत और पाकिस्तान युद्ध की कगार पर हैं.” उन्होंने बताया कि डिप्टी सेक्रेटरी ऑफ स्टेट दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच यात्रा करते रहे ताकि दोनों पक्षों को पीछे हटने के लिए समझौता कराया जा सके. उन्होंने बताया कि उस समय वाशिंगटन का ध्यान अल-कायदा और अफगानिस्तान पर था, इसलिए भारत की चिंताओं पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया. किरियाकू ने स्वीकार किया, “हम अल-कायदा को लेकर इतने बिजी और फोकस्ड थे कि भारत के बारे में हमने ज्यादा नहीं सोचा.”
मुंबई हमलों का जिक्र भी किरियाकू ने किया
2008 के मुंबई हमलों पर किरियाकू ने बात की. उन्होंने कहा कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी यह अनुमान लगा रही थी कि हमलों के पीछे पाकिस्तान समर्थित कश्मीरी आतंकवादी समूह थे. उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता कि यह अल-कायदा था. मुझे लगता है कि ये पाकिस्तान समर्थित कश्मीरी ग्रुप थे, और यह सही भी साबित हुआ.” किरियाकू ने बताया कि बड़ी समस्या पाकिस्तान की ओर से थी. उसक स्टैंड क्लियर नहीं था. उन्होंने कहा, “पाकिस्तान भारत में आतंकवाद फैला रहा था, लेकिन किसी ने कुछ नहीं किया.”
किरियाकू ने कहा, “संसद और मुंबई हमलों के बाद भारत ने संयम दिखाया. लेकिन अब भारत उस स्थिति में है कि रणनीतिक धैर्य को कमजोरी समझा जाना वह जोखिम नहीं उठा सकता.” उन्होंने चेतावनी दी कि पाकिस्तान किसी भी पारंपरिक युद्ध में भारत के सामने हार जाएगा. उन्होंने कहा, “इंडियन्स को लगातार उकसाने में कोई लाभ नहीं है. पाकिस्तानी हारेंगे”
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By Amitabh Kumar
अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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