केरल की नर्स निमिषा प्रिया की मौत की सजा रद्द, यमन से आई बड़ी खबर

Published by : Amitabh Kumar Updated At : 29 Jul 2025 6:33 AM

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Indian nurse Nimisha Priya

Nimisha Priya Death Sentence Cancelled : निमिषा प्रिया मामले में बड़ी खबर आई है. मामला 2018 से अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में है. उन पर बिजनेस पार्टनर की हत्या कर शव के टुकड़े करने का आरोप है. मार्च 2018 में उन्हें दोषी ठहराया गया और 2020 में यमनी अदालत ने फांसी की सजा सुनाई. अब निमिषा प्रिया की मौत की सजा रद्द कर दी गई है.

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Nimisha Priya Death Sentence Cancelled : भारतीय नर्स निमिषा प्रिया को यमन में दी गई मौत की सजा अब पूरी तरह रद्द कर दी गई है. यह जानकारी भारत के ग्रैंड मुफ्ती कंथापुरम एपी अबूबकर मुसलियार के कार्यालय की ओर से दी गई. हालांकि, अभी यमन सरकार की ओर से इसकी आधिकारिक लिखित पुष्टि नहीं की गई है. बयान में यह भी बताया गया कि पहले यह सजा स्थगित की गई थी, जिसे अब पूर्ण रूप से समाप्त कर दिया गया है. यह मामला लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में रहा है.

न्यूज एजेंसी ANI के अनुसार, ग्रैंड मुफ्ती के कार्यालय ने बताया कि यमन की राजधानी सना में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान भारतीय नर्स निमिषा प्रिया की मौत की सजा रद्द करने का फैसला लिया गया है. हालांकि यमन सरकार से अब तक इसकी आधिकारिक लिखित पुष्टि नहीं हुई है.

निमिषा प्रिया पर क्या है आरोप

निमिषा प्रिया का मामला 2018 से अंतरराष्ट्रीय चर्चा में है. उन पर बिजनेस पार्टनर की हत्या कर शव के टुकड़े करने का आरोप लगा है. मार्च 2018 में उन्हें दोषी ठहराया गया और 2020 में यमन की अदालत ने फांसी की सजा सुनाई, जिससे यह मामला काफी विवादित बन गया.

यह भी पढ़ें : Nimisha Priya : ब्लडमनी भी नहीं रोक पा रही निमिषा की फांसी, पीड़ित परिवार कर रहा शरिया कानून Qisas की मांग

निमिषा प्रिया का परिवार यमन में

प्रिया का परिवार यमन पहुंचा है. उनकी 13 साल की बेटी मिशेल और पति थॉमस के साथ कुछ और लोग यमन पहुंचे. वे भारतीय ईसाई प्रचारक केए पॉल के साथ मिलकर हौती अधिकारियों से प्रिया की रिहाई की अपील करने गए हैं. न्यूज एजेंसी पीटीआई ने एक वीडियो शेयर किया है. वीडियो में मिशेल को मलयालम और अंग्रेजी में कहते सुना जा सकता है: “आई लव यू मम्मा.”

विदेश मंत्रालय कर रहा था मदद

पिछले हफ्ते, विदेश मंत्रालय ने कहा था कि वह निमिषा प्रिया और उनके परिवार को हर संभव सहायता प्रदान कर रहा है. मंत्रालय ने यह भी बताया कि भारतीय सरकार “मित्र देशों” से संपर्क में है, जो संभवतः इस मामले में मदद कर सकते हैं.

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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