नेपाल: भावी पीएम बालेन शाह की जीत के 8 कारण, ‘रैपर नेता’ की कैसी है इंडिया पॉलिसी?

चुनावों में जीत के बाद बालेन शाह. फोटो- पीटीआई.
Nepal Balen Shah: नेपाल में सत्ता परिवर्तन अब साफ दिख रहा है. पुरानी पार्टियां अब जनता के प्रत्यक्ष वोट द्वारा ही शासन से बाहर कर दी गई हैं और कमान सौंपी गई है बालेन शाह के हाथ. बालेन ने केपी शर्मा ओली को भी 50,000 वोट से हरा दिया है. उनकी इस शानदार जीत के कुछ कारणों पर हम इस लेख में चर्चा कर रहे हैं.
Nepal Balen Shah: नेपाल की राजनीति में इन दिनों 35 वर्षीय नेता बालेन शाह का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है. रैपर से नेता बने बालेन शाह के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) 2026 के आम चुनाव में बड़ी जीत की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है. उन्होंने नेपाल के कई बार के पीएम केपी शर्मा ओली को उन्हीं के घर में 50,000 वोटों से हरा दिया है. शुरुआती रुझानों के अनुसार उनकी पार्टी 165 प्रत्यक्ष सीटों में से 115 से अधिक सीटों पर आगे है या जीत चुकी है. अब बालेन शाह का नेपाल का प्रधानमंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है. यह परिणाम केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि नेपाल की राजनीति में पीढ़ीगत बदलाव और नए राजनीतिक दौर की शुरुआत का संकेत भी माना जा रहा है. उनकी इस शानदार जीत के क्या कारण हैं.
बालेन शाह का परिचय
बालेन शाह का जन्म 1990 में काठमांडू के गैरगाउँ इलाके में हुआ था. उनके पिता राम नारायण शाह आयुर्वेदिक चिकित्सक हैं और उनकी माता ध्रुवदेवी शाह हैं. शाह ने स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है और भारत के कर्नाटक से इस विषय में मास्टर डिग्री हासिल की. राजनीति में आने से पहले वे नेपाल के हिप-हॉप संगीत जगत ‘नेफहॉप’ से जुड़े एक लोकप्रिय रैपर के रूप में जाने जाते थे.
संगीत के अलावा उनकी पहचान एक इंजीनियर, अभिनेता, गीतकार, संगीत निर्माता और कवि के रूप में भी रही है. युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता का एक बड़ा कारण उनका सांस्कृतिक और रचनात्मक व्यक्तित्व भी है. यही कारण है कि पारंपरिक राजनीतिक पृष्ठभूमि न होने के बावजूद वे तेजी से एक लोकप्रिय चेहरा बन गए.
राजनीति में प्रवेश और पहली बड़ी जीत
बालेन शाह पहली बार 2022 में सुर्खियों में आए, जब उन्होंने काठमांडू के मेयर पद का चुनाव लड़ा. उस समय वे एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में उतरे थे और स्थापित राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों को हराकर मेयर बन गए. यह जीत नेपाल की पारंपरिक राजनीति के लिए एक बड़ा झटका मानी गई थी. मेयर बनने के बाद शाह ने राजधानी में कई प्रशासनिक कदम उठाए.
उन्होंने इस दौरान गरीबों के लिए कोटा सिस्टम को ठीक किया. 2022 से 2026 के दौरान मेयर रहते हुए बालेन शाह ने अवैध निर्माण और अतिक्रमण पर कार्रवाई, कचरा प्रबंधन में सुधार, शहर के सौंदर्यीकरण और सड़कों के विस्तार, नगर प्रशासन और कर व्यवस्था में सुधार तथा दब चुकी टुकुचा नदी को फिर से खोजने और बहाल करने जैसे कदम उठाए.
हालांकि कुछ फैसलों को लेकर उन्हें आलोचना का भी सामना करना पड़ा, खासकर फुटपाथ व्यापारियों के खिलाफ कार्रवाई और शहर की सड़कों को खाली कराने के दौरान पुलिस की सख्ती को लेकर मानवाधिकार संगठनों ने सवाल उठाए.

मेयर बालेन भारत के खिलाफ बयानों से और लोकप्रिय हुए
नेपाल में 2015 के ब्लॉकेड के बाद भारत विरोधी भावना बहुत प्रबल हुई. 36 वर्षीय बालेन की राजनीति उस समय ही परिपक्व होना शुरू हुई हो सकती है. 2023 में काठमांडू के मेयर रहते हुए बालेन शाह ने अपने कार्यालय में ‘ग्रेटर नेपाल’ का नक्शा प्रदर्शित किया था. इसे भारत की नई संसद भवन में लगे ‘अखंड भारत’ के चित्र के जवाब के रूप में देखा गया. इस नक्शे में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे भारतीय राज्यों को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया था. यह नेपाल में काफी पसंद किया गया.
इसके अलावा नवंबर 2025 में मेयर रहते हुए बालेन शाह ने फेसबुक पर एक पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने अमेरिका, भारत और चीन सहित कई बड़े देशों के साथ-साथ नेपाल के प्रमुख राजनीतिक दलों- नेपाली कांग्रेस और सीपीएन-यूएमएल की तीखी आलोचना की थी. साथ ही कालापानी और लिपुलेख जैसे सीमा विवादों के मुद्दों पर उन्होंने राष्ट्रवादी रुख अपनाया था.
बालेन शाह ने आदिपुरुष फिल्म की रिलीज होने के बाद उस फिल्म पर बैन लगा दिया था. इस फिल्म में रामायण का जिक्र किया गया था. इसमें माता सीता को भारत की बेटी बताया गया था. इससे नेपाल में भारी नाराजगी देखने को मिली थी. हालांकि, बालने के बैन को काठमांडू हाईकोर्ट ने हटा दिया, तो उन्होंने नेपाल की न्यायपालिका को भारत का गुलाम भी बताया था.
बालेन अपने आक्रमक रुख को लेकर भी चर्चा में रहे. उन्होंने एक बार अपनी पत्नी के लिए पुलिस प्रशासन को धमकाया था. उनकी पत्नी को काठमांडू में ट्रैफिक पुलिस ने रोक लिया था. इस पर बालेन भड़क गए थे. नेपाल की युवा आबादी को उनका अंदाज काफी पसंद आया.

2025 के आंदोलन और बढ़ी लोकप्रियता
नेपाल की राजनीति में बालेन शाह का प्रभाव 2025 के जनआंदोलनों के बाद और बढ़ गया. उस समय सोशल मीडिया पर प्रतिबंध, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और आर्थिक ठहराव के खिलाफ देशभर में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए थे. इन प्रदर्शनों में 77 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें कई प्रदर्शनकारी पुलिस की गोली से मारे गए थे.
इन आंदोलनों के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को सत्ता छोड़नी पड़ी थी. बालेन शाह ने इन प्रदर्शनों का समर्थन किया था और उन्होंने ओली सरकार की तीखी आलोचना भी की थी. इस कारण वे युवाओं के बीच परिवर्तन और विरोध की आवाज के रूप में उभरे. उस समय भी उनके प्रधानमंत्री बनने की चर्चा थी, लेकिन बाद में राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने सुशीला कार्की के नेतृत्व में अंतरिम सरकार का गठन किया.
बालेन की जीत के कारण क्या?
बालेन शाह की सफलता के पीछे कई कारण हैं. पहला, युवाओं का व्यापक समर्थन, जो पारंपरिक राजनीति से निराश हो चुके हैं. दूसरा, भ्रष्टाचार और अस्थिर सरकारों के खिलाफ जनता का गुस्सा. तीसरा, उनकी गैर-पारंपरिक पृष्ठभूमि, जिसने उन्हें आम जनता के बीच एक अलग और ईमानदार नेता की छवि दी. इसे एक-एक कर समझते हैं.
उम्मीदें: जनता की उम्मीदें नेपाल के नागरिक इन चुनावों से व्यापक बदलाव की उम्मीद कर रहे हैं. लोग एक ऐसे ‘नए नेपाल’ की कल्पना कर रहे हैं जहां पारदर्शिता, ईमानदारी और स्थिरता हो. मतदाता चाहते हैं कि 1990 के बाद से सत्ता में रहे नेताओं की संपत्तियों की जांच हो और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं.
रोजगार: रोजगार की चाह युवाओं की सबसे बड़ी मांग देश में रोजगार के अवसर बढ़ाने की है, ताकि काम की तलाश में विदेश जाने वाले युवाओं की संख्या कम हो सके. इसके लिए घरेलू उत्पादन, जलविद्युत परियोजनाओं और बाजार आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की बात की जा रही है. इसके अलावा सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवा, मुफ्त माध्यमिक शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा प्रणाली जैसी मांगें भी प्रमुख हैं. बालेन ने इन सबको भुनाया और अपने चुनाव प्रचार में इसका भरपूर उपयोग किया.
सोशल मीडिया: सोशल मीडिया नेपाल में काफी लोकप्रिय है. आप अंदाजा लगा सकते हैं कि सितंबर 2025 में इस पर लगाए गए बैन ने नेपाल में सरकार पलट दी. इसी सोशल मीडिया पर पर बालेन की मजबूत उपस्थिति ने उन्हें लोकप्रिय बनाया. 2025 के आंदोलन के दौरान उनका सक्रिय रुख भी उनकी लोकप्रियता बढ़ाने में महत्वपूर्ण रहा.
शानदार राजनीतिक गुणा-गणित: बालेन शाह ने क्रिसमस 2025 के दिन रवि लामिछाने और उज्यालो नेपाल पार्टी के नेता कुलमान घिसिंग से मुलाकात की. इन दो पार्टियों के साथ उनकी देश विकास पार्टी ने मिलकर चुनाव लड़ा. यह बालेन के लिए खरा सोना साबित हुआ. बालेन की ही तरह लामिछाने भी नेपाल में काफी लोकप्रिय हैं, वह पूर्व मीडिया कर्मी हैं. वहीं घिसिंग (सुशीला कार्की की अंतरिम सरकार में) मंत्री भी रह चुके हैं.
आरएसपी पर जनता भरोसा: राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी 2022 के चुनाव में चौथे स्थान पर रही थी, लेकिन इस बार पार्टी ने अभूतपूर्व प्रदर्शन किया है. केवल चार साल पुरानी पार्टी इस बार सरकार बनाने जा रही है, इससे यह संकेत मिलता है कि नेपाल के मतदाता पारंपरिक राजनीतिक दलों से निराश होकर नए विकल्पों की तलाश कर रहे हैं. वैसे दोनों- बालेन और रवि ने 2022 में राजनीति की शुरुआत की और चार साल में नेपाल के शीर्ष राजनीति में पहुंचे हैं.
मीडिया से दूरी: बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव प्रचार के दौरान भी उन्होंने मीडिया से दूरी बनाए रखी. मतदान के दिन भी उन्होंने पत्रकारों से बातचीत करने से मना कर दिया और अपने पहचान वाले काले चश्मे के साथ पत्रकारों की भीड़ के बीच से निकल गए. नेपाल के कई मीडिया संगठनों को चिंता है कि अगर वे सत्ता में आते हैं तो उनका यही रवैया आगे भी जारी रह सकता है. वहीं बीबीसी से बात करने वाले कई युवा मतदाताओं का मानना है कि उनकी युवा ऊर्जा ही नेपाल को नई दिशा दे सकती है और वे देश के भविष्य के लिए एक नए दौर की शुरुआत कर सकते हैं.
गठबंधन सरकार से मुक्ति: 2026 का आम चुनाव नेपाल में पुराने राजनीतिक नेतृत्व और नई पीढ़ी के नेताओं के बीच मुकाबले के रूप में देखा गया. पिछले तीन दशकों से नेपाल की राजनीति मुख्य रूप से कुछ बड़े दलों के बीच घूमती रही है और देश में अस्थिर गठबंधन सरकारों का दौर रहा है. 1990 के बाद से नेपाल में 32 बार सरकार बदल चुकी है.
युवा वोट: इस बार चुनाव में लगभग आठ लाख नए युवा मतदाताओं ने पहली बार मतदान किया. इन युवाओं की बड़ी संख्या ने चुनाव परिणामों को प्रभावित किया. वे भ्रष्टाचार से मुक्ति, रोजगार के अवसर और बेहतर शासन की उम्मीद कर रहे हैं. नेपाल युवा राष्ट्र है और देश के युवा इसी आक्रामकता की मांग कर रहे हैं. बालेन की जीत इसी बात का प्रमाण है.

भारत को लेकर बालेन की नीति
भारत को लेकर बालेन शाह का रुख संतुलित लेकिन स्वतंत्र नीति पर आधारित बताया जाता है. उनकी पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) का कहना है कि नेपाल भारत और चीन दोनों के साथ मजबूत संबंध बनाए रखना चाहता है, लेकिन किसी भी देश के सीधे प्रभाव में नहीं रहना चाहता. विशेषज्ञों का मानना है कि शाह का उभार नेपाल की राजनीति में पीढ़ीगत बदलाव का संकेत है, जिसमें पारंपरिक ‘भारत समर्थक’ या ‘चीन समर्थक’ राजनीति की जगह अधिक व्यावहारिक और सम्मानजनक द्विपक्षीय संबंधों की सोच विकसित हो रही है.
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भविष्य में बालेन शाह से क्या उम्मीद?
बालेन शाह का उभार नेपाल की राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत है. बालेन खुद भी यही बात कह चुके हैं. हालांकि, उनका अब तक का कड़ा रुख आने वाले समय में कैसा रहेगा यह आने वाले समय में ही पता चलेगा. यदि वे प्रधानमंत्री बनते हैं, तो वे देश के सबसे युवा नेताओं में से एक होंगे. उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती जनता की उम्मीदों पर खरा उतरना, राजनीतिक स्थिरता बनाए रखना और आर्थिक सुधारों को लागू करना होगी. उन्हें अपने देश के विकास को आगे ले जाने के लिए अपने पड़ोसियों से संबंध को बेहतर बनाने पर भी ध्यान देना होगा.
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लेखक के बारे में
By Anant Narayan Shukla
इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.
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