MQ-9 Drone Afghanistan Crash: अमेरिकी MQ-9 ड्रोन, जिसे अफगानिस्तान में अमेरिका की तीसरी आंख कहा जाता है, 2026 के पहले दिन क्रैश कर गया. यह ड्रोन करीब 2000 किलोमीटर दूर से उड़कर आया था. सवाल उठता है कि क्या तालिबान ने इसे गिराया या कोई तकनीकी खराबी थी? अमेरिकी सेना भले ही 2021 में अफगानिस्तान से निकल गई थी, लेकिन अब भी ओवर-द-हॉराइजन रणनीति के तहत ड्रोन निगरानी और आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन करती है. इस घटना ने अमेरिका के लिए रणनीतिक झटका दिया है.
ड्रोन अमेरिकी आतंकवाद विरोधी अभियानों में बेहद अहम रहा है
MQ-9 रेप्टर, जनरल एटोमिक्स द्वारा बनाया गया, 20 मीटर पंख वाला ड्रोन है. यह 50,000 फीट की ऊंचाई तक उड़ सकता है और 27 घंटे से ज्यादा लगातार उड़ान भर सकता है. हेलफायर मिसाइल से लैस यह ड्रोन अमेरिकी आतंकवाद विरोधी अभियानों में बेहद अहम रहा है. इसका हर यूनिट 30 मिलियन डॉलर से ज्यादा का है, जिसमें ग्राउंड कंट्रोल सिस्टम शामिल है. ड्रोन को सैटेलाइट लिंक से रिमोटली ऑपरेट किया जाता है, जिससे पायलटों को खतरा नहीं होता. अल उदीद एयर बेस, कतर से यह ड्रोन दुनिया के किसी भी हिस्से में ऑपरेशन कर सकता है.
MQ-9 Drone Afghanistan Crash in Hindi: तकनीकी खराबी या नियंत्रण की दिक्कत?
रिपोर्ट्स के अनुसार, ड्रोन एक सामान्य मिशन पर था और क्रैश का कारण तकनीकी खराबी या कंट्रोल लिंक खो जाना हो सकता है. मैदान वर्दक प्रांत में पहले भी लड़ाकू गतिविधियां होती रही हैं, लेकिन तालिबान के नियंत्रण में सुरक्षा का परिदृश्य बदल गया है. अब तक किसी संगठन ने इस क्रैश की जिम्मेदारी नहीं ली. यह अलग है उन मामलों से, जैसे यमन में हूती विद्रोहियों ने MQ-9 को सतह से हवा में मारने वाली मिसाइल से गिराया था.
🚨 BREAKING: A US MQ-9 Reaper drone CRASHED in the rugged mountains of Maidan-Wardak province, Afghanistan, early Jan 1, 2026. Local sources report the incident, with photos & videos.
— Sangar Paykhar – سنګر پیکار (@paykhar) January 1, 2026
The MQ-9's operational radius is ~600 NM. Distance to Al Udeid (Qatar) is over 1000 NM—too far… pic.twitter.com/9wQTNsFtqn
MQ-9 ड्रोन का इतिहास
इतिहास में MQ-9 रेप्टर कई बार दुर्घटनाग्रस्त हो चुका है. 2025 में दक्षिण कोरिया के तट और भूमध्य सागर में हादसे हुए. अफ्रीका और मध्य पूर्व में इंजन की खराबी इसकी वजह बनी. अमेरिकी वायु सेना के पास 200 से ज्यादा रेप्टर हैं और लगातार उत्पादन व अपग्रेड जारी हैं, इसलिए नुकसान को पूरा किया जा सकता है.
ऑपरेशन का तरीका और क्रैश साइट
रिपोर्ट्स के अनुसार ड्रोन अल उदीद एयर बेस, कतर से ऑपरेट किया जा रहा था, जो क्रैश साइट से करीब 2000 किलोमीटर दूर है. कुछ अटकलें हैं कि ड्रोन पाकिस्तान से भी ऑपरेट हो सकता था. मैदान शहर के पास क्रैश साइट रणनीतिक रूप से संवेदनशील है. स्थानीय अधिकारी मलबा इकट्ठा कर सकते हैं, जिससे अमेरिकी तकनीक की सुरक्षा मुश्किल हो सकती है. पहले के प्रोटोकॉल के तहत तकनीक को सुरक्षित रखने के लिए स्व-विनाश तंत्र या फॉलो-अप स्ट्राइक किए जाते थे, लेकिन अब अमेरिकी मौजूदगी कम होने की वजह से यह स्पष्ट नहीं है. अनमैन्ड ऑपरेशन में कई चुनौतियां होती हैं. सैटेलाइट कम्युनिकेशन में देरी, पर्यावरणीय कारक और डेटा लिंक की सुरक्षा ड्रोन ऑपरेशन को प्रभावित कर सकते हैं. हालांकि, इस क्रैश में इलेक्ट्रॉनिक हस्तक्षेप का कोई सबूत नहीं मिला है.
क्षेत्रीय प्रभाव और अमेरिकी निगरानी
तालिबान के अफगानिस्तान में विदेशी उड़ानें सीमित हैं, ज्यादातर मानवीय कारणों से. अमेरिकी ड्रोन ऑपरेशन अब भी जारी हैं, खासकर आईएस-खोरासान जैसे समूहों पर नजर रखने के लिए. विशेषज्ञों के अनुसार, रेप्टर ड्रोन के नुकसान हाल के वर्षों में बढ़े हैं क्योंकि विरोधियों की एयर डिफेंस क्षमता बेहतर हो गई है. अमेरिकी रिपोर्ट्स में तकनीकी कारणों को मुख्य माना गया है, लेकिन 2024-25 में कई ड्रोन दुश्मन की आग से भी गिराए गए थे.
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