कौन हैं मोहम्मद बागेर जोल्गाद्र? लारीजानी की मौत के बाद ईरान ने इन्हें बनाया SNSC चीफ
Published by : Govind Jee Updated At : 25 Mar 2026 3:58 PM
तस्वीर में ईरान के SNSC के नए चीफ मोहम्मद बागेर जोल्गाद्र.
Mohammad Bagher Zolghadr: ईरान-इजरायल जंग के बीच तेहरान में बड़ा सत्ता परिवर्तन हुआ है. अली लारीजानी की मौत के बाद अब कट्टरपंथी जनरल मोहम्मद बागेर जोल्गाद्र को देश की सबसे पावरफुल सिक्योरिटी काउंसिल की कमान मिली है.
Mohammad Bagher Zolghadr: ईरान ने अपने सबसे ताकतवर सुरक्षा संस्थान ‘सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल’ (SNSC) के नए चीफ का ऐलान कर दिया है. सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (SNSC) ईरान की वह सबसे ताकतवर संस्था है, जो देश की रक्षा, परमाणु कार्यक्रम और विदेश नीति से जुड़े सभी बड़े और संवेदनशील फैसले लेती है.
अमेरिका और इजरायल के हवाई हमले में अली लारीजानी की मौत के बाद, अब इसकी कमान IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) के दिग्गज मोहम्मद बागेर जोल्गाद्र को सौंपी गई है. जोल्गाद्र की गिनती ईरान के उन चेहरों में होती है जिनका सेना और राजनीति, दोनों जगह दबदबा है.
कौन हैं जोल्गाद्र और क्यों हैं इतने खास?
72 साल के मोहम्मद बागेर जोल्गाद्र IRGC में ब्रिगेडियर जनरल रह चुके हैं. एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक, स्टेट टेलीविजन ने उनके नाम पर मुहर लगा दी है. जोल्गाद्र का करियर दशकों पुराना है; उन्होंने 1980 के ईरान-इराक युद्ध में हिस्सा लिया और 8 साल तक IRGC के जॉइंट स्टाफ के हेड रहे. इसके अलावा वह 8 साल तक डिप्टी कमांडर-इन-चीफ की पोजिशन पर भी रहे. 2023 से वे ‘एक्सपीडिएंसी काउंसिल’ के सेक्रेटरी के तौर पर काम कर रहे थे, जो ईरान के बड़े फैसलों में मध्यस्थता करती है.
लारीजानी की मौत के बाद बदली ईरान की पावर
ईरान के बड़े नेता अली लारीजानी (67 वर्ष) की मौत 18 मार्च को एक हमले में हुई थी. ब्लूमबर्ग ने तसनीम न्यूज एजेंसी के हवाले से बताया कि लारीजानी अपने बेटे मुर्तजा के साथ तेहरान के बाहरी इलाके परदीस में अपनी बेटी से मिलने गए थे, तभी उन पर हमला हुआ. लारीजानी ईरान के संकट प्रबंधन और सुरक्षा मामलों के सबसे बड़े चेहरे थे. अब उनकी जगह जोल्गाद्र के आने से ईरान की सुरक्षा और विदेश नीति पर IRGC की पकड़ और मजबूत हो गई है.
पढ़ाई का बढ़िया बैकग्राउंड
जोल्गाद्र का जन्म 1954 में फसा (शिराज के पास) में हुआ था. उन्होंने तेहरान यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन किया है. उनका परिवार भी काफी रसूख वाला है. उनकी पत्नी सिद्दीकी बेगम हिजाजी ‘ऑफिस ऑफ वुमन एंड फैमिली अफेयर्स’ की डायरेक्टर जनरल रही हैं. वहीं, उनके दामाद काजिम गरीबाबादी इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) में ईरान के दूत रह चुके हैं. जोल्गाद्र ने ‘द टेल ऑफ वेस्टर्न एस्ट्रेंजमेंट’ नाम की किताब भी लिखी है, जिसमें पश्चिमी संस्कृति की आलोचना की गई है.
विवादों और बड़े पदों से रहा है नाता
लाइवमिंट की रिपोर्ट के अनुसार, 1979 की क्रांति से पहले जोल्गाद्र ‘मंसूरन’ नाम के एक उग्रवादी संगठन से जुड़े थे. उन पर 1978 में एक अमेरिकी इंजीनियर की हत्या में शामिल होने के आरोप भी लगे थे, हालांकि इनकी पुष्टि नहीं हुई है. जोल्गाद्र 2005 में अहमदिनेजाद सरकार के दौरान डिप्टी इंटीरियर मिनिस्टर और 2012 में जुडिशियरी के डिप्टी चीफ भी रहे. अब SNSC के हेड के तौर पर, अमेरिका के साथ किसी भी बातचीत या परमाणु रणनीति पर आखिरी फैसला जोल्गाद्र की मंजूरी के बिना मुमकिन नहीं होगा.
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28 फरवरी से जारी है यह युद्ध
मिडल ईस्ट में तनाव अपने चरम पर है. 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल के हमले में ईरान के 86 वर्षीय सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद हालात और बिगड़ गए हैं. रॉयटर्स और फार्स न्यूज के मुताबिक, ईरान ने इसके जवाब में कई खाड़ी देशों में अमेरिकी संपत्तियों को निशाना बनाया है. 25 मार्च तक युद्ध जारी है, हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जंग खत्म करने के लिए 15 पॉइंट्स का पीस प्लान तैयार किए हैं.
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लेखक के बारे में
By Govind Jee
गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.
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