बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों पर हमले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. ताजा मामला सिलहट जिले के गोवाइनघाट उपजिला का है, जहां एक हिंदू शिक्षक के घर को आग के हवाले कर दिया गया. यह घर शिक्षक बिरेन्द्र कुमार दे का है, जिन्हें इलाके में ‘झुनू सर’ के नाम से जाना जाता है.
घटना के बाद परिवार और स्थानीय हिंदू समुदाय में डर का माहौल है. लोगों का कहना है कि ऐसे हमले अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करते हैं. स्थानीय लोगों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है.
आग की घटना का वीडियो सामने आया
इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें देखा जा सकता है कि आग तेजी से पूरे घर में फैल रही है. वीडियो में परिवार के लोग जान बचाने के लिए घर से बाहर निकलने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं. राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी के घायल होने की तत्काल कोई सूचना नहीं है. फिलहाल यह साफ नहीं हो पाया है कि आग किसने और कैसे लगाई. आरोपियों की पहचान भी अभी नहीं हो सकी है.
🚨Hindu home comes under attack again!
— Salah Uddin Shoaib Choudhury (@salah_shoaib) January 15, 2026
Islamists have once again set fire at the home of Birendra Kumar Dey alias "Jhunu Sir" (a teacher by profession) in Bahor village of Nandirgaon union in Gowainghat upazila of Sylhet district in Bangladesh. pic.twitter.com/MZRvHBuWpT
हिंदू परिवारों के घरों पर लगातार हमले
यह घटना ऐसे समय सामने आई है, जब हाल के हफ्तों में बांग्लादेश में हिंदू परिवारों के घरों को निशाना बनाए जाने की कई घटनाएं सामने आई हैं.
एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, 28 दिसंबर को पीरोजपुर जिले के दुमरीतला गांव में एक हिंदू परिवार के घर में आग लगा दी गई थी. यह घटना 18 दिसंबर को मयमनसिंह में 29 वर्षीय गारमेंट वर्कर दीपु चंद्र दास की कथित तौर पर भीड़ द्वारा हत्या और शव जलाने की घटना के एक हफ्ते बाद हुई थी. दीपु पर कथित रूप से ईशनिंदा के आरोप लगाए गए थे.
पांच दिनों में अल्पसंख्यकों पर छठी आगजनी की घटना
इससे पहले, 23 दिसंबर को टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, चटगांव के राउजान इलाके में दो प्रवासी हिंदू परिवारों के घरों में आग लगा दी गई थी. आरोप है कि हमलावरों ने घरों के बाहर से दरवाजे बंद कर दिए थे. इस घटना में करीब आठ लोग बाल-बाल बचे. यह इलाका सिर्फ पांच दिनों में अल्पसंख्यकों पर छठी आगजनी की घटना का गवाह बना था.
पीड़ितों ने बताया कि वे धुएं से जागे, लेकिन बाहर निकल नहीं सके क्योंकि दरवाजे बाहर से बंद थे. एक पीड़ित ने कहा है कि हमने टीन की छत और बांस की बाड़ काटकर किसी तरह जान बचाई. यह घटना रात करीब 3:15 से 4 बजे के बीच सुल्तानपुर गांव में हुई थी. लगातार हो रही इन घटनाओं ने बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ा दी है.
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