Kalawa Raksha Sutra : शिक्षक ने हिंदू विद्यार्थी की कलाई से कलावा काटा, मचा बवाल

Edited by Amitabh Kumar
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दक्षिण अफ्रीकी हिंदू महासभा का लोगो

Kalawa Raksha Sutra : दक्षिण अफ्रीका में शिक्षक ने हिंदू विद्यार्थी की कलाई से कलावा काटा. इसके बाद समुदाय ने कार्रवाई की मांग की है. जानें पूरा मामला.

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Kalawa Raksha Sutra : दक्षिण अफ्रीका में एक शिक्षक ने कथित तौर पर एक हिंदू विद्यार्थी की कलाई से कलावा काट दिया. इसके बाद से बवाल मचा हुआ है. हिंदू समुदाय ने इसे असंवेदनशील और गैरजिम्मेदाराना करार दिया है. घटना क्वाजुलु-नताल प्रांत के ड्रेकेंसबर्ग सेकेंडरी स्कूल में हुई. घटना कुछ दिन पहले हुई, लेकिन हिंदू समुदाय में रोष अबतक है. दक्षिण अफ्रीकी हिंदू महासभा (एसएएचएमएस) ने शिक्षक द्वारा हिंदू छात्रा की कलाई से कथित तौर पर पवित्र कलावा काटे जाने के बाद शिक्षा अधिकारियों से कार्रवाई की मांग की है.

शिक्षक का दावा था कि स्कूल सांस्कृतिक या धार्मिक प्रतीकों को पहनने की अनुमति नहीं देता है. हिंदू महासभा ने एक प्रेस बयान जारी किया है. इसमें कहा गया है कि एक शिक्षक द्वारा हिंदू छात्रा का कलावा काटने की हम निंदा करते हैं. यह काम असंवेदनशील और गैरजिम्मेदाराना है. इसके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए. संगठन की मांग पर क्या कार्रवाई की गई, इस संबंध में जानकारी अबतक सामने नहीं आई है. दक्षिण अफ्रीका की इस घटना को लेकर कुछ सोशल मीडिया यूजर रिएक्ट भी कर रहे हैं.

कलावे का धार्मिक महत्व क्या है?

हिंदू धर्म में कलावे को रक्षा सूत्र के रूप में लोग बांधते हैं. धर्म में ऐसी मान्यता है कि किसी भी पूजा के बाद कलावा बांधने से ईश्वर की पूर्ण कृपा और आशीर्वाद प्राप्त होता है. वहीं, कलावे का लाल रंग पॉजिटिव एनर्जी देता है. यही वजह है कि कलावा के रूप में बांधा जाने वाला लाल धागा शरीर और मस्तिष्क के लिए हमेशा अच्छा माना जाता है.

कलावा बांधने के नियम क्या हैं?

शास्त्रों में यह भी जानकारी दी गई है कि किस हाथ में कलावा बांधना शुभ होता है. पुरुषों और कुंवारी लड़कियों के दाहिने हाथ में कलावा बांधने को शुभ माना जाता है. वहीं, विवाहित महिलाओं का बांए हाथ में कलावा बांधने की बात कही गई है.

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Amitabh Kumar

लेखक के बारे में

By Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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