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Peace Deal: इजरायल और यूएई में हुआ ऐतिहासिक समझौता, 72 साल बाद हुई इस दोस्ती के मायने क्या हैं?

Updated at : 14 Aug 2020 12:47 PM (IST)
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Peace Deal: इजरायल और यूएई में हुआ ऐतिहासिक समझौता, 72 साल बाद हुई इस दोस्ती के मायने क्या हैं?

Israel And UAE, Israel And UAE peace deal: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ट्वीट किया जिसके बाद दुनिया को पता चला कि इजरायल और यूएई ने वर्षों से चली आ रही दुश्मनी को भुलाकर ऐतिहासिक शांति समझौते पर हस्ताक्षर कर दिया है. उन्होंने दोनों देशों के समझौते को 'ऐतिहासिक' बताया और कहा कि 'यह शांति की दिशा में एक बड़ी सफलता है. डोनाल्ड ट्रंप ने ट्वीट किया, बड़ी सफलता! हमारे दो अच्छे दोस्तों, इजराइल और संयुक्त अरब अमीरात के बीच ऐतिहासिक शांति समझौता!'.

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Israel And UAE, Israel And UAE peace deal: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ट्वीट किया जिसके बाद दुनिया को पता चला कि इजरायल और यूएई ने वर्षों से चली आ रही दुश्मनी को भुलाकर ऐतिहासिक शांति समझौते पर हस्ताक्षर कर दिया है. उन्होंने दोनों देशों के समझौते को ‘ऐतिहासिक’ बताया और कहा कि ‘यह शांति की दिशा में एक बड़ी सफलता है. डोनाल्ड ट्रंप ने ट्वीट किया, बड़ी सफलता! हमारे दो अच्छे दोस्तों, इजराइल और संयुक्त अरब अमीरात के बीच ऐतिहासिक शांति समझौता!’.

उन्होंने इजराइल, यूएई और अमेरिका का संयुक्त बयान भी ट्विटर पर शेयर किया है. तीनों देशों का कहना है कि इससे पश्चिम एशिया क्षेत्र में शांति लाने में मदद मिलेगी. इसके अलावा उन्होंने कहा, ‘‘अब जब शुरुआत हो गई है, मैं उम्मीद करता हूं कि और अरब और मुस्लिम देश संयुक्त अरब अमीरात को फॉलो करेंगे.’ इसके साथ ही इसराइल ने वेस्ट बैंक में अपने कब्ज़े वाले हिस्सों की विवादास्पद योजनाओं को निलंबित करने पर सहमति जाहिर की है.

अमेरिका, इजराइल और यूएई के संयुक्त बयान में कहा गया है कि राष्ट्रपति ट्रंप, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान, अबू धाबी के क्राउन प्रिंस और यूएई सशस्त्र बलों के उप सुप्रीम कमांडर ने गुरुवार को बात की और इजरायल और यूएई के बीच संबंधों के पूर्ण रूप से सामान्य बनाने सहमति जताई.


व्हाइट हाउस में होगा हस्ताक्षर समारोह

बता दें कि 1948 में इसराइल बनने के बाद से यह सिर्फ़ तीसरा इजरायल-अरब शांति समझौता है. इससे पहले मिस्र ने 1979 में और जॉर्डन ने 1994 में एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अब जब ‘बर्फ’ पिघल ही गई है तो मुझे उम्मीद है कि कुछ और अरब-मुस्लिम देश संयुक्त अरब अमीरात का अनुसरण करेंगे. उन्होंने बताया कि आने वाले हफ्ते में व्हाइट हाउस में इसके लिए एक हस्ताक्षर समारोह रखा जाएगा.

फिलस्तीनी नेता हैरान

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस समझौते से फिलस्तीनी नेता कथित तौर पर हैरान हैं. राष्ट्रपति महमूद अब्बास के एक प्रवक्ता ने कहा कि यह सौदा ‘राजद्रोह’ से कम नहीं है और संयुक्त अरब अमीरात में मौजूद फिलस्तीनी राजदूत को वापस बुलाया गया है. बीबीसी के मुताबिक, फिलस्तीन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने हनान अशरावी ने इस डील की यह कहते हुए निंदा की है कि ‘यूएई इजरायल के साथ अपने गुप्त संबंधों और सौदों पर अब खुलकर सामने आ गया है’ उन्होंने प्रिंस मोहम्मद को कहा: “तुम्हारे ये ‘दोस्त’ बस कहीं तुम्हें बेच ना दें.

ट्रंप को होगा फायदा

व्हाइट हाउस ने इसकी घोषणा पहले की और अब यह समझा जा रहा है कि यह राष्ट्रपति ट्रंप की मामूली ही सही, पर एक राजनयिक जीत है, वो भी ऐसे समय में जब उनके लिए आगामी राष्ट्रपति चुनाव बहुत आसान नहीं दिख रहा. विश्लेषकों का विचार है कि इस समझौते का मतलब राष्ट्रपति ट्रंप के लिए ‘एक विदेश नीति की जीत’ हो सकता है, जो नवंबर में फिर से चुनाव में उतरने वाले हैं और प्रधानमंत्री नेतन्याहू को व्यक्तिगत रूप से बढ़ावा देंगे, जो कथित भ्रष्टाचार के मामले में मुक़दमे का सामना कर रहे हैं. बता दें कि कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ अपनी रणनीति के लिए ये दोनों नेता आलोचनाओं का सामना कर रहे हैं और इनकी साख खराब हुई है.

भारत के लिए खुशखबरी

विशेषज्ञों का कहना है कि इजरायल और यूएई का समझौता न केवल ईरान और चीन की दोस्‍ती का जवाब है, बल्कि भारत के लिए भी बड़ी खुशखबरी है. माना जा रहा है कि इजरायल और यूएई ने ईरान के बढ़ते खतरे को देखते हुए साथ आने का फैसला किया है. ईरान और चीन के बीच बड़ी डील हुई है. चीन और ईरान के इस गठजोड़ का जवाब देने के लिए यूएई ने इजरायल से हाथ‍ मिलाया है. इजरायल की अब यूएई और सऊदी अरब को काफी जरूरत पड़ रही है. यूएई और सऊदी अरब की पाकिस्‍तान से दूरी बढ़ रही है.

इसी कारण से यूएई को फिलस्‍तीन का साथ छोड़कर इजरायल के साथ होना पड़ा है. बता दें कि भारत के अरब देशों और इजरायल दोनों ही देशों से अच्‍छे संबंध है. भारत का ज्‍यादातर तेल अरब से ही आता है. भारत चाहता है कि सऊदी अरब और यूएई में शांति रहे. मौजूदा परिस्थिति के बाद अगर सऊदी अरब से पाकिस्‍तान से हटता है तो यह भारत के लिए खुशखबरी है. इससे भारत को आर्थिक और रणनीतिक दोनों ही फायदा होगा.

Posted By: Utpal kant

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