ईरानी राष्ट्रपति का प्रस्ताव: ‘मिडिल ईस्ट इस्लामिक सभा’ बनानी होगी, पड़ोसी मुल्कों से बोले- दुश्मन की चाल….

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ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान. फोटो- एक्स.

Iran Proposes Islamic Assembly of the Middle East: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने बाहरी ताकतों से मुकाबला करने के लिए मिडिल ईस्ट इस्लामिक असेंबली बनाने का प्रस्ताव रखा है. उन्होंने पड़ोसी देशों दुश्मन के जाल में न फंसने की अपील की है. मिडिल ईस्ट में युद्ध के हालात में ईरान ने अपने पड़ोसी देशों पर भी काफी हमले किए हैं. मसूद ने इसके लिए भी माफी मांगी है.

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Iran Proposes Islamic Assembly of the Middle East: 28 फरवरी से युद्ध में उलझे ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने शनिवार को कहा कि उनका देश इस्लामी देशों के साथ किसी भी तरह के टकराव का इच्छुक नहीं है.  उन्होंने नवरोज और ईद-उल-फितर के अवसर पर अपना भाषण दिया. उस दौरान उन्होंने अमेरिका-इजरायल के हमलों के बाद ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या पर शोक भी व्यक्त किया. उन्होंने क्षेत्र में बाहरी ताकतों की मौजूदगी की जरूरत को खारिज करते हुए ‘मिडिल ईस्ट इस्लामिक असेंबली’ बनाने का प्रस्ताव रखा और कहा कि क्षेत्रीय देशों को ‘दुश्मनों द्वारा बिछाए गए जाल में नहीं फंसना चाहिए’.

अपने संदेश में राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने कहा कि ईरान क्षेत्र में अशांति नहीं चाहता और न ही वह किसी अन्य देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने का इरादा रखता है. उन्होंने पड़ोसी देशों से मतभेद भुलाकर साथ आने की अपील की और इजरायल पर ‘अशांति, अस्थिरता, नरसंहार, आतंकवाद और तोड़फोड़’ के लिए जिम्मेदार होने का आरोप लगाया. यह बयान श्रीलंका स्थित ईरानी दूतावास की ओर से जारी किया गया. इसमें आगे कहा गया कि क्षेत्र के देशों को चाहिए कि वे मीडिया के जरिए ईरान को अस्थिरता का कारण बताने के बजाय असली जिम्मेदार को पहचानें, जो कि इजरायल है.

पड़ोसी देशों से की अपील

उन्होंने कहा, ‘हम दुनिया को स्पष्ट करना चाहते हैं कि हम क्षेत्र में अशांति नहीं चाहते. हम नहीं चाहते कि कोई देश अपनी सुरक्षा के लिए हथियारों का भंडार बढ़ाने को मजबूर हो और हर समय हमले के डर में जीए. हम किसी भी देश के आंतरिक मामलों में दखल देने के बारे में नहीं सोच रहे हैं और क्षेत्र की शांति व स्थिरता को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहते.’

राष्ट्रपति ने यह भी दोहराया कि ईरान अन्य मुस्लिम देशों के साथ किसी संघर्ष की नीति नहीं अपना रहा है और सभी इस्लामी देश उसके ‘भाई’ हैं. उन्होंने कहा, ‘हम मुस्लिम देशों के साथ युद्ध नहीं चाहते. हमारे बीच जो भी विभाजन है, वह एक ऐसे दुश्मन की साजिश है जो मुसलमानों के बीच फूट डालना चाहता है.’

ईरान में हुई मौतों पर दी श्रद्धांजलि

पेजेश्कियान ने रमजान के पवित्र महीने के दौरान ईरान के सर्वोच्च नेता, सैन्य कमांडरों, मंत्रियों और आम नागरिकों की मौत का जिक्र किया, जिसमें मिनाब के एक प्राथमिक स्कूल पर हमले का भी उल्लेख किया गया. ईरान में अब तक आईआरजीसी के कमांडर मोहम्मद पाकपुर, रक्षा मंत्री अमीर नासिरजादेह नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारिजानी, खुफिया मंत्री इस्माइल खतीब और अर्धसैनिक बल बासिज के प्रमुख गुलामरेजा सुलेमानी भी मारे जा चुके हैं. वहीं 28 फरवरी को हुए हमले में स्कूल में एक साथ 160 से ज्यादा लड़कियों की मौत हो गई थी. 

‘नफरत छोड़कर मुश्किलों का सामना मिलकर करना होगा’

राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने राष्ट्रीय एकता और एकजुटता की अपील करते हुए कहा, ‘हमें अपने सभी मतभेद और शिकायतें भुलानी होंगी. इस साल पहले से कहीं ज्यादा हमें ऐसा नवरोज चाहिए जो एकता और राष्ट्रीय एकजुटता का प्रतीक हो. हमें नफरत छोड़कर मुश्किलों का सामना मिलकर करना होगा ताकि ईरान इन संकटों के बीच मजबूती से खड़ा रह सके. ईद-उल-फितर आत्मशुद्धि का पर्व है.’

अपने संदेश में उन्होंने पड़ोसी देशों को भाई बताते हुए कहा कि ईरान सभी विवादों को बातचीत के जरिए सुलझाने के लिए तैयार है. उन्होंने क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए इस्लामी देशों के बीच एक साझा सुरक्षा ढांचे के गठन का भी सुझाव दिया. उन्होंने कहा, ‘हमारे प्रिय पड़ोसी देश हमारे भाई हैं. अगर हमारे संबंधों में कोई गलतफहमी या नुकसान हुआ है, तो हम उम्मीद करते हैं कि वह दूर हो. हम सभी मुद्दों को सुलझाने के लिए तैयार हैं. क्षेत्र में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए मध्य पूर्व के देशों के बीच एक इस्लामी सुरक्षा ढांचा बनाना जरूरी है.’

‘इस्लामिक असेंबली ऑफ द मिडिल ईस्ट’ बना सकते हैं

उन्होंने आगे कहा, ‘क्षेत्र में बाहरी ताकतों की कोई जरूरत नहीं है. हम मिलकर ‘इस्लामिक असेंबली ऑफ द मिडिल ईस्ट’ बना सकते हैं, जो सुरक्षा, आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक सहयोग को मजबूत करेगी. हमें आपस में लड़ने का कोई अधिकार नहीं है और किसी भी स्थिति में हमें दुश्मनों के जाल में नहीं फंसना चाहिए.’

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युद्ध में मौतों का आंकड़ा

इस बीच, ईरान के साथ जारी संघर्ष अब चौथे सप्ताह में प्रवेश करने वाला है. अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच टकराव के चलते पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में तनाव लगातार बना हुआ है और इसके प्रभाव पूरे क्षेत्र में महसूस किए जा रहे हैं. तीन हफ्तों से चल रही इस लड़ाई में अब तक ईरान में 1,300 से अधिक, लेबनान में 1,000 से ज्यादा, इजराइल में 15 और इस क्षेत्र में 13 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है. लेबनान और ईरान में लाखों लोग विस्थापित हुए हैं. ईरान ने शनिवार को रिवोल्यूशनरी गार्ड के प्रवक्ता अली मोहम्मद नैनी के लिए जनाजा निकाला, जिन्हें एक दिन पहले इजराइली हमले में मार दिया गया था. सरकारी मीडिया ने इस दौरान अंतिम प्रार्थना की तस्वीरें प्रसारित कीं.

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अनन्त नारायण शुक्ल

लेखक के बारे में

By अनन्त नारायण शुक्ल

अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. अनन्त राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर खबरें करते हैं. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यमात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं.

अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं.

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अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने झारखंड विधान सभा 2024, दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 चुनाव और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है.

अनन्त कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं.

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

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