होर्मुज स्ट्रेट से गुजरे विदेशी जहाज, खुमैनी बंदरगाह पर हुई अनलोडिंग, युद्ध के बीच ईरान ने क्या मंगाया?

Updated at : 22 Mar 2026 1:16 PM (IST)
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Iran Allows Food Cargo Through Hormuz Strait amid War and Restricted Shipping.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सांकेतिक तस्वीर. फोटो एआई जेनरेटेड.

Iran Allows Ships Through Hormuz Strait: ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अपने जहाजों की तैनाती करते हुए इस पूरे शिपिंग रूट पर पाबंदी लगा दी है. इसकी वजह से पूरी दुनिया में तेल और गैस संकट पैदा हो गया है. दाम बढ़ने के साथ ही इन दोनों कमोडिटी की कमी भी पैदा हो गई है. हालांकि, ईरान ने अपने पोर्ट पर 9 मार्च से 16 मार्च तक कुछ जहाजों को आने की इजाजत दी है.

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Iran Allows Ships Through Hormuz Strait: मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य (होर्मुज स्ट्रेट) में समुद्री यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है. आम दिनों में जहां बड़ी संख्या में तेल और मालवाहक जहाज इस रास्ते से गुजरते थे, वहीं अब बेहद सीमित जहाजों को ही अनुमति मिल रही है. इस मार्ग की जोखिम भरी स्थिति का अंदाजा 11 मार्च की घटना से लगाया जा सकता है, जब ‘स्टार ग्वेनेथ’ नामक जहाज पर मिसाइल हमला हुआ. हालांकि, ईरान की इस नाकेबंदी के बावजूद कुछ चुनिंदा जहाज यहां से गुजरे. इन पर तेल नहीं बल्कि केवल अनाज और कृषि उत्पाद हैं. इन्हें इसलिए गुजरने दिया गया, ताकि ईरान के भीतर खाद्य आपूर्ति बनी रह सके.

28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष के बाद से इस अहम जलमार्ग पर आवाजाही लगभग ठप जैसी हो गई है. मौजूदा स्थिति में जो जहाज गुजर रहे हैं, उनमें ज्यादातर बल्क कार्गो शिप शामिल हैं, जो खाद्यान्न और कृषि उत्पाद लेकर आ रहे हैं. दिलचस्प बात यह है कि इन जहाजों में अधिकतर ग्रीक प्रबंधन के तहत संचालित हैं. इससे वे पश्चिमी देशों से जुड़े उन कुछ गिने-चुने जहाजों में शामिल हो गए हैं, जो अब भी इस खतरनाक रास्ते का इस्तेमाल कर रहे हैं.

कुछ जहाजों ने किया आवागमन

समुद्री ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, 15 से 16 मार्च के बीच कम से कम छह जहाजों ने उत्तरी खाड़ी के प्रमुख वाणिज्यिक केंद्र इमाम खुमैनी बंदरगाह पर माल उतारने के बाद जलडमरूमध्य पार किया. वहीं डेटा एनालिटिक्स कंपनी केपलर के मुताबिक, 9 मार्च के बाद पांच अन्य जहाजों ने भी वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेते हुए इस रास्ते का उपयोग किया. इनमें ‘जियाकोमेत्ती’ नाम का जहाज भी शामिल है, जो कनाडा से सोयाबीन लेकर खाड़ी क्षेत्र में पहुंचा.

खाद्य सुरक्षा के लिए उठाए जा रहे कदम

इन सीमित शिपमेंट का मुख्य उद्देश्य देश के भीतर खाद्य आपूर्ति को बनाए रखना है. ईरान अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा खुद पैदा करता है, लेकिन अनाज और तिलहन के लिए उसे आयात पर निर्भर रहना पड़ता है. इनका इस्तेमाल खाने के तेल और पशुओं के चारे के रूप में होता है.

कृषि क्षेत्र बना कमजोर कड़ी

विशेषज्ञों के मुताबिक, ईरान का कृषि क्षेत्र पहले से ही दबाव में है. हर साल करीब 15 लाख टन मक्का उत्पादन होने के बावजूद देश को 80 लाख से 1 करोड़ टन तक मक्का आयात करना पड़ता है, जो मुख्य रूप से ब्राजील से आता है. वहीं पानी की कमी ने ईरान की स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है.

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भंडारण से राहत, सरकार की अपील

28 फरवरी 2026 को युद्ध शुरू होने से पहले ही ईरान ने करीब 40 लाख टन गेहूं का भंडार तैयार कर लिया था, जो लगभग 4 महीने की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है. कृषि मंत्री गोलामरेजा नूरी गजलजेह ने बताया कि इसके अलावा बेकरी सेक्टर के लिए भी करीब दो महीने का आटा आवंटित किया जा चुका है. सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे घबराकर जरूरत से ज्यादा खरीदारी न करें, ताकि आपूर्ति संतुलित बनी रहे.

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तेहरान का नियंत्रण और वैश्विक असर

ईरान द्वारा इस जलमार्ग पर कड़े नियंत्रण के कारण वैश्विक व्यापार पर असर पड़ा है. सामान्य परिस्थितियों में दुनिया के करीब 20% तेल की सप्लाई इसी रास्ते से होती है. ऐसे में आवाजाही कम होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतों में उछाल देखने को मिला है. 

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Anant Narayan Shukla

लेखक के बारे में

By Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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