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India America Tariff War: रूसी तेल पर नहीं गली दाल तो मक्के पर उतरा अमेरिका, भारत में एंट्री के लिए बना रहा दबाव

Updated at : 15 Sep 2025 8:49 PM (IST)
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INDIAN PM MODI AND US PRESIDENT DONALD TRUMP

भारतीय प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प

India America Tariff War: अमेरिका टैरिफ के बहाने भारत पर आर्थिक दबाव बना रहा है. डोनाल्ड ट्रंप रूसी तेल खरीद को लेकर भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ पहले ही लगा चुके हैं. लेकिन भारत इस दबाव के आगे झुकने के लिए तैयार नहीं है. भारत की रणनीति से ट्रंप परेशान हैं. अब वो भारत को मात देने के लिए नई चाल चलने की तैयारी में हैं. अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक ने भारत को धमकी दी है कि अगर अमेरिकी मक्के पर भारत टैरिफ कम नहीं करता है, तो आगे बड़ी दिक्कत हो सकती है.

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India America Tariff War: यहां पहले जानते हैं कि अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक ने क्या कहा? भारत के सामने एक याचक की भूमिका में लुटनिक ने कहा- “भारत 1.4 अरब लोगों का देश होने का दावा करता है, लेकिन वह अमेरिका से थोड़ा सा मक्का भी नहीं खरीदेगा.” उन्होंने जोर देकर कहा कि नयी दिल्ली को अपने शुल्क कम करने होंगे, वरना अमेरिका के साथ व्यापार करने में उसे ‘कठिन समय’ का सामना करना पड़ेगा.” लुटनिक ने कहा, ”क्या यह बात आपको बुरी नहीं लगती कि वे हमें सब कुछ बेचते हैं और हमारा मक्का नहीं खरीदते? वे हर चीज पर शुल्क लगाते है.”

रूसी तेल खरीद पर ट्रंप की नहीं गली दाल

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल खरीद का हवाला देकर भारत पर 50 प्रतिशत शुल्क लगाया है. भारत ने अमेरिका के इस कदम को अनुचित और अविवेकपूर्ण बताया है. अमेरिकी टैरिफ की अनदेखी करते हुए भारत अब भी रूस से तेल खरीद रहा है. भारत ने साफ कह दिया है कि उसकी ऊर्जा खरीद राष्ट्र हित में है और उसे आगे भी जारी रखेगा.

भारत में मक्का बेचना चाहता है अमेरिका

रूसी तेल पर ट्रंप की भारत के सामने दाल नहीं गली, तो उन्होंने मक्के के बहाने दबाव बनाने का बहाना खोज लिया. अमेरिका कई साल से भारत पर कृषि क्षेत्र को व्यापार के लिए खोलने का दबाव बना रहा है. नॉन वेज मिल्क के लिए पहले दबाव बनाया, अब मक्के के लिए दबाव बना रहा है. अमेरिका चाहता है, भारत अमेरिकी कृषि उत्पाद को अपने बाजार में एंट्री करने दे. लेकिन भारत सरकार ने किसानों के हितों और खाद्य सुरक्षा से समझौता नहीं करने का फैसला किया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने  तो साफ कह दिया है, “जितना दबाव बनेगा, भारत उतना ही मजबूत होगा.”

डेयरी और अनाज बेचना चाहता है अमेरिका

अमेरिका लंबे समय से भारत पर दबाव बना रहा है कि वह डेयरी, चावल, गेहूं, मक्का (मकई) और जेनेटिकली मॉडिफाइड फसलों (जैसे GMO मक्का और सोयाबीन) पर टैरिफ कम करे. भारत ने इन क्षेत्रों को संरक्षित रखा है, क्योंकि यह किसानों की आजीविका और खाद्य सुरक्षा से जुड़ा है.

अमेरिकी कृषि उत्पादों पर भारी टैरिफ लगाता है भारत

अमेरिकी कृषि उत्पादों पर भारत औसतन 37 प्रतिशत टैरिफ लगाता है. जबकि भारतीय कृषि उत्पाद पर अमेरिका केवल 5.3 प्रतिशत टैरिफ ही लगाता है. उसका रोना इसी बात को लेकर है कि भारत उससे भारी टैरिफ वसूलता है और बदले में उस पर भारी टैरिफ ठोकता है.

मक्के पर अधिक जोर क्यों?

अमेरिका मक्के का सबसे बड़ा उत्पादक देश है. जबकि भारत उत्पादन की नजर से चौथे स्थान पर है. अधिक टैरिफ होने की वजह से अमेरिका कृषि उत्पाद भारतीय बाजार में पकड़ नहीं बना पा रहे हैं. चीन के साथ व्यापार युद्ध  जारी है, जिससे अमेरिकी फसलों का चीन में एंट्री नहीं हो पा रहा है. जिससे मक्का उत्पादक किसानों के सामने मुश्किलें बढ़ती जा रही है. एक रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी छोटे किसान अपने उत्पाद की खपत को लेकर चिंतित हैं. इसलिए अमेरिका चाहता है भारत नॉन-टैरिफ बैरियर्स हटा दे, कस्टम्स नियम सरल कर दे और डिजिटल ट्रेड/पेटेंट में ढील दे. ताकी वो अपने कृषि उत्पादों को कम कीमतों पर भारतीय बाजार में बेच पाए.

अमेरिकी कृषि उत्पाद की एंट्री से भारत पर क्या होगा प्रभाव?

अगर अमेरिकी कृषि उत्पाद की एंट्री भारतीय बाजार में हो  जाती है, तो भारत के किसान तबाह हो जाएंगे. उसके उत्पाद पर संकट के बादल मंडराने लगेंगे. उनके पास आर्थिक संकट उत्पन्न हो जाएगी. इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ कर दिया है कि उनकी सरकार किसी भी कीमत पर किसानों के हितों के साथ समझौता नहीं करेंगे. 

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ArbindKumar Mishra

लेखक के बारे में

By ArbindKumar Mishra

मुख्यधारा की पत्रकारिता में 14 वर्षों से ज्यादा का अनुभव. खेल जगत में मेरी रुचि है. वैसे, मैं राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खबरों पर काम करता हूं. झारखंड की संस्कृति में भी मेरी गहरी रुचि है. मैं पिछले 14 वर्षों से प्रभातखबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इस दौरान मुझे डिजिटल मीडिया में काम करने का काफी अनुभव प्राप्त हुआ है. फिलहाल मैं बतौर शिफ्ट इंचार्ज कार्यरत हूं.

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