राष्ट्रपति ट्रंप को जोर का झटका, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने टैरिफ प्रस्ताव किया रद्द, बताया गैरकानूनी

Updated at : 20 Feb 2026 10:41 PM (IST)
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Big Jolt to Trump Tariff

राष्ट्रपति ट्रंप को जोर का झटका, फोटो- पीटीआई

Big Jolt to Trump Tariff: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को तगड़ा झटका देते हुए उनके टैरिफ प्रस्ताव को गैरकानूनी करार देते हुए रद्द कर दिया है. कोर्ट के इस कदम से ट्रंप के आर्थिक एजेंडे के मुख्य आधार को तगड़ा झटका लगा है.

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Big Jolt to Trump Tariff: सुप्रीम कोर्ट से अमेरिकी राष्ट्रपति को जोर का झटका लगा है. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने टैरिफ पर अपना फैसला सुनाते हुए ट्रंप के टैरिफ प्रस्ताव को रद्द कर दिया है. कोर्ट के इस कदम से ट्रंप के आर्थिक एजेंडे के मुख्य आधार को तगड़ा झटका लगा है. अदालत का यह फैसला आपातकालीन शक्तियों के तहत लगाए गए शुल्कों से जुड़ा है, जिनमें कई देशों पर लगाए गए व्यापक पारस्परिक टैरिफ भी शामिल थे. यह ट्रंप के एजेंडे से जुड़ा पहला बड़ा मामला था, जो सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा. ट्रंप टैरिफ को लेकर लगातार मुखर रहे हैं. उन्होंने इसे अमेरिकी इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण मामलों में से एक बताया था और कहा था कि अगर फैसला उनके खिलाफ आता है तो यह देश की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका साबित होगा.

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा?

अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि संविधान के अनुसार टैक्स और टैरिफ लगाने का अधिकार केवल कांग्रेस के पास है, राष्ट्रपति के पास नहीं. मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने स्पष्ट किया कि संविधान निर्माताओं ने यह शक्ति कार्यपालिका यानी राष्ट्रपति को नहीं दी है. हालांकि, न्यायमूर्ति सैमुअल एलिटो, क्लेरेंस थॉमस और ब्रेट कावानाघ ने इस फैसले से असहमति जताई. कावानाघ ने कहा कि ये टैरिफ नीति के हिसाब से सही या गलत हो सकते हैं, लेकिन इतिहास और कानूनी आधार पर इन्हें वैध माना जा सकता है. इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि ट्रंप पूरी तरह टैरिफ नहीं लगा सकते, लेकिन अब उनकी शक्तियों पर ज्यादा सीमाएं लग गई हैं. प्रशासन का कहना है कि वे अन्य कानूनों के तहत टैरिफ जारी रखने की कोशिश करेंगे.

टैरिफ के खिलाफ दर्ज किए गए कई मुकदमे

रिपोर्ट्स के अनुसार, आम जनता में टैरिफ ज्यादा लोकप्रिय नहीं हैं, खासकर महंगाई बढ़ने के कारण लोग इससे परेशान हैं. ट्रंप प्रशासन ने दलील दी थी कि 1977 का आपातकालीन कानून राष्ट्रपति को आयात नियंत्रित करने और टैरिफ लगाने की अनुमति देता है. इसी कानून के तहत ट्रंप ने अप्रैल 2025 में कई देशों पर टैरिफ लगाया था, ताकि व्यापार घाटा कम किया जा सके. इससे पहले कनाडा, चीन और मैक्सिको पर भी टैरिफ लगाए गए थे. इन फैसलों के खिलाफ कई मुकदमे दायर किए गए. विरोध करने वालों का कहना था कि इस कानून में टैरिफ लगाने का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है. एक अनुमान के अनुसार, इन टैरिफ का आर्थिक प्रभाव अगले 10 साल में करीब 3 ट्रिलियन डॉलर हो सकता है. वहीं, सरकार को इन टैरिफ से अब तक 133 अरब डॉलर से ज्यादा की कमाई हुई है.

जयराम रमेश ने कहा- अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट को सलाम

इधर, कांग्रेस ने शुक्रवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ को रद्द करने के अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले की सराहना की और कहा कि जांच-परख और संतुलन की अमेरिकी व्यवस्था अब भी काम कर रही है. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा “राष्ट्रपति ट्रंप की पूरी टैरिफ नीति को रद्द करने के लिए अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट को सलाम. इसकी वैचारिक संरचना को देखते हुए यह काफी अद्भुत निर्णय है.” उन्होंने आगे कहा “6 – 3 का फैसला निर्णायक होता है. यह दिखाता है कि अमेरिका में जांच-परख और संतुलन की प्रणाली अब भी प्रभावी है.” (इनपुट भाषा)

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Pritish Sahay

लेखक के बारे में

By Pritish Sahay

12 वर्षों से टीवी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दे रहा हूं. रांची विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग से पढ़ाई की है. राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय विषयों के साथ-साथ विज्ञान और ब्रह्मांड विषयों पर रुचि है. बीते छह वर्षों से प्रभात खबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने के बाद डिजिटल जर्नलिज्म का अनुभव काफी अच्छा रहा है.

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