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पाकिस्तान में इमरान खान को लगा तगड़ा झटका, प्रतिबंधित फंडिंग मामले में एफआईए ने दर्ज किया मुकदमा

Updated at : 11 Oct 2022 9:36 PM (IST)
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पाकिस्तान में इमरान खान को लगा तगड़ा झटका, प्रतिबंधित फंडिंग मामले में एफआईए ने दर्ज किया मुकदमा

एफआईए की ओर से दर्ज कराई गई प्राथमिकी के अनुसार, पाकिस्तान में पूर्व सत्ताधारी दल पीटीआई के नेताओं ने विदेशी मुद्रा अधिनियम का उल्लंघन किया है और उन्हें संदिग्ध बैंक खातों के लाभार्थी घोषित किया गया है.

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इस्लामाबाद : पाकिस्तान के अपदस्थ प्रधानमंत्री इमरान खान को एक बार फिर तगड़ा झटका लगा है. संघीय जांच एजेंसी (एफआईए) ने पाकिस्तान-ए-तहरीक इंसाफ (पीटीआई) के अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और पार्टी के अन्य नेताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है. पाकिस्तान के अंग्रेजी अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट के अनुसार, इमरान खान के खिलाफ प्रतिबंधित फंडिंग मामले में एफआईए कमर्शियल बैंकिंग सर्कल इस्लामाबाद ने मुकदमा दर्ज कराया.

प्रतिबंधित फंडिंग मामले की जांच जारी है

मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, प्रतिबंधित फंडिंग मामले में एफआईए ने दर्ज मुकदमे में पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के अलावा पीटीआई नेता सीनेटर सैफुल्ला नियाजी, सरदार तारिक, सैयद यूनुस, आमिर कयानी, तारिक शफी और पार्टी की वित्तीय टीम के सदस्य और एक निजी बैंक के प्रबंधक को मामले में नामित किया है. एफआईए के सूत्रों ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा है कि इस मामले की जांच जारी है.

पीटीआई के खाते में ट्रांसफर किए गए 21 लाख डॉलर

एफआईए की ओर से दर्ज कराई गई प्राथमिकी (एफआईआर) के अनुसार, पाकिस्तान में पूर्व सत्ताधारी दल पीटीआई के नेताओं ने विदेशी मुद्रा अधिनियम का उल्लंघन किया है और उन्हें संदिग्ध बैंक खातों के लाभार्थी घोषित किया गया है. एफआईए ने दावा किया कि अबराज ग्रुप ने भी पीटीआई के बैंक खातों में 21 लाख डॉलर ट्रांसफर किए. एफआईए सूत्रों के अनुसार, पीटीआई ने पाकिस्तान के चुनाव आयोग (ईसीपी) को आरिफ नकवी का ‘जाली’ हलफनामा सौंपा, जिसमें पार्टी ने दावा किया कि वूटन क्रिकेट लिमिटेड (डब्ल्यूसीएल) द्वारा दी गई सारी रकम पाकिस्तान में पीटीआई के खाते में जमा कर दी गई थी.

गलत निकला चुनाव आयोग में सौंपा गया हलफनामा

एफआईए सूत्रों ने कहा कि पाकिस्तान के चुनाव आयोग के पास आरिफ नकवी की ओर से सौंपा गया हलफनामा गलत निकला, क्योंकि मई 2013 में डब्ल्यूसीएल से पाकिस्तान में दो अलग-अलग खातों में दो और लेनदेन किए गए थे. प्राथमिकी में एक निजी बैंक के प्रमुख पर विवरण छिपाने में पीटीआई की सहायता करने का भी आरोप लगाया गया है. पीटीआई द्वारा प्रतिबंधित फंडिंग मामले में एफआईए जांच को इस्लामाबाद हाईकोर्ट (आईएचसी) में चुनौती देने के तीन दिन बाद यह मामला सामने आया है.

पीटीआई ने हाईकोर्ट से लगाई छापेमारी रोकने की गुहार

एफआईए जांच को इस्लामाबाद हाईकोर्ट में दाखिल चुनौती याचिका में पीटीआई ने एफआईए को मामले के संबंध में गिरफ्तारी करने और छापेमारी करने से रोकने का आह्वान किया. पार्टी ने एफआईए पर राजनीतिक आधार पर पार्टी नेताओं को ‘परेशान’ करने का आरोप लगाया, अदालत से एजेंसी को प्रतिबंधित धन मामले की जांच करने से रोकने का आग्रह किया. पीटीआई ने अपनी याचिका में कहा कि पार्टी ने ‘शासन परिवर्तन’ के बाद सरकार विरोधी आंदोलन चलाने के लिए धन जुटाया. विदेश से भेजे गए सभी फंड कानून के अनुसार प्राप्त हुए पीटीआई ने तर्क दिया.

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पीटीआई के बागी नेता बाबर ने दर्ज कराया था मामला

याचिका में कहा गया है कि एफआईए की जांच और छापेमारी अवैध है और इसे तुरंत रोका जाना चाहिए. एफआईए ने पीटीआई के सीनेटर सैफुल्ला न्याजी के घर पर छापा मारा और उन्हें परेशान किया. एफआईए ने इस साल अगस्त में पीटीआई के खिलाफ अपनी जांच शुरू कर दी थी, जब पाकिस्तान के चुनाव आयोग (ईसीपी) ने अपने फैसले में घोषणा की थी कि पार्टी को वास्तव में अवैध धन प्राप्त हुआ था. यह मामला पीटीआई के बागी नेता अकबर एस बाबर द्वारा दायर किया गया था, जो 14 नवंबर, 2014 से लंबित था. ईसीपी के लिखित आदेश में कहा गया है कि राजनीतिक दल को अमेरिका, यूएई, यूके और ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों से अवैध धन प्राप्त हुआ.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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