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हिटलर के DNA ने खोले बड़े राज, हार्मोनल गड़बड़ी के मिले संकेत, यहूदी वंश की अफवाहों पर भी फुल स्टॉप

Updated at : 21 Dec 2025 4:31 PM (IST)
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Adolf Hitler’s

Adolf Hitler

Hitler DNA Research: चैनल 4 की एक डॉक्यूमेंट्री में हिटलर के DNA के फोरेंसिक एनालिसिस से अहम खुलासे हुए हैं. रिसर्च के मुताबिक, एनालिसिस में सेक्सुअल डेवलपमेंट से जुड़ी समस्याओं के संकेत मिले, यहूदी वंश की अफवाहों को गलत साबित किया गया और उनकी मनोवैज्ञानिक प्रवृत्तियों पर भी रोशनी डाली गई है.

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Hitler DNA Research: दुनिया ने एडोल्फ हिटलर को एक तानाशाह, नरसंहार करने वाले और नस्लीय नफरत फैलाने वाले नेता के तौर पर जाना. लेकिन उसके निजी जीवन, शरीर और सेहत को लेकर दशकों से तरह-तरह की बातें कही जाती रही हैं. कोई कहता रहा कि वह शारीरिक रूप से अधूरा था तो कोई उसके मानसिक संतुलन पर सवाल उठाता रहा. अब पहली बार इन अफवाहों को विज्ञान की कसौटी पर कसा गया है. ब्रिटेन के चैनल-4 की डॉक्यूमेंट्री ‘Hitler’s DNA: Blueprint of a Dictator’ में हिटलर के डीएनए की फॉरेंसिक जांच के जरिये उसकी जैविक सच्चाई सामने लाने की कोशिश की गई है.

Hitler DNA Research in Hindi: हिटलर का DNA आया कहां से?

डॉक्यूमेंट्री के अनुसार, साल 1945 में हिटलर की मौत के बाद उसके बंकर में मौजूद एक सोफे से खून से सना कपड़ा लिया गया था. यह कपड़ा एक अमेरिकी सेना के कर्नल ने सुरक्षित रखा था. आधुनिक फॉरेंसिक तकनीक की मदद से इसी कपड़े से दशकों बाद डीएनए निकाला गया. शोधकर्ताओं ने बताया कि सैंपल बहुत पुराना और खराब हालत में था, लेकिन कई स्तर की जांच के बाद उसकी विश्वसनीयता की पुष्टि की गई. इस तरह की प्रक्रिया पहले भी ऐतिहासिक मामलों में अपनाई जा चुकी है.

Hitler DNA Research in Hindi: DNA क्या इशारा करता है

डीएनए जांच में वैज्ञानिकों को संकेत मिले कि हिटलर में Kallmann Syndrome नाम की एक जन्मजात समस्या से जुड़े जेनेटिक मार्कर मौजूद हो सकते हैं. यह बीमारी हार्मोन के विकास को प्रभावित करती है. इससे जूझ रहे लोगों में यौवन ठीक से नहीं आता, टेस्टोस्टेरोन कम हो सकता है, बांझपन की दिक्कत हो सकती है और यौन अंग पूरी तरह विकसित नहीं हो पाते. शोधकर्ताओं के मुताबिक, इस बीमारी वाले लोगों में दस में से एक में माइक्रोपेनिस होने की संभावना रहती है. हालांकि डीएनए से इसकी पक्की पुष्टि नहीं होती, लेकिन यह एक मजबूत संकेत जरूर माना जा रहा है.

पुराने रिकॉर्ड और नई जांच का मेल

डॉक्यूमेंट्री बताती है कि यह नई जानकारी इतिहास में दर्ज कुछ बातों से मेल खाती है. प्रथम विश्व युद्ध के दौरान हिटलर के साथी सैनिकों द्वारा उसका मजाक उड़ाने की कहानियां पहले से मौजूद हैं. इसके अलावा, साल 1923 का एक मेडिकल रिकॉर्ड, जो 2015 में सामने आया था, उसमें दर्ज है कि हिटलर का एक टेस्टिकल नीचे नहीं उतरा हुआ था. अब डीएनए जांच इन पुराने दस्तावेजों को नए संदर्भ में देखने का मौका देती है.

इस रिसर्च की अगुवाई करने वाली प्रोफेसर टुरी किंग, जो पहले ब्रिटेन के राजा रिचर्ड तृतीय की पहचान कर चुकी हैं, कहती हैं कि उन्होंने इस अध्ययन को पूरी सावधानी और वैज्ञानिक ईमानदारी के साथ किया.

यहूदी वंश की अफवाह पर फुल स्टॉप

हिटलर को लेकर सबसे चर्चित अफवाहों में से एक यह रही है कि उसके अंदर यहूदी वंश का खून था. डॉक्यूमेंट्री में किए गए डीएनए विश्लेषण में इस तरह के किसी भी जेनेटिक संकेत के सबूत नहीं मिले. इतिहासकार पहले से ही इस दावे को बेबुनियाद बताते रहे हैं और अब वैज्ञानिक जांच ने भी इस मिथक को खारिज कर दिया है. नस्लीय शुद्धता की बात करने वाले हिटलर के संदर्भ में यह निष्कर्ष खास अहम माना जा रहा है.

मानसिक और न्यूरोडायवर्स संकेत, लेकिन बीमारी नहीं

डीएनए जांच में यह भी पाया गया कि हिटलर में कुछ ऐसे जेनेटिक मार्कर थे जो ऑटिज्म, सिजोफ्रेनिया और बाइपोलर जैसी स्थितियों से जुड़े माने जाते हैं. लेकिन विशेषज्ञ साफ कहते हैं कि इसका मतलब यह नहीं कि हिटलर इन बीमारियों से ग्रसित था. कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता डॉ. एलेक्स त्सोमपानिडिस के मुताबिक, जीन सिर्फ संभावना दिखाते हैं, किसी के व्यवहार या फैसलों को तय नहीं करते. वहीं, प्रोफेसर साइमन बैरन-कोहेन चेतावनी देते हैं कि हिटलर के अपराधों को न्यूरोडायवर्सिटी से जोड़ना गलत और नुकसानदेह हो सकता है. उनका कहना है कि ज्यादातर लोग जिनमें ऐसी स्थितियां होती हैं, वे हिंसक नहीं बल्कि शांत और संवेदनशील होते हैं.

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Govind Jee

लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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