अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को कब्जा करने का प्लान बनाया तब से विवाद बढ़ गया है. इसी विवाद को लेकर कैलिफोर्निया के 34वें क्रांगेसनेल जिले से डेमोक्रेटिक प्रतिनिधि जिमी गोमेज ने अमेरिकी कांग्रेस में एक बिल पेश किया. इस बिल का मकसद है कि राष्ट्रपति ट्रंप के मंसूबे को पानी फेरना. डेमोक्रेटिक के इस बिल के माध्यम से ग्रीनलैंड को जबरदस्ती हथियाने या खरीदने के फिराक में लेने को कोशिश को रोकना है.
इस बिल का नाम डेमोक्रेटिक ने ग्रीनलैंड सॉवरेनिटी प्रोटेक्शन एक्ट रखा है. इस बिल का उद्देश्य है कि ग्रीनलैंड पर हमले, कब्जे, खरीद या किसी भी तरह से उसे हथियाने करने के संघीय फंड के इस्तेमाल पर सीधा रोक लगाना है. बता दें कि इस बिल को सोमवार को ही पेश किया गया था. बिल को विदेश मामलों की समिति और सशस्त्र सेवा समिति के पास भेज दिया गया है.
यह बिल ट्रंप के हथियाने वाले मंसूबे को देगा सीधी टक्कर
जब से ट्रंप ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति को उनके ही देश से सीधा उठा कर अमेरिका लाए जाने के बाद, ट्रंप का ग्रीनलैंड को हथियाने का बयान को सुर्खियों में ला दिया. उनका कहना था कि हम ग्रीनलैंड को देख रहे हैं. इसी के बाद यह बिल लाया गया. इससे पहले एक रिपब्लिकन विधायक के द्वारा यह बिल पेश किया गया था. उसी के बाद डेमोक्रेटिक ने इसके जवाब में यह बिल लाया. ट्रंप की पार्टी से रिपब्लिकन सांसद फ्लोरिडा के 6वें काग्रेसनल जिले से रैंडी फाइन ने यह बिल सोमवार को ग्रीनलैंड एनेक्सेशन एंड स्टेटहुड एक्ट नाम का बिल पेश किया. यह बिल ट्रंप को डेनमार्क के नियंत्रण वाले इस बर्फीले टापू को हथियाने के लिए सीधे तौर पर अनुमति देता है.
2016 के ही कार्यकाल में कब्जा करने का रखा था प्रस्ताव
पहली बार अमेरिकी राष्ट्रपति बनने के बाद अपने पहले कार्यकाल के दौरान ही डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया के सबसे बड़े द्वीप को कब्जा करने का प्रस्ताव रखा था. साल 2024 में ट्रंप ने इसे फिर दोहराया. ट्रंप का ग्रीनलैंड को लेकर कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर अमेरिका इसे हासिल करना चाहता है. इसी बात को आगे जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि अगर इसे बलपूर्वक भी हासिल करना होगा तो अमेरिका पीछे नहीं हटेगा.
‘ग्रीन- मार्क’ दोनों ने कहा- द्वीप ब्रिक्री के लिए नहीं है
इस बिल को लेकर कुछ कट्टर रिपब्लिकन नेता ट्रंप के समर्थन में हैं. हालांकि ग्रीनलैंड को कब्जा करने का प्रस्ताव को अमेरिका में दोनों दलों को भारी विरोध झेलना पड़ रहा है. ग्रीनलैंड और डेनमार्क दोनों यह बार-बार कह चुके हैं कि यह द्वीप ब्रिकी के लिए नहीं है. मंगलवार को ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नील्सन से साफ कहा है कि अगर अमेरिका और डेनमार्क को में से किसी को एक को चुनना पड़ा तो वह ग्रीनलैंड-डेनमार्क दोनों को चुनेंगे.
Huge News! Today, I am proud to introduce the Greenland Annexation and Statehood Act, a bill that allows the President to find the means necessary to bring Greenland into the Union.
— Congressman Randy Fine (@RepFine) January 12, 2026
Let me be clear, our adversaries are trying to establish a foothold in the Arctic, and we can’t… pic.twitter.com/h28sXU7LAU
नीलसन ने कोपेनहेगन में डेनमार्क के प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि हम एक भू- राजनीतिक संकट का सामना कर रहे हैं और अगर हम इस वक्त अमेरिका और डेनमार्क में किसी एक को चुनना हो तो हम डेनमार्क को ही चुनेंगे. उन्होंने कहा हम डेनमार्क साम्राज्य के भीतर एकजुट हैं. दोनों प्रधानमंत्रियों का बयान ऐसे समय में आया है जब डेनमार्क और ग्रीनलैंड के विदेश मंत्री बुधवार को अमेरिकी उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मिलने वाले हैं.
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