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मैं उन्हें नहीं जानता, लेकिन उनको भारी समस्या होने वाली है… अब ट्रंप ने ग्रीनलैंड के पीएम को दी धमकी

Updated at : 14 Jan 2026 11:26 AM (IST)
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मैं उन्हें नहीं जानता, लेकिन उनको भारी समस्या होने वाली है… अब ट्रंप ने ग्रीनलैंड के पीएम को दी धमकी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ग्रीनलैंड के पीएम जेंस फ्रेडरिक नील्सन. फोटो- एक्स

ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नील्सन ने मंगलवार को डेनमार्क की पीएम के साथ एक साझा बयान दिया. उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड अमेरिका की बजाय डेनमार्क के साथ बने रहने को प्राथमिकता देगा. इस पर डोनाल्ड ट्रंप ने नील्सन को चेतावनी दी है.

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री (प्रीमियर) जेंस-फ्रेडरिक नील्सन के बयान पर पलटवार किया है. ग्रीनलैंड के पीएम ने मंगलवार को कहा कि ग्रीनलैंड अमेरिका की बजाय डेनमार्क के साथ बने रहने को प्राथमिकता देगा. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने इस बयान को खारिज कर दिया. उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि यह ग्रीनलैंड के लिए एक बड़ी समस्या पैदा कर सकता है. 

अमेरिका के राष्ट्रपति ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने के लिए काफी जोर लगा रहे हैं. वेनेजुएला पर हमला कर निकोलस मादुरो को गिरफ्तार करने के बाद, ट्रंप के बयान ग्रीनलैंड और डेनमार्क दोनों को मुश्किल में डाल रहे हैं. ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री नील्सन ने मंगलवार को कहा कि स्वशासित डेनिश क्षेत्र ग्रीनलैंड, अमेरिका में शामिल होने की बजाय डेनमार्क का हिस्सा बने रहना चाहता है. उन्होंने कोपेनहेगेन में डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन के साथ एक प्रेस कांफ्रेंस में बयान दिया. 

उन्होंने आगे कहा कि हम इस समय एक जियो पॉलिटिकल संकट का सामना कर रहे हैं. अगर अमेरिका और डेनमार्क में से किसी एक चुनना पड़े, तो वह डेनमार्क को चुनेंगे. ग्रीनलैंड में इस समय गठबंधन की सरकार चल रही है. शासन के हेड नील्सन ने आगे कहा कि डेनिश राष्ट्रमंडल का हिस्सा होने के नाते ग्रीनलैंड नाटो का सदस्या है और उसकी रक्षा नाटो के माध्यम से ही होनी चाहिए. 

ट्रंप ने क्या कहा?

नील्सन के इस बयान पर डोनाल्ड ट्रंप ने असहमति जताई है. रिपोर्टरों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि यह उनकी समस्या है. वह उनसे असहमत हैं. ट्रंप ने यहां तक कह दिया कि वह नील्सन को जानते ही नहीं हैं. उनके बारे में कुछ भी नहीं जानते. लेकिन यह उनके लिए बड़ी समस्या बनने वाली है. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो ग्रीनलैंड के विषय पर बैठक करने वाले हैं. यह व्हाइट हाउस में होगी. इसमें ग्रीनलैंड और डेनमार्क के विदेश मंत्री होंगे. 

ग्रीनलैंड डेनमार्क का हिस्सा कब बना?

ग्रीनलैंड, दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है. आर्कटिक महासागर के सबसे उत्तरी छोर पर स्थित यह देश डेनमार्क के भीतर एक स्वशासित क्षेत्र है. यह नाटो का भी साझेदार है. ग्रीनलैंड, 1953 में डेनमार्क का हिस्सा बना. इसे 1979 में होम रूल की आजादी दी गई. 2009 में स्वतंत्रता को और बढ़ाते हुए इसे अपने निर्णय लेने के और भी अधिकार मिले. हालांकि, रक्षा, विदेश नीति और मुद्रा जैसे मामले अभी भी डेनमार्क के नियंत्रण में है. अमेरिका इस एरिया को लंबे समय से अपना हिस्सा बनाना चाहता रहा है. डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने हर बार इसे खारिज किया है. 

ट्रंप के दावों और इरादों को नकार चुके हैं ‘ग्रीन-मार्क’

अमेरिका की ओर से ग्रीनलैंड को लेने के लिए सैन्य अभियानों के अलावा, कैश देने का भी ऑफर आया था. ग्रीनलैंड और डेनमार्क दोनों ने इन प्रस्तावों को मानने से मना किया है. उन्होंने कहा कि इस द्वीप को बेचा या अमेरिका में नहीं मिलाय जा सकता. ग्रीनलैंड का भविष्य उसके अपने लोगों द्वारा ही तय किया जाना चाहिए. डेनमार्क की पीएम मेटे फेडरिक्सन ने अमेरिकी आक्रामकत का पहले भी जवाब दिया है. उन्होंने कहा था कि अगर अमेरिका ग्रीनलैंड पर सैन्य अभियान करता है, तो यह नाटो का अंत होगा. वहीं डेनमार्क के रक्षा मंत्रालय ने 1952 के नियम की याद दिलाई थी कि अगर ग्रीनलैंड पर कोई हमला होगा, तो उसके सैनिक पहले गोली मारेंगे, फिर कोई सवाल पूछेंगे. 

ट्रंप का दावा; नहीं लिया तो रूस-चीन कब्जा कर लेंगे

वहीं ट्रंप के ऊपर इन बयानों का कोई असर नहीं पड़ा है. शनिवार को उन्होंने कहा था कि अमेरिका को वहां कुछ न कुछ करना होगा. चाहे उन्हें यह अच्छा लगे या नहीं. यह आसान तरीके से होगा या कठिन. ट्रंप का दावा है कि अगर अमेरिका ने कोई कदम नहीं उठाया, तो रूस और चीन वहां दखल दे सकते हैं. ट्रंप ने यह भी कहा है कि वह रूस और चीन को अपना पड़ोसी नहीं बनाना चाहते. 

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Anant Narayan Shukla

लेखक के बारे में

By Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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