अच्छा हुआ वह मर गया… अपने ही देश के अधिकारी की मौत पर खुश हुए ट्रंप, नफरत की वजह क्या?

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रॉबर्ट म्यूलर और डोनाल्ड ट्रंप. फोटो- एक्स.

Trump on Robert Mueller Death: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पूर्व एफबीआई निदेशक रॉबर्ट म्यूलर की मौत पर खुशी जाहिर की. वह 81 वर्ष के थे. उन्होंने ट्रंप के 2016 के चुनाव अभियान में रूसी हस्तक्षेप की जांच की थी.

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Trump on Robert Mueller Death: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ही देश के एक बड़े अधिकारी की मौत पर बेहद चौंकाने वाला बयान दिया है. जहां उनकी मौत पर उनकी कार्यशैली को पसंद करने वाले श्रद्धांजलि दे रहे, वहीं, ट्रंप ने उनकी मौत पर एक तरह से खुशी जाहिर की. अमेरिका के पूर्व एफबीआई निदेशक रॉबर्ट म्यूलर 81 वर्ष के थे. शनिवार को उनकी मौत हो गई, हालांकि उनकी मृत्यु का कारण तुरंत स्पष्ट नहीं हुआ, लेकिन वह कई वर्षों से पार्किंसन रोग से पीड़ित थे. 

म्यूलर के परिवार ने एक बयान जारी कर कहा, ‘गहरे दुख के साथ हम यह साझा कर रहे हैं कि बॉब का कल रात निधन हो गया. उनका परिवार अपनी निजता का सम्मान करने की अपील करता है.’ वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया ट्रुथ सोशल पर लिखा, ‘रॉबर्ट म्यूलर की अभी मृत्यु हो गई. अच्छा हुआ, मैं खुश हूं कि वह मर गए. अब वह निर्दोष लोगों को नुकसान नहीं पहुंचा सकते!’ 

क्या ट्रंप की नफरत की वजह जांच थी? 

उन्होंने 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में रूसी हस्तक्षेप की जांच का नेतृत्व किया था.  म्यूलर की दो साल लंबी जांच 2019 में इस निष्कर्ष पर पहुंची कि रूस ने 2016 के चुनाव में हस्तक्षेप किया था, जिसका उद्देश्य ट्रंप के अभियान को फायदा पहुंचाना था. न्याय विभाग ने 2017 में उन्हें विशेष वकील नियुक्त किया था, जब ट्रंप ने एफबीआई निदेशक जेम्स कोमी को बर्खास्त कर दिया था.

म्यूलर की जांच ट्रंप के लिए एक जुनूनी मुद्दा बन गई थी. ट्रंप ने कई बार इस जांच को ‘विच हंट’, ‘धोखा’ और ‘फर्जी’ बताया. म्यूलर ने ट्रंप के छह सहयोगियों पर आपराधिक आरोप लगाए, जिनमें उनके पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार- माइकल फ्लिन भी शामिल थे. उनकी 448 पन्नों की रिपोर्ट में ट्रंप अभियान और रूस के बीच महत्वपूर्ण संपर्कों का जिक्र किया गया, लेकिन आपराधिक साजिश का आरोप नहीं लगाया गया. 

2019 में पूरी रिपोर्ट सामने आई, इसमें यह बताया गया कि ट्रंप ने जांच को नियंत्रित करने और यहां तक कि बंद कराने की कोशिश की. म्यूलर ने यह तय नहीं किया कि ट्रंप ने कानून तोड़ा या नहीं, क्योंकि विभाग की नीति के तहत पद पर बैठे राष्ट्रपति पर आरोप तय नहीं किए जा सकते. हालांकि, उन्होंने ट्रंप को न्याय में बाधा डालने के आरोपों से पूरी तरह बरी नहीं किया.

म्यूलर के प्रति ट्रंप की नाराजगी उनके दूसरे कार्यकाल में भी जारी रही. उन्होंने दूसरी बार 2020 के चुनावों में इसे खूब भुनाया. हालांकि, वे हार गए, लेकिन जब दूसरी बार लौटे तब भी उन्होंने इसका खूब जिक्र किया.

सख्त और मिशन के पक्के म्यूलर

रॉबर्ट एस. म्यूलर एफबीआई के वह निदेशक थे, जिन्होंने 11 सितंबर 2001 के हमलों के बाद देश की प्रमुख कानून प्रवर्तन एजेंसी को आतंकवाद से लड़ने वाली ताकत में बदल दिया था. एफबीआई में म्यूलर ने 21वीं सदी की जरूरतों के अनुसार एजेंसी के मिशन में बदलाव शुरू किया. उन्हें रिपब्लिकन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश ने नियुक्त किया था. 9/11 की उस विनाशकारी घटना ने एफबीआई की प्राथमिकता घरेलू अपराध सुलझाने से हटाकर आतंकवाद को रोकने पर केंद्रित कर दी. 

म्यूलर प्रिंसटन विश्वविद्यालय के स्नातक, वियतनाम युद्ध के पूर्व सैनिक थे और उन्होंने सार्वजनिक सेवा में बने रहने के लिए एक लाभदायक निजी नौकरी छोड़ दी थी. उनका कार्यकाल 2003 तक था, लेकिन  उन्होंने डेमोक्रेटिक राष्ट्रपति बराक ओबामा के अनुरोध पर अपने 10 साल के कार्यकाल से आगे भी पद पर बने रहने की सहमति दी थी. एफबीआई के इतिहास में जे. एडगर हूवर के बाद सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले निदेशक म्यूलर 2013 तक इस पद पर रहे. 

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रिटायरमेंट के बाद ट्रंप का मामला संभालने लौटे म्यूलर

कुछ वर्षों तक निजी क्षेत्र में काम करने के बाद, उप अटॉर्नी जनरल रॉड रोसेनस्टीन ने उन्हें ट्रंप-रूस मामले की जांच के लिए विशेष वकील के रूप में फिर से सार्वजनिक सेवा में लौटने को कहा. न्याय विभाग की उस जांच में विशेष वकील बने, जिसमें यह देखा गया कि क्या ट्रंप के 2016 के चुनाव अभियान ने रूस के साथ मिलकर चुनाव परिणाम को प्रभावित करने की कोशिश की थी. 

म्यूलर का सख्त व्यक्तित्व और कम बोलने वाला स्वभाव उनके मिशन की गंभीरता के अनुरूप था. उनकी टीम ने लगभग दो वर्षों तक चुपचाप न्याय विभाग के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण और विवादित जांचों में से एक को अंजाम दिया. उन्होंने इस दौरान कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की और सार्वजनिक रूप से बहुत कम नजर आए, यहां तक कि ट्रंप और उनके समर्थकों के हमलों के बावजूद भी वह शांत रहे.

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अनन्त नारायण शुक्ल

लेखक के बारे में

By अनन्त नारायण शुक्ल

अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. अनन्त राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर खबरें करते हैं. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यमात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं.

अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं.

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अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने झारखंड विधान सभा 2024, दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 चुनाव और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है.

अनन्त कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं.

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

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