Fake Job : बेरोजगार करते हैं नकली नौकरी, काम करने के बाद उल्टा पैसे भरते हैं लोग
Published by : Amitabh Kumar Updated At : 23 Aug 2025 6:33 AM
ऑफिस में काम करती लड़की की सांकेतिक तस्वीर
Fake Job : चीन में बढ़ती बेरोजगारी की वजह से लोग नकली नौकरियों का सहारा लेते नजर आ रहे हैं. कुछ कंपनियां किराए पर ऑफिस स्पेस देती हैं, जहां बेरोजगार लोग सिर्फ काम करने का नाटक करते हैं. वे इसके लिए पैसे भी चुकाते हैं. जानें इसकी वजह आखिर है क्या?
Fake Job : आज भी कई लोग ऐसे हैं, जिनके पास डिग्री होने के बाद भी नौकरी नहीं है. इनमें से कई बेरोजगारी की वजह से परेशान रहते हैं. रोजगार नहीं मिलने की वजह से डिप्रेशन में भी चले जाते हैं. कुछ लोगों को कंपनियों के ले-ऑफ के दौरान नौकरी से निकाल दिया जाता है, जिससे उनके पास काम नहीं रहता और वे मजबूरी में इधर-उधर भटकने पर मजबूर हो जाते हैं.
नकली नौकरी करते हैं बेरोजगार
चीन इस समय आर्थिक मंदी से जूझ रहा है, जिसकी वजह से बेरोजगारी बढ़ गई है. इसी बीच कुछ नई कंपनियां सामने आई हैं, जो बेरोजगार लोगों को नकली नौकरी का मौका देती हैं. ये कंपनियां ऐसा माहौल तैयार करती हैं, जिससे लोग दिखा सकें कि वे नौकरी कर रहे हैं, जबकि वास्तव में उनके पास कोई काम नहीं होता है. लोग इस सुविधा के लिए पैसे भी चुकाते हैं, ताकि समाज के दबाव से बच सकें. ऐसा इसलिए ताकि परिवार को दिखा सकें कि उनके पास नौकरी है.
नकली नौकरी करने के लिए देते हैं पैसे
SCMP की एक रिपोर्ट आई है जिसके अनुसार, चीन में कई बेरोजगार युवा अब फर्जी काम वाली कंपनियों का सहारा ले रहे हैं. ये लोग किराए पर मिलने वाले साझा ऑफिस में जाकर ऐसा दिखावा करते हैं, जैसे वे किसी असली नौकरी में काम कर रहे हों. खासकर बड़े शहरों में यह ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है. इस तरीके से लोग समाज के दबाव और बेरोजगारी से होने वाले मानसिक तनाव से कुछ हद तक राहत महसूस करते हैं. नकली नौकरी करने ये लोग पैसे भी चुकाते हैं.
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ये कंपनियां लोगों से रोज के हिसाब से करीब 330 से 580 रुपये तक वसूलतीं हैं. यदि कोई व्यक्ति पूरे महीने की सर्विस लेता है, तो उसे छूट भी मिलती है. हांग्जो शहर में ऐसी ही एक कंपनी चलाती है. इसके संचालक चेन यिंगजियान हैं जो खुद ऑफिस के नियम तय करते हैं और बेरोजगार लोगों के लिए फर्जी इंटरव्यू भी आयोजित करते हैं.
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By Amitabh Kumar
अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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