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एपस्टीन फाइल्स में आयुर्वेद का जिक्र, 5 हजार साल पुरानी भारतीय मसाज और तिल के तेल तक पहुंचा मामला

Epstein Files: जेफ्री एपस्टीन फाइलों में भारत की 5,000 साल पुरानी आयुर्वेदिक तकनीकों और तिल के तेल की मालिश का जिक्र सामने आया है. न्याय विभाग ने हजारों दस्तावेज, तस्वीरें और कॉल लॉग जारी किए. ट्रम्प, क्लिंटन और मैक्सवेल से जुड़े राजनीतिक और कानूनी पहलुओं का भी खुलासा हुआ.

Epstein Files: शुक्रवार को अमेरिकी न्याय विभाग ने जेफ्री एपस्टीन से जुड़ी हजारों फाइलें जारी की हैं. ये फाइलें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर वाले बिल के तहत 30 दिनों के भीतर जारी करना जरूरी था. फाइलों में एपस्टीन द्वारा इस्तेमाल की गई मसाज तकनीक और आयुर्वेद का जिक्र है. दस्तावेजों में लिखा है कि पश्चिम में कई प्रैक्टिशनर अब भारत की 5000 साल पुरानी प्राकृतिक इलाज की इस प्रणाली के आधार पर मसाज और दूसरे इलाज दे रहे हैं. इसमें ‘द आर्ट ऑफ गिविंग मसाज’ नाम के आर्टिकल भी हैं, जिसमें डिटॉक्सिफिकेशन के लिए तिल के तेल के इस्तेमाल का जिक्र है.

Epstein Files in Hindi: राजनीतिक संवेदनशीलता और ट्रंप का कनेक्शन

एपस्टीन फाइलें राजनीतिक दृष्टि से भी बहुत संवेदनशील हैं. डेमोक्रेट्स लंबे समय से फाइलों के खुलासे की मांग कर रहे थे. ट्रंप और एपस्टीन कई सालों तक दोस्त थे, लेकिन बाद में उनके रिश्ते बिगड़ गए. फाइलों में कुछ ही ट्रंप की तस्वीरें थीं, जबकि पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और एपस्टीन के साथ माइकल जैक्सन की तस्वीरें भी शामिल हैं. ट्रंप या क्लिंटन पर एपस्टीन से जुड़े किसी भी गलत काम का आरोप नहीं है.

फाइलों में शामिल सामग्री

न्याय विभाग ने बताया कि जारी फाइलों में तस्वीरें, कॉल लॉग्स, इंटरव्यू ट्रांस्क्रिप्ट्स, ग्रैंड जूरी गवाही और एपस्टीन की लंबे समय तक सहयोगी ब्रिटिश सोशलाइट घिसलेन मैक्सवेल से जुड़ी जानकारी शामिल है. मैक्सवेल को एपस्टीन के लिए अल्पवयस्क लड़कियों को भर्ती करने का आरोप लगा था और 2021 में 20 साल की जेल की सजा हुई. फाइलों में न्यूयॉर्क के मेट्रोपॉलिटन कोरेक्शनल सेंटर से वीडियो क्लिप्स भी हैं, जो एपस्टीन की जेल में मौत के दिन की थीं. अधिकारियों ने कहा कि ये वीडियो पहले ही जारी हो चुके थे और इसमें किसी और को एपस्टीन की सेल के पास नहीं आते दिखाया गया. (Epstein Files Ayurveda Sesame Oil Massage Indian Healing Practices in Hindi)

इतनी संवेदनशील सामग्री के कारण न्याय विभाग ने वेबसाइट पर विशेष इंतजार प्रणाली लागू की. वेबसाइट पर लोग कतार में रहते और 10 मिनट का समय मिलता था दस्तावेज देखने के लिए. न्याय विभाग ने कहा कि उन्होंने पीड़ितों और अन्य निजी लोगों की जानकारी सुरक्षित रखने के लिए सभी संभव कदम उठाए, लेकिन चेतावनी दी कि बड़े डेटा में कुछ निजी जानकारी गलती से शामिल हो सकती है. विभाग ने जनता से कहा कि अगर कोई संवेदनशील जानकारी दिखे तो तुरंत सूचित करें.

व्हाइट हाउस का बयान

व्हाइट हाउस ने कहा कि फाइलों का खुलासा इतिहास में सबसे पारदर्शी कदम है. व्हाइट हाउस की महिला प्रवक्ता, एबिगेल जैकसन ने कहा कि ट्रंप प्रशासन ने हजारों पन्ने जारी कर, हाउस ओवरसाइट कमेटी की मांग मानकर पीड़ितों के लिए सबसे ज्यादा किया. उन्होंने यह भी कहा कि डेमोक्रेट्स के एपस्टीन से जुड़े दोस्त भी सामने आए हैं. न्याय विभाग ने ट्वीट किया कि ट्रम्प प्रशासन ने पारदर्शिता के ऐसे स्तर दिखाए हैं जो किसी पूर्व प्रशासन ने कभी नहीं सोचे. हालांकि, जुलाई में विभाग ने लंबे समीक्षा के बाद कहा था कि अधिक खुलासा आवश्यक या उचित नहीं है.

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Govind Jee
Govind Jee
गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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