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ट्रंप को मिली पाकिस्तानी ‘रेअर अर्थ’, चीन के माथे पर नहीं आया शिकन, कहा- बीजिंग और इस्लामाबाद की अटूट दोस्ती

China Responds Pakistan Trump Rare Earth Metals: चीन ने कहा कि उसके ‘रेअर अर्थ’ खनिजों पर निर्यात नियंत्रण का पाकिस्तान द्वारा ट्रंप को दी गई धातुओं से कोई लेना-देना नहीं है; अफवाहें निराधार हैं.

China Responds Pakistan Trump Rare Earth Metals: दुनिया की सियासत में कभी-कभी एक तस्वीर ही तूफान खड़ा कर देती है. कुछ ऐसा ही हुआ पाकिस्तान, चीन और अमेरिका के बीच. एक तस्वीर वायरल हुई जिसमें पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक बॉक्स भेंट कर रहे हैं. कहा गया, बॉक्स में थीं रेअर अर्थ (Rare Earth) धातुएं वो कीमती खनिज जिन पर दुनिया की तकनीक टिकी है. फिर क्या था, अफवाहें उड़ने लगीं कि चीन ने इन धातुओं के निर्यात पर जो नए प्रतिबंध लगाए हैं, वो पाकिस्तान की इस “भेंट” से जुड़े हैं. अब बीजिंग सामने आया है और उसने साफ कह दिया है कि “इसमें न पाकिस्तान का कसूर है, न ट्रंप की भेंट का कोई लेना-देना.”

China Responds Pakistan Trump Rare Earth Metals: चीन की सफाई- ‘ये रिपोर्टें निराधार हैं’

सोमवार को बीजिंग में मीडिया ब्रीफिंग (सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स के एक सवाल का जवाब देते हुए)  के दौरान चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा है कि रेअर अर्थ और संबंधित वस्तुओं से जुड़े निर्यात नियंत्रण उपायों का पाकिस्तान से कोई लेना-देना नहीं है. आपने जिन रिपोर्टों का जिक्र किया है, वे या तो तथ्यों से अनजान हैं, या अटकलों पर आधारित हैं, या फिर मतभेद पैदा करने के इरादे से बनाई गई हैं. ये निराधार हैं. लिन ने यह भी कहा कि भले ही पाकिस्तान अमेरिका के साथ घनिष्ठ रिश्ते बना रहा हो, लेकिन बीजिंग और इस्लामाबाद की दोस्ती “अटूट” है.

क्या हैं ये ‘रेअर अर्थ धातुएं, जिन पर मचा घमासान?

चीन के पास दुनिया के दुर्लभ-पृथ्वी खनिजों के खनन और प्रोसेसिंग पर लगभग मोनोपॉली है. करीब 70 प्रतिशत खनन और 90 प्रतिशत प्रोसेसिंग चीन के हाथ में है. इन्हीं धातुओं से बनते हैं आधुनिक दुनिया के अहम औजार इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, रक्षा इक्विपमेंट, पवन ऊर्जा टर्बाइन आदि. यानि, टेक्नोलॉजी की रगों में दौड़ता लोहा चीन से आता है. इसी वजह से अमेरिका, यूरोपीय संघ और भारत जैसे बड़े देश चीन पर निर्भर हैं. हाल ही में बीजिंग ने निर्यात नियंत्रणों का दूसरा सेट जारी किया और आरोप लगाया कि कुछ विदेशी कंपनियां इन धातुओं का इस्तेमाल सैन्य उद्देश्यों के लिए कर रही हैं.

ट्रंप हुए नाराज, बोले- ‘100 प्रतिशत टैरिफ लगाऊंगा’

चीन के इस कदम के बाद अमेरिका में हलचल मच गई. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुस्से में कहा कि अगर चीन इन धातुओं की सप्लाई पर रोक लगाएगा, तो वह चीनी सामान पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगा देंगे. यानी ट्रेड वॉर का नया राउंड शुरू हो गया. इसी बीच पाकिस्तान से आई तस्वीर ने कहानी को और तूल दे दिया. लोगों ने जोड़-घटाव कर कहा कि चीन का नया प्रतिबंध शायद उसी “भेंट” का जवाब है, जो पाकिस्तान ने ट्रंप को दी. लिन जियान की दो-टूक में कहा कि “पाकिस्तान ने दिए थे रत्न ओर, न कि चीनी धातुएं”

लिन ने इस अटकल पर भी साफ बयान दिया.

“पाकिस्तानी नेताओं ने अमेरिकी नेता को जो नमूने दिखाए और दिए, वे पाकिस्तान के कर्मचारियों द्वारा खरीदे गए रत्न अयस्क (Gem Ores) हैं. आपने जिन खबरों का जिक्र किया है, वे या तो गलत जानकारी पर आधारित हैं, या मनगढ़ंत हैं, या फिर चीन और पाकिस्तान के बीच दरार डालने के लिए बनाई गई हैं. ये खबरें बिल्कुल निराधार हैं.” लिन ने आगे कहा कि चीन और पाकिस्तान सदैव रणनीतिक सहयोगी साझेदार हैं. हमारी अटूट दोस्ती समय की कसौटी पर खरी उतरी है. दोनों देशों ने साझा हितों से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर हमेशा उच्च-स्तरीय रणनीतिक विश्वास और संवाद बनाए रखा है.

चीन का तर्क- ‘निर्यात नियंत्रण पूरी तरह कानूनी है

लिन जियान ने कहा कि चीन द्वारा जारी किए गए नए निर्यात नियंत्रण उपाय उसकी अपनी कानूनी व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के अनुरूप हैं. इसका उद्देश्य विश्व शांति और क्षेत्रीय स्थिरता की बेहतर रक्षा करना है. साथ ही परमाणु अप्रसार और अन्य अंतरराष्ट्रीय दायित्वों को पूरा करना भी इसका हिस्सा है. यानि चीन के मुताबिक ये कदम किसी देश या घटना के खिलाफ नहीं, बल्कि वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए हैं.

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Govind Jee
Govind Jee
गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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